Monday, March 30, 2026
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कांवड़ यात्रा और मोहर्रम पर हुड़दंग….

UP :इन दिनों देश में दो बड़े धार्मिक आयोजन साथ-साथ चल रहे हैं — एक तरफ कांवड़ यात्रा और दूसरी तरफ मुहर्रम। दोनों ही आस्था और श्रद्धा से जुड़े हैं, लेकिन कुछ जगहों पर इन आयोजनों के नाम पर जो घटनाएं हो रही हैं, वे चिंता का कारण बन गई हैं कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री जैसी जगहों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों तक पैदल यात्रा करते हैं। ये एक पुराना और धार्मिक परंपरा है, लेकिन इस साल कुछ जगहों पर यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की खबरें आई हैं। मुजफ्फरनगर में एक ढाबे के मालिक का सिर्फ इतना कसूर था कि उसका नाम मुस्लिम था। जब कांवड़ियों ने QR कोड स्कैन कर उसका नाम देखा, तो बवाल मच गया। कई जगहों पर कांवड़ियों ने मीट की दुकानों को जबरन बंद कराया और रास्ते में ढोल-ताशे के साथ हुड़दंग जैसी तस्वीरें भी सामने आईं। दिल्ली में तो कुछ जगहों पर सड़कों पर कांच बिखरा मिला, जिससे कांवड़ियों को चोट लग सकती थी। इस पर बीजेपी नेताओं ने साजिश की आशंका जताई, तो पुलिस ने जांच शुरू कर दी।

वहीं दूसरी तरफ मुहर्रम का समय है, जो शिया मुसलमानों के लिए शहादत और ग़म का पर्व है। लेकिन जौनपुर में ताजिया जुलूस के दौरान करंट लगने से तीन लोगों की जान चली गई — क्योंकि ताजिया बिजली के तार से टकरा गया। बलिया में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फायरिंग और विवाद हुआ, जिसमें दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करना पड़ा। इन घटनाओं से साफ हो गया कि कहीं-न-कहीं सुरक्षा इंतज़ामों में चूक हो रही है। अब प्रशासन ने मुहर्रम और कांवड़ दोनों आयोजनों में सख्ती बढ़ा दी है — जैसे CCTV से निगरानी, ऊंचाई तय, तेज़ आवाज़ों पर पाबंदी और आयोजकों की पहचान पंजीकृत करनामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल की घटनाओं पर दो टूक बात की है। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों को आतंकी कहने वाले लोग असल में खुद नफरत फैला रहे हैं। साथ ही ये भी कहा कि मुहर्रम में कोई भी नियम तोड़ने की छूट नहीं दी जाएगी — “बातों से नहीं, अब लातों से समझाना पड़ेगा” जैसी भाषा में उन्होंने साफ संकेत दिया कि अब ढील नहीं दी जाएगी।

लेकिन इस सब के बीच कुछ जगहों से उम्मीद की खबरें भी आई हैं। जैसे चंदौली ज़िले के एक गांव में हिंदू-मुस्लिम मिलकर मुहर्रम का जुलूस निकालते हैं, और साथ बैठकर ताजिया की मटकी फोड़ते हैं। वहां धर्म नहीं, इंसानियत और भाईचारा आगे आता है सवाल यही है — क्या हमारे त्योहार अब सिर्फ शक्ति प्रदर्शन और टकराव का कारण बन गए हैं? आस्था तब तक खूबसूरत है, जब तक वो दूसरों के लिए खतरा न बने। जब सड़कें बंद हो जाएं, जब दुकानदार डरने लगें, जब धर्म के नाम पर तनाव हो — तब ये सोचने का समय है कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं?
धर्म का असली मकसद जोड़ना है, तोड़ना नहीं। पुलिस, प्रशासन, नेता और आम जनता — सभी को मिलकर यह तय करना होगा कि आस्था और अनुशासन दोनों साथ चलें। तभी कांवड़ भी शांतिपूर्ण होगी, और मुहर्रम भी सुरक्षित।

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