लखनऊ। तनज़ीमुल मकातिब के सचिव मौलाना सय्यद सफी हैदर ने कहा है कि विश्व स्तर पर बढ़ती धमकीपूर्ण राजनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव की प्रवृत्ति के विरुद्ध संगठित आवाज़ उठाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि न्यायप्रिय भारतीय किसी भी शक्ति को यह अनुमति नहीं देंगे कि वह वैश्विक शांति और न्याय को कमजोर करे या संप्रभु देशों को धमकियों के माध्यम से दबाने का प्रयास करे।
उन्होंने कहा कि भारत सदैव शांति, सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान का समर्थक रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत ने संतुलित और शांतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। ऐसे में जहां कहीं भी अन्याय, दबाव या धमकी की राजनीति दिखाई दे, उसके विरुद्ध आवाज़ उठाना नैतिक दायित्व है। मौलाना ने स्पष्ट किया कि चाहे ईरान हो या वेनेजुएला, किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के खिलाफ धमकी की नीति अस्वीकार्य है।
अमेरिका की हालिया नीतियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं को वैश्विक शक्ति बताने वाले देश का यह रवैया चिंताजनक है। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनई के विरुद्ध कथित अपहरण या जान से मारने जैसी धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विरुद्ध बताया और कहा कि इस प्रकार की बयानबाज़ी विश्व शांति के लिए घातक संकेत है। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह ख़ामेनई केवल ईरान के सर्वोच्च नेता ही नहीं, बल्कि विश्व भर के शिया समुदाय के धार्मिक मार्गदर्शक भी हैं, इसलिए उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की आक्रामकता अस्वीकार्य है।
मौलाना सय्यद सफी हैदर ने कहा कि यदि किसी भी धार्मिक या राष्ट्रीय नेतृत्व के खिलाफ ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर उसका सशक्त विरोध किया जाएगा। यह विषय केवल किसी एक मजहब या समुदाय का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और वैश्विक न्याय का प्रश्न है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ऐसे भ्रामक प्रचार और झूठी खबरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, जो धार्मिक नेताओं की छवि को धूमिल करने का प्रयास करती हैं। कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है, इसलिए जिम्मेदार आचरण आवश्यक है।
मौलाना ने घोषणा की कि ‘अमन व इंसाफ आंदोलन’ के बैनर तले एक हस्ताक्षर अभियान प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न धर्मों के विद्वानों, वक्ताओं, बुद्धिजीवियों और नागरिकों से समर्थन लिया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य शांति, न्याय और धार्मिक सम्मान के पक्ष में सामूहिक संदेश देना है।
उन्होंने आगे बताया कि रमज़ान के बाद अमेरिका की कथित दबावपूर्ण नीतियों के विरोध में एक अंतरधार्मिक सम्मेलन आयोजित करने की योजना है, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि संयुक्त रूप से शांति, न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा का संदेश दिया जा सके।
अंत में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी देश या समुदाय से शत्रुता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर न्याय, संप्रभुता और आपसी सम्मान को सुदृढ़ करना है। भारत की परंपरा शांति और सद्भाव की रही है और उसी मार्ग पर आगे बढ़ना समय की मांग है।



