लखनऊ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन उत्साह, वैज्ञानिक चेतना और नवाचार की ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। समापन सत्र में “राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार कार्यशाला” का प्रभावशाली आयोजन किया गया, जिसने पूरे कार्यक्रम को विशेष आयाम प्रदान किया।
यह कार्यशाला माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा के संरक्षण में तथा विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. तत्हीर फ़ात्मा (संयोजक) एवं डॉ. एस. के. मिश्रा (सह-संयोजक) के नेतृत्व में आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान को प्रयोगशाला से निकालकर समाज के व्यापक परिप्रेक्ष्य तक पहुँचाना और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार क्षमता तथा प्रभावी संवाद कौशल विकसित करना था।
कार्यशाला के अंतर्गत विज्ञान संचार, तकनीकी जागरूकता, नवाचार और शोध संस्कृति पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। इस अवसर पर डॉ. तारिक बदर, डॉ. ओम प्रकाश, डॉ. अनुप चतुर्वेदी, डॉ. ए. के. सिंह, डॉ. आलोक कृष्णा एवं डॉ. नवनीत सिंघल सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विशेष रूप से डॉ. वी. पी. सिंह, एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी, इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी, लखनऊ ने अपने विचार रखते हुए समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास हेतु प्रभावी विज्ञान संचार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को समय की मांग बताते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों और परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टि से जोड़कर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने बहराइच की थारू महिलाओं द्वारा गेहूँ के तनों से निर्मित भगवान गौतम बुद्ध का एक आकर्षक एवं कलात्मक चित्र कुलपति प्रो. अजय तनेजा को भेंट किया। यह कलाकृति स्थानीय शिल्पकला और “स्थानीय से वैश्विक” की अवधारणा का सशक्त प्रतीक रही।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रीजनल साइंस सिटी से पधारे विज्ञान संचारक श्री आशु द्वारा प्रस्तुत “साइंस विद फन” का रोचक प्रदर्शन रहा। उन्होंने सरल वैज्ञानिक सिद्धांतों को मनोरंजक प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति उत्साहित किया। उनके प्रयोगों ने यह संदेश दिया कि विज्ञान केवल सैद्धांतिक विषय नहीं, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़ा एक जीवंत अनुभव है।
26 से 28 फरवरी तक आयोजित “वैज्ञानिक उपकरण एवं तकनीक” कार्यशाला के अंतर्गत कुल 34 प्रयोग संपन्न कराए गए। इनमें औषधि निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य मिलावट की पहचान, दूध एवं जल गुणवत्ता परीक्षण, जैवरासायनिक विश्लेषण, तथा आणविक जीवविज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान की मूलभूत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल रहा। लगभग 100 छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता करते हुए प्रयोगात्मक ज्ञान अर्जित किया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर इंजीनियर अखिलेश कुशवाहा, निदेशक, आईटीएलएस (ITLS) अकादमी द्वारा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु कुलपति प्रो. अजय तनेजा को “रिसर्च एंड इनोवेशन अवॉर्ड” तथा विज्ञान एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरक नेतृत्व के लिए अधिष्ठाता प्रो. तत्हीर फ़ात्मा को “वूमेन लीडरशिप अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया।
यह तीन दिवसीय आयोजन विज्ञान संचार को सुदृढ़ करने, अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने और ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।



