लखनऊ शिया जगत के महान धर्मगुरु (मरजए आली मुक़ाम), आलिमे रब्बानी और फ़क़ीहे जलीलुल क़द्र हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाज सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी (क़ुद्दिस सिररुहू) का दुखद निधन (इरतेहाले पुरमलाल) हो गया है। उनके निधन से पूरे शिया जगत (आलमे तशय्यु) और इस्लामी ज्ञान केंद्रों (हौज़ाए इल्मिया) में शोक की लहर दौड़ गई है।
आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी का संपूर्ण जीवन अहले बैत (अलैहिमिस सलाम) की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार, फ़िक़्ह व उसूल के अध्यापन और शोध (तदरीस व तहक़ीक़), छात्रों के मार्गदर्शन और हौज़ाए इल्मिया की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनकी महान वैज्ञानिक व धार्मिक सेवाएँ और बहुमूल्य कृतियाँ हमेशा शिया जगत के लिए गर्व का स्रोत रहेंगी।
इस महान क्षति पर ‘मरकज़े फ़िक़्ह व फ़क़ाहत’ (दफ़्तरे नुमाइंदगी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा वहीद ख़ुरासानी) ने गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। दफ़्तर की ओर से जारी बयान में हज़रत वलीए अस्र (अज्जलल्लाहु तआला फ़रजहुश शरीफ़), मराजिए इज़ाम, हौज़ाए इल्मिया, दिवंगत मरजा के शिष्यों, प्रशंसकों और शोकाकुल परिवार की सेवा में विनम्र सांत्वना व समवेदना (तज़ियत व तसलीयत) पेश की गई है।
बयान के अंत में ईश्वर (बारगाहे ख़ुदावंदे मुतआल) से प्रार्थना की गई है कि वह मरहूम आयतुल्लाह ज़ंजानी को मोहम्मद व आले मोहम्मद (अलैहिमिस सलाम) के जवार में उच्च स्थान (आला दरजात) प्रदान करे और सभी शोकाकुल परिजनों, शिष्यों और अहले बैत के प्रेमियों को धैर्य (सब्रे जमील) और उत्तम फल (अज्रे जज़ील) अता फरमाए।



