लखीमपुर खीरी की पलिया तहसीलदार की टाल-मटोल से हताश 13 साल की बच्ची सोमवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के दरबार में पहुंची। 33 बीघा जमीन की मालिक बच्ची को पढ़ाई के लिए भी दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। बच्ची का कसूर इतना है कि उसने पिता की मौत के 52 दिन बाद जन्म लिया था।
पलिया तहसील के गांव विचित्रनगर की इकरा (13) ने बताया कि पिता सैयद मोहम्मद असलम की 3 जून 2013 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में मृत्यु हो गई थी, उस समय माँ सैयदा बेगम गर्भवती थीं और 52 दिन बाद 25 जुलाई 13 को उसका जन्म हुआ। सैयद मोहम्मद असलम की मौत के पांच साल बाद उनकी बहन शहरबानो ने सैयदा की दूसरी शादी करा दी। सैयदा के साथ इकरा को भी विदा कर दिया। इसके बाद उसने राजस्वकर्मियों से साठगांठ करके सैयद मोहम्मद असलम की सारी सम्पत्ति उनके तीन बेटों के नाम कराई और खुद संरक्षिका बनकर सारी सम्पत्ति पर काबिज हो गई। वरासत के दौरान उसने सैयद मोहम्मद असलम की चौथी संतान का नाम छिपा लिया। इसकी भनक लगने पर इकरा के मामा ने अफसरों की गुहार लगाई परिवार रजिस्टर, आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज पेश किए। पलिया की तहसीलदार ने यह कहकर खारिज कर दिया कि मामा संरक्षक नहीं बन सकता। इस पर सैयदा के अपनी बेटी को हक दिलाने के लिए अर्जी दी और खुद को संरक्षक बनाने की मांग की लेकिन तहसीलदार ने टाल दिया। डीएम-एसडीएम ने भी सुनवाई नहीं की। अफसरों के चक्कर काटकर हताश सैयदा बेगम सोमवार को अपनी बेटी को लेकर मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंची। वहां उसे इंसाफ का आश्वासन मिला है।



