लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में पिछले कुछ दिनों से चल रही संगठनात्मक उठापटक के बीच मायावती ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया। राजधानी लखनऊ में आयोजित पार्टी की अहम बैठक में मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को बसपा का नया राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था। ईशान आनंद को मिली नई जिम्मेदारी के साथ बसपा के भीतर संगठनात्मक बदलाव का एक और महत्वपूर्ण अध्याय सामने आया है।
बसपा की यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई, जब पार्टी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी मंथन कर रही है। बैठक में देशभर के पार्टी पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पार्टी की ओर से संगठन को मजबूत करने, चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने और आगामी राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
ईशान आनंद को मिली बड़ी जिम्मेदारी
लखनऊ में हुई बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने का ऐलान किया गया। इससे पहले मायावती ने संकेत दिया था कि वह अपने छोटे भतीजे को पार्टी संगठन में एक सम्मानजनक जिम्मेदारी देंगी। बुधवार की बैठक में इस घोषणा को औपचारिक रूप दे दिया गया। बैठक में पहुंचने के बाद ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया।
ईशान आनंद को मिली यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ सप्ताह में बसपा के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे में कई बदलाव हुए हैं। आकाश आनंद को पहले महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से हटाया गया और बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद ईशान आनंद को लेकर मायावती ने अपने रुख में बदलाव किया और उन्हें संगठन में आगे बढ़ाने का फैसला किया।
आकाश आनंद के बाद बदला राजनीतिक घटनाक्रम
बसपा में हालिया बदलाव की शुरुआत सितंबर की शुरुआत में हुई थी। पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय पद से हटाकर उन्हें सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करने की बात कही थी। इसके बाद कुछ ही दिनों में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं।
आकाश आनंद कभी मायावती के घोषित राजनीतिक उत्तराधिकारी भी रहे थे। दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, बाद के वर्षों में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका में कई बदलाव देखने को मिले। सितंबर 2026 में उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाने और बाद में निष्कासित करने के फैसले ने बसपा की आंतरिक राजनीति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।
ईशान को लेकर मायावती ने बदला रुख
ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने का फैसला मायावती के हालिया बयानों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। इससे पहले मायावती ने संकेत दिया था कि उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने को लेकर वह सावधानी बरतेंगी। इसके बावजूद बाद में उन्होंने ईशान आनंद को संगठन में आगे बढ़ाने का फैसला किया।
20 सितंबर को मायावती ने कहा था कि ईशान को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए 23 सितंबर की राष्ट्रीय स्तर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा था। अब बैठक में उन्हें राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किए जाने की घोषणा कर दी गई है।
यूपी के साथ उत्तराखंड और पंजाब पर भी नजर
बसपा की बुधवार की बैठक केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रही। पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी अपनी रणनीति पर चर्चा कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन राज्यों में संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियां बढ़ाने और चुनावी तैयारियों की समीक्षा पर जोर दिया गया।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बसपा के लिए संगठन को सक्रिय करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी लंबे समय से अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के बीच सक्रियता बढ़ाने पर जोर देती रही है।
बैठक में राज्य इकाइयों के कामकाज की भी समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई है। राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से पहले दिए गए निर्देशों पर राज्यों में कितना काम हुआ, इसकी जानकारी भी ली जा रही है। साथ ही आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी संगठन में आवश्यक बदलावों पर भी चर्चा की जा रही है।
संगठन में बदलाव के बीच नई जिम्मेदारी
ईशान आनंद के राष्ट्रीय संयोजक बनने के बाद बसपा संगठन में उनकी भूमिका पहले की तुलना में काफी महत्वपूर्ण हो गई है। राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय और संगठन को सक्रिय रखने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, इस नई जिम्मेदारी के बाद उनका राजनीतिक प्रदर्शन और संगठन में उनकी सक्रियता आने वाले समय में किस तरह रहती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल पार्टी ने उन्हें महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंप दी है।
परिवार और संगठन को लेकर चर्चा
बसपा में हाल के घटनाक्रम के बाद पार्टी में परिवार की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। आकाश आनंद को पहले उत्तराधिकारी के रूप में सामने लाया गया था, लेकिन अब वह पार्टी से बाहर हैं। दूसरी ओर ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। इस बदलाव ने बसपा के भीतर नेतृत्व व्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। विभिन्न रिपोर्टों में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर अलग-अलग विश्लेषण सामने आए हैं।
मायावती ने हाल के बयानों में पार्टी को कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा के आधार पर चलाने और संगठन को मजबूत करने की बात कही है। दूसरी ओर, ईशान आनंद को जिम्मेदारी देने का फैसला यह बताता है कि पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल उनके लिए संगठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका तय की है।
अब आगे क्या?
ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन को चुनावी तैयारियों के लिहाज से सक्रिय करना होगी। उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और पंजाब में भी आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए बसपा के सामने संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जमीनी स्तर पर पार्टी की मौजूदगी बढ़ाने की चुनौती है।
लखनऊ में हुई बैठक में मायावती ने राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के साथ पार्टी की स्थिति और चुनावी तैयारियों पर चर्चा की। ऐसे में आने वाले दिनों में बसपा की ओर से संगठन में और बदलाव किए जाने तथा चुनावी रणनीति से जुड़े फैसलों की घोषणा की जा सकती है।
फिलहाल बुधवार का दिन बसपा की आंतरिक राजनीति के लिहाज से अहम रहा। एक तरफ बड़े भतीजे आकाश आनंद पार्टी से बाहर हैं, वहीं दूसरी तरफ छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी देकर मायावती ने उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। अब ईशान आनंद के सामने नई जिम्मेदारी के साथ पार्टी संगठन को संभालने और आगामी चुनावों की तैयारियों में भूमिका निभाने की चुनौती होगी।



