अमरोहा। ऑपरेशन पर हुए खर्च का बीमा क्लेम देने से इन्कार करने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने कंपनी को 63 हजार रुपये की क्लेम राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को आर्थिक और मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग के इस आदेश के तहत बीमा कंपनी को क्लेम राशि के साथ शिकायतकर्ता को हुई परेशानी की भरपाई भी करनी होगी। मामले में ऑपरेशन पर हुए खर्च का क्लेम देने से इनकार किए जाने के बाद उपभोक्ता को आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सुनवाई के दौरान आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम नहीं दिए जाने के मामले को सेवा में कमी से जुड़ा माना और शिकायतकर्ता के पक्ष में आदेश जारी किया।
ऑपरेशन के खर्च का क्लेम देने से किया था इन्कार
यह मामला ऑपरेशन पर हुए खर्च की भरपाई के लिए बीमा कंपनी से क्लेम मांगने से जुड़ा है। बीमा लेने वाले व्यक्ति को उम्मीद होती है कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्र चिकित्सा खर्च होने पर उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान मिलेगा। लेकिन जब कंपनी क्लेम देने से इन्कार कर देती है, तो उपभोक्ता के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो सकती है।
अमरोहा के इस मामले में भी ऑपरेशन पर हुए खर्च का क्लेम नहीं दिए जाने के बाद विवाद जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। आयोग ने मामले पर विचार करते हुए बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना। इसके बाद क्लेम की राशि लौटाने और शिकायतकर्ता को अन्य मदों में मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में शिकायतकर्ता का नाम, ऑपरेशन की प्रकृति, बीमा पॉलिसी का प्रकार और कंपनी की ओर से क्लेम अस्वीकार करने का सटीक कारण नहीं बताया गया है। इसलिए मामले से जुड़े इन पहलुओं के बारे में कोई अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
63 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने होंगे
जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 63 हजार रुपये का क्लेम नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। इस निर्देश के अनुसार कंपनी को मूल क्लेम राशि के साथ निर्धारित दर से ब्याज का भुगतान भी करना होगा।
ब्याज की गणना किस तारीख से की जाएगी, इसका स्पष्ट विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। इसलिए कुल देय राशि का सटीक आकलन करने के लिए आदेश में उल्लिखित ब्याज की शुरुआत और भुगतान से संबंधित शर्तों को देखना आवश्यक होगा।
क्लेम राशि और ब्याज का भुगतान उपभोक्ता को उसके चिकित्सा खर्च की भरपाई दिलाने से जुड़ा है। आयोग का आदेश इस बात पर केंद्रित है कि बीमा कंपनी क्लेम देने से इन्कार करने के मामले में सेवा में कमी की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
बीमा पॉलिसी के तहत चिकित्सा खर्च की भरपाई को लेकर विवाद होने पर पॉलिसी की शर्तें, उपलब्ध दस्तावेज और क्लेम अस्वीकार किए जाने के कारण महत्वपूर्ण होते हैं। उपभोक्ता आयोग ऐसे विवादों में प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय करता है।
मानसिक और आर्थिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये
आयोग ने क्लेम राशि लौटाने के अलावा शिकायतकर्ता को आर्थिक और मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है। इसका अर्थ है कि कंपनी को केवल 63 हजार रुपये के क्लेम और उस पर निर्धारित ब्याज का भुगतान ही नहीं करना होगा, बल्कि शिकायतकर्ता को हुई परेशानी के लिए अतिरिक्त राशि भी देनी होगी।
किसी चिकित्सा खर्च का क्लेम नहीं मिलने पर उपभोक्ता को अपने खर्च की भरपाई के लिए अलग से प्रयास करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आर्थिक दबाव के साथ मानसिक परेशानी भी हो सकती है। इस मामले में आयोग ने इसी मद में 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में शिकायतकर्ता की आर्थिक स्थिति या मानसिक परेशानी से जुड़े अलग-अलग तथ्यों का उल्लेख नहीं है। आयोग ने अपने आदेश में इस मद के लिए निर्धारित राशि देने का निर्देश दिया है।
वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने होंगे
जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है। यह राशि उपभोक्ता को मामले की पैरवी और शिकायत से जुड़े खर्चों के लिए दी जानी है।
इस तरह आयोग के आदेश में तीन प्रमुख वित्तीय मद शामिल हैं। पहली, 63 हजार रुपये की क्लेम राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाना; दूसरी, आर्थिक और मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये देना; और तीसरी, वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का भुगतान करना।
मूल क्लेम राशि और अन्य दोनों निर्धारित राशियों को जोड़ने पर ब्याज से पहले कुल राशि 78 हजार रुपये होती है। इसमें 63 हजार रुपये का क्लेम, 10 हजार रुपये मानसिक और आर्थिक पीड़ा के लिए तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त क्लेम राशि पर आदेश के अनुसार नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से अहम आदेश
बीमा क्लेम से जुड़े विवादों में उपभोक्ताओं के लिए पॉलिसी की शर्तों को समझना और चिकित्सा खर्च से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण होता है। अस्पताल के बिल, ऑपरेशन से जुड़े कागजात, बीमा पॉलिसी और क्लेम आवेदन से संबंधित रिकॉर्ड विवाद की स्थिति में उपयोगी हो सकते हैं।
यदि बीमा कंपनी किसी क्लेम को अस्वीकार करती है, तो अस्वीकृति का कारण समझना और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अपनी शिकायत प्रस्तुत करना उपभोक्ता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, हर मामले का निर्णय उसके तथ्यों, पॉलिसी की शर्तों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
अमरोहा के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए शिकायतकर्ता को राहत दी है। कंपनी को 63 हजार रुपये की क्लेम राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के साथ 10 हजार रुपये मानसिक और आर्थिक पीड़ा के लिए तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने होंगे।
यह आदेश बीमा क्लेम से जुड़े विवादों में उपभोक्ता आयोग की भूमिका को रेखांकित करता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में बीमा कंपनी का नाम, मामले की सुनवाई की तारीख और आदेश के अनुपालन की स्थिति का विवरण नहीं है। इसलिए आगे की कार्रवाई या भुगतान के संबंध में कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता।



