बिलग्राम /अहलेबैत (अ.स.) के मक़बूल शायर और समाज में अपनी सादगी, मोहब्बत और इंसानियत की पहचान रखने वाले मरहूम मोहम्मद आमिर ख़ान “आमिर फ़ैज़ाबादी” के चेहलुम की मजलिस आज उनके पैतृक गांव रसूलपुर में अदा की गई। चेहलुम में शामिल होने के लिए प्रदेश के कई जिलों से मोमिनीन, उलेमा-ए-किराम, शोआरा-ए-अहलेबैत और स्थानीय समाज के लोग भारी संख्या में पहुंचे, जिससे पूरा गाँव मातमी माहौल में डूब गया।
उलेमा-ए-किराम के ख़ुत्बे ने बांधा समा
मजलिस को मौलाना ग़ज़नफ़र अब्बास तूसी क़िबला और मौलाना शरर नक़वी क़िबला ने खि़ताब किया। दोनों उलेमा ने अहलेबैत (अ.स.) की सीख, इस्लामी अख़लाक़ और मरहूम की शख़्सियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि आमिर फ़ैज़ाबादी ने अपनी ज़िंदगी इंसानियत, मुहब्बत और मिलनसारी के साथ बिताई, और यही वजह है कि आज इतनी बड़ी तादाद में लोग उनकी याद में इकट्ठा हुए हैं।
शोआरा-ए-अहलेबैत ने पेश की मुनफ़रिद पेशख़्वानी
विभिन्न शहरों और क़स्बों से पहुंचे शोआरा-ए-अहलेबैत ने अपने कलाम और नव्हों से ग़म-ए-हुसैन (अ.स.) के रंग को और गहरा कर दिया। पेशख़्वानी के दौरान माहौल मातम और एहतराम से भर गया।
ताज़ियात के लिए उलेमा और अहम शख़्सियतें रहीं मौजूद
ताज़ियत पेश करने के लिए मौलाना डॉ. क़ल्बे रुशैद रिज़वी, कई नामचीन उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मरहूम की शख़्सियत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा इंसानियत और भाईचारे को बढ़ावा दिया।
वीडियोग्राफ़ी और इंतज़ामात की रही सराहना
कार्यक्रम में दिल्ली से आई “Azadari Chittoora” टीम और लखनऊ की “Graph Agency” द्वारा की गई वीडियोग्राफ़ी ने आयोजन को और ख़ास बनाया। मजलिस और मातम के पूरे इंतज़ामात की प्रशंसा हर तरफ़ सुनाई दी।
मोहब्बत, वफ़ादारी और ख़ुलूस की मिसाल बने आमिर फ़ैज़ाबादी
परिवार ने बताया कि तदफ़ीन से लेकर सेयूम और चेहलुम तक आमिर भाई के ख़ास दोस्तों ने जिस तरह वफ़ादारी, मोहब्बत और ख़ुलूस से साथ निभाया, उसने करबला के वफ़ादार रफ़ीक़ों की याद ताज़ा कर दी।
परिवार ने अहलेबैत (अ.स.) के वसीले से सभी मोमिनीन के लिए भलाई और मरहूम की मग़फ़िरत की दुआ की।




