सम्भल /सिरसी उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी, लखनऊ के तत्वावधान में इंडियन मैरिज हॉल, बुद्ध बाजार में आयोजित ‘ऑल इंडिया मुशायरा’ अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। मुशायरे में देश के विभिन्न हिस्सों से आए नामचीन शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर अनवर कैफ़ी मुरादाबादी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में समर अब्बास (चेयरमैन प्रतिनिधि, नगर पंचायत सिरसी) उपस्थित रहे। साथ ही मुजाहिद फ़राज़ ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मेहमान-ए-एज़ाज़ी के रूप में कशिश वारसी (क़ौमी सदर, भारतीय सूफ़ी फाउंडेशन) एवं डॉ. मुनव्वर ताबिश मौजूद रहे। मुशायरे की सफल निज़ामत हकीम बुरहान सम्भली ने अपने शानदार अंदाज़ में की।
शायरों ने बांधा समां
देर रात तक चली इस अदबी महफ़िल में शायरों ने एक से बढ़कर एक अशआर पढ़े। डॉ. मुनव्वर ताबिश संभली ने पढ़ा— “हिजरत की बात आए भी कैसे गुमान में, अजदाद मेरे दफ्न हैं हिंदुस्तान में”। वहीं निज़ाम नौशाही मुंबई ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा— “हर लम्हा दिए जाते हैं ग़म देख रहा हूं, अपनो के ये अंदाज़े करम देख रहा हूं”।
मेहदी सिरसीवी ने इतिहास को याद करते हुए पढ़ा— “पलट के देखिए तारीख की किताबों को, हर एक वर्क पा लहू का निशान बाकी है”। डॉ. अनस इकान की पंक्तियाँ “तुम्हारे ग़म को सदा अपने पास रहने दिया” और अब्बास सिरसवी के शेर “मेरे अजदाद के तेवर मेरी ग़ैरत में रहे” पर श्रोताओं ने भरपूर दाद दी। इनके अलावा डॉ. शफीक उर रहमान बरकाती, शिबान क़ादरी, सुलेमान फ़राज़, नासिर अमरोहवी, अभिषेक तिवारी शिमला और ताहिर संभली ने भी अपनी रचनाओं से प्रभावित किया।
उर्दू अदब के प्रचार पर जोर
कार्यक्रम के अंत में आयोजक दानिश ग़दीरी (डायरेक्टर/फाउंडर, शायरिस्तान फाउंडेशन), एम.ए. खान और डॉ. शाकिर हुसैन इस्लाही ने सभी अतिथियों का आभार जताया। उन्होंने संयुक्त रूप से कहा कि इस तरह के आयोजन उर्दू साहित्य और तहजीब के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजन को सफल बनाने में अशरफ अली ख़ान, अर्जुन कुमार कश्यप और तंज़ील ख़ान का विशेष सहयोग रहा।



