लखनऊ: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ,अवध की राजमाता,शासक बेगम हज़रत महल की 147वीं बरसी के मौके पर सालाना समारोह आज, मंगलवार को सुबह बेगम हज़रत महल पार्क, हज़रतगंज, लखनऊ में आयोजित किया गया । जिसमें वक्ताओं ने कहा कि जहाँ सभी भारतीयों के नेता, आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र ने दिल्ली में आज़ादी की मशाल जलाई, वहीं अवध की शासक महारानी बेगम हज़रत महल ने अवध रियासत में आज़ादी की मशाल जलाई। वह जंग के मैदान में आगे आयीं, अंग्रेज़ों से लड़ीं और लोगों का नेतृत्व किया। यही वजह है कि उन्हें 150 साल बाद भी याद किया जा रहा है। 1751 में दक्षिण भारत के नवाब हैदर अली, उनके बेटे शेरे मैसूर नवाब टीपू सुल्तान और बंगाल के सिराजुद्दौला ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और उनके सहयोगियों की सेवाएं और बलिदान अविस्मरणीय हैं। नई पीढ़ी को उनके बारे में जागरूक करने और उनमें देश के लिए बलिदान की भावना जगाने की जरूरत है। इस वार्षिक कार्यक्रम का उद्घाटन इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने किया। न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि बेगम हजरत महल अपने राज्य के लोगों का मार्गदर्शन करने के साथ-साथ मैदाने जंग में भी सक्रिय थीं। इसके लिए उन्हें अपने वतन से दूर भी होना पड़ा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. अब्बास अली मेहदी और सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल एडवोकेट ने बेगम हजरत महल और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की सेवाओं और बलिदानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बेगम हजरत महल सोसाइटी के फाउंडर अध्यक्ष अब्दुल नसीर नासिर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि बेगम हज़रत महल की याद में जल्द ही एक ड्रामा ‘बेगम हज़रत महल’ और एक कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, डॉ. सुनील कुमार मिश्रा, डॉ. ऋषि मिश्रा, डॉ. आमोद सचान, चेयरमैन हिन्द मेडिकल कालेज जुबैर अहमद उस्मानी, सीए अग्रवाल, आदि ने भी अपने विचार रखे। बेगम मेहताब जहां ने बेगम हज़रत महल को कविता के ज़रिए श्रद्धांजलि दी। संचालन मुहम्मद गुफरान नसीम ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में नागरिक, स्टूडेंट्स, वकील और शहर के जाने-माने लोग मौजूद थे।



