लखनऊ। आयकर विभाग के आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण प्रकोष्ठ, लखनऊ की ओर से शुक्रवार को आयकर भवन, अशोक मार्ग में जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय लेन-देन की सही और समय पर जानकारी उपलब्ध कराने, कर नियमों के अनुपालन तथा कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि कर व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता और उनकी समयबद्ध रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है।
आयकर विभाग का आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण प्रकोष्ठ विशेष रूप से निर्दिष्ट वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग पर निगरानी रख रहा है। इसके तहत बैंकों में नकदी जमा करने और निकालने, सावधि जमा, 10 लाख रुपये से अधिक के शेयर आवेदन, 45 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री तथा दो लाख रुपये से अधिक मूल्य के माल की खरीद-बिक्री से जुड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष लखनऊ प्रकोष्ठ की ओर से 46 स्थलीय सत्यापन किए गए। इन जांचों में 4,311 ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए, जिनकी कुल राशि 2,747.50 करोड़ रुपये थी और जिनकी रिपोर्ट नहीं की गई थी। इनमें से 1,714 लेन-देन, जिनकी कुल राशि 1,160.75 करोड़ रुपये थी, की रिपोर्ट अब विधिवत कर दी गई है।
इसी तरह, 26,628 त्रुटिपूर्ण वित्तीय लेन-देन सामने आए, जिनकी कुल राशि 14,414.82 करोड़ रुपये थी। इनमें से 17,487 लेन-देन से संबंधित जानकारी को संशोधित कर सही किया गया। इन लेन-देन की कुल राशि 9,293.06 करोड़ रुपये रही। सत्यापन के दौरान कुछ बैंकों की ओर से ग्राहकों को दिए गए ब्याज की रिपोर्ट भी दर्ज नहीं किए जाने का मामला सामने आया। जांच के बाद इनकी रिपोर्टिंग सुनिश्चित की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रकोष्ठ का मुख्य उद्देश्य कर आधार का विस्तार करना और वित्तीय लेन-देन से संबंधित सूचनाओं के सही संकलन के माध्यम से कर अनुपालन को मजबूत करना है। इस दिशा में की गई कार्रवाई के तहत प्रदेश में अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री के पंजीकरण में स्थायी खाता संख्या (पैन) का उल्लेख अनिवार्य किया गया है। इससे संपत्ति के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ने और कर अपवंचन पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह अभियान निदेशक एस.एच. उस्मानी और संयुक्त निदेशक सोनल सिंह के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। इसमें उप निदेशक संदीप सिंह, आयकर अधिकारी राकेश कुमार वर्मा तथा आयकर अधिकारी (मुख्यालय) अभिषेक वर्मा का भी सहयोग रहा।



