Saturday, September 19, 2026
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डाबर हाजमोला का नया अभियान: मस्ती की पाठशाला से बच्चों में बढ़ेगी शारीरिक सक्रियता

लखनऊ। भारत की अग्रणी आयुर्वेदिक और प्राकृतिक स्वास्थ्य देखभाल कंपनियों में से एक डाबर इंडिया लिमिटेड ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान हाजमोला मस्ती की पाठशाला की घोषणा की। यह विशाल कार्यक्रम स्कूली बच्चों के बीच शारीरिक खेल-कूद और मनोरंजन के महत्व को समझाने के लिए बनाया गया है, जो हाजमोला ब्रांड की खुशमिजाज और मजेदार पहचान के बिल्कुल अनुकूल है। मस्ती की पाठशाला अभियान उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में एक बड़े स्तर पर चलाया जाएगा। जिसके क्रम में आज यहां सरस्वती बालिका विद्या मंदिर जानकीपुरम.में हाजमोला मस्ती की पाठशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि श्रीआयु ज्वाइंट केयर के चिकित्सक डा. राजन वर्मा, डाबर इंडिया लिमिटेड, मैनेजर कॉरपोरेट कम्युनिकेशन श्री दिनेश कुमार, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या श्रीमती सुधा तिवारी मौजूद रहे। यह अभियान 20 प्रमुख शहरों के कुल 550 स्कूलों में शुरू होगा, जिसका लक्ष्य 2.5 लाख से अधिक छात्रों को फायदा पहुँचाना है। इस अभियान को मनोरंजक और शिक्षाप्रद गतिविधियों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें विशेष रूप से फन गेम्स (मजेदार खेल) के सत्र रखे गए हैं, ताकि छात्र सुस्ती और आलस छोड़कर शारीरिक खेलों में हिस्सा ले सकें और स्वस्थ रह सकें। इसके साथ ही, इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और फिटनेस विशेषज्ञों के विशेष सत्र भी होंगे। ये सत्र छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को यह समझाने के लिए समर्पित हैं कि एक बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए दैनिक शारीरिक गतिविधियाँ कितनी जरूरी हैं। इसमें एकाग्रता बढ़ाने, मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने और पाचन को स्वस्थ रखने जैसे फायदों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा।श्रीराम पद्मनाभन, डायरेक्टर मार्केटिंग, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा कि मस्ती की पाठशाला के जरिए हम मनोरंजन (मस्ती) और फिटनेस को एक साथ जोड़ रहे हैं। आजकल बच्चे घर के अंदर ज्यादा समय बिता रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से हाजमोला उन्हें खेल-कूद की ओर वापस लौटने के लिए प्रेरित कर रहा है, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य और बेहतर पाचन दोनों के लिए बेहद जरूरी है। हम छात्रों तक पहुँचकर एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं, जो अपने दैनिक जीवन में मस्ती और शारीरिक मेहनत के महत्व को समझती हो।इस मौके पर डा. राजन वर्मा ने बताया कि शारीरिक गतिविधियाँ केवल शरीर को फिट रखने के लिए ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए भी एक जरूरी माध्यम हैं। नियमित रूप से खेलने और हिलने-डुलने से मस्तिष्क में ऐसे तत्व सक्रिय होते हैं जो दिमाग को तेज बनाते हैं। इससे बच्चों में एकाग्रता (फोकस) बढ़ती है, याददाश्त बेहतर होती है और वे पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं। आज के दौर में, जहाँ बच्चे स्क्रीन और गैजेट्स में खोए रहते हैं, खेल-कूद उनके तनाव को कम करने और मन को शांत रखने के लिए बहुत आवश्यक है। यह बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है, जिससे वे अपने जीवन और पढ़ाई की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।प्रबल वालिया, कैटेगरी हेड – हेल्थकेयर ओटीसी, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा कि हाजमोला का मस्ती की पाठशाला अभियान केवल ब्रांड का प्रचार मात्र नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास (होलिस्टिक वेलनेस) की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस अभियान में खेल-कूद को शामिल करना एक वैज्ञानिक सोच पर आधारित है, क्योंकि शारीरिक गतिविधि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती हैकृ डाबर का लक्ष्य एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाना है। हम एक ऐसी संस्कृति बनाना चाहते हैं जहाँ खेल और फिटनेस को रोजाना की शिक्षा का जरूरी हिस्सा माना जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारी युवा पीढ़ी खेल-कूद को पसंद करते हुए बड़ी हो और अपने शरीर को स्वस्थ रखने के तरीकों को बेहतर ढंग से समझे।

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