Monday, May 25, 2026
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दोस्तों के साथ मिलकर करता है आवारा पशुओं का इलाज, सड़क पर घूम रही गाय को खिलाता है चारा, जानें कौन है आगरा का यह युवक

दोस्तों के साथ मिलकर करता है आवारा पशुओं का इलाज, सड़क पर घूम रही गाय को खिलाता है चारा, जानें कौन है आगरा का यह युव

 

• आगरा के शुभम बंसल ने गौ सेवा को अपने जीवन का प्रण मानकर शहर की गायों और अन्य पशुओं की सेवा शुरू की है. वे दोस्तों के साथ मिलकर घायल जानवरों का इलाज कराते हैं और उन्हें खाना खिलाते हैं.

 

• भोर होते ही निकलते हैं सेवा को, जगह-जगह रखवाई हौदियां दीन-दुखी और असहाय व्यक्ति की सेवा से भगवान की भक्ति करने के बराबर फल मिलता है, लेकिन इससे भी बढक़र भीषण गर्मी के मौसम में यदि गौवंश की रक्षा के लिए पानी और चारे की व्यवस्था की जा रही है तो यह सबसे बड़ी सेवा है।

 

आगरा: गौ सेवा केवल मात्र एक परंपरा ही नहीं बल्कि हमारे संस्कारों की पहचान को बताता है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गौ सेवा करने से समस्त देवी देवताओं की सेवा करने का पुण्य मिलता है. यदि हम देखें तो आज के समय में लोग दोस्तों के साथ पार्टी, घूमने फिरने में तो हजारों रुपए वेस्ट कर देते हैं. लेकिन कोई भी उन बेजुबान जानवरों के बारे में नहीं सोचता है. और उन्हें ऐसे ही रोड पर खुला घूमने में रहने देते हैं. लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं मथुरा में जन्मे और आगरा में रहने वाले एक ऐसे ही बेटे के बारे में इसने गौ सेवा को अपने जीवन का प्रण मानकर शहर की गायों की सेवा करने का प्रण लिया है. वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर शहर की गायों की सेवा कर रहा है. जी हम बात कर रहे हैं ताज नगरी आगरा के रहने वाले शुभम की जो की गायों के साथ-ही-साथ शहर में घूमने वाले सभी पशुओं की सेवा कर रहा है.

 

आखिर कैसे करते हैं जानवरों की सेवा

शुभम ने मीडिया से खास बातचीत के दौरान बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर शहर के सभी गाय या कोई अन्य आवारा पशु उनकी सेवा करते हैं. उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर शहर के अलग-अलग जगह पर घूम कर जो भी कोई उन्हें आवारा जानवर या पशु मिलता है जिसे किसी प्रकार की कोई चोट लगी हो या शरीर में या कोई अन्य परेशानी है, तो वह लोग मिलकर उसे डॉक्टर के यहां लेकर जाते हैं और उसका इलाज कराते हैं. या फिर कोई छोटी-मोटे चोट हो तो उसे तुरंत दवा उपचार करते हैं साथ ही इन जानवरों को वह लोग मिलकर खाना भी खिलते हैं .

 

कैसे शुरू की बेजुबान जानवरों की सेवा:

 

शुभम बताते हैं कि वह अपने दोस्तों के साथ बैठे थे तभी उन्होंने देखा कि आसपास इतने बेजुबान जानवर घूम रहे हैं. तभी उनकी नजर 60 फीट गहरे नाले में पड़ी उस नाले में अदमरी हालत में गाय कई दिनों से गिरी पड़ी थी बिना देरी करे हमने रेस्क्यू टीम की सहायता से उन्हें निकलने का हर संभव प्रयास किया पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था हम उस गाय की जान बचा ना सके, ना तो उन्हें कोई खाना देने वाला है और नहीं उनकी कोई सेवा करने वाला है. कई जानवर तो ऐसे होते हैं जिन्हें कहीं चोट लग जाए और उससे न सिर्फ उन जानवरों को दिक्कत होती है बल्कि उनके बैक्टीरियां हम लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. तभी हमने अपने दोस्तों के साथ मिलकर सोचा कि हम लोग अगर इन जानवरों के लिए कुछ कर पाए तो वह अच्छा होगा. इसलिए हम लोगों ने मिलकर इन जानवरों की सेवा करना शुरू कर दी और हमारी टीम से जितना हो पाता है हम लोग मिलकर इन जानवरों की सेवा करते हैं. हम लोग पिछले 2 वर्षो से जानवरों की सेवा कर रहे हैं और हमारे टीम का विचार है कि हम आजीवन इन बेजुबान जानवरों की सेवा करते रहे. ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि मूक पशु-पक्षियों को दाने-पानी की व्यवस्था के लिए अपना पूर्ण सहयोग करें, ताकि इन बेजुबानों को गर्मी में राहत मिल सके।

 

सेवा से मिलती है आत्मिक संतुष्टि

 

शुभम बंसल का कहना है कि इस सेवा से उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है। वे इस कार्यक्रम को भविष्य में भी जारी रखेंगे। इस पहल से प्रेरित होकर और लोग भी जुड़ रहे हैं। इससे नगर में गौ सेवा की सकारात्मक परंपरा विकसित हो रही है।

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