लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित ऐतिहासिक सूफी दरगाहों को लेकर उठे कथित विवाद पर शहर में आक्रोश देखने को मिला। विभिन्न सूफी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को ज्ञापन देकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि परिसर की कुछ दरगाहों और मजारों को कथित रूप से “लावारिस” बताने तथा उन्हें हटाने जैसी बातों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने इसे लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सूफी परंपरा के खिलाफ बताया।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि केजीएमयू परिसर में स्थित ये स्थल दशकों पुरानी आस्था से जुड़े हुए हैं और इनका ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्व है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इन स्थलों के संबंध में की गई कुछ टिप्पणियां और कार्यवाहियां असंवेदनशील हैं तथा इससे सामाजिक तनाव की स्थिति बन सकती है।
वफद में पीरज़ादा नासिर अली मीनाई, मोहम्मद इरफान कादरी, एडवोकेट शुऐब, शादाब हसन, ज़फर अहमद तथा क्वीन मेरी दरगाह के मुतवल्ली नूर आलम सहित विभिन्न सूफी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
वफद ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और किसी भी प्रकार की कार्रवाई केवल विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत ही हो। साथ ही, लखनऊ की सांप्रदायिक सद्भावना और साझा विरासत की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई।



