नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा स्थित पाकिस्तान एयर फोर्स बेस मुशफ को हुए नुकसान के करीब 16 महीने बाद भी वहां मरम्मत का काम जारी है। ताजा हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में एयरबेस के रनवे और टैक्सी-ट्रैक के एक अहम जंक्शन पर नए सिरे से निर्माण और मरम्मत के संकेत दिखाई दिए हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद पाकिस्तान के इस महत्वपूर्ण एयरबेस पर हुए नुकसान और उसके बाद चल रहे पुनर्निर्माण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर 2026 को ली गई वेंटर सैटेलाइट तस्वीर में रनवे के एक हिस्से के पास गहरे रंग का अनियमित पैच दिखाई दे रहा है। यह हिस्सा आसपास के पुराने डामर से अलग नजर आता है। रिपोर्ट में इसे ताजा खुदाई या री-सरफेसिंग के अनुरूप बताया गया है। तस्वीर में इस क्षेत्र के पास एक वाहन भी दिखाई देता है। हालांकि, केवल सैटेलाइट तस्वीर के आधार पर मरम्मत की तकनीकी प्रकृति और उसकी पूरी वजह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
सरगोधा एयरबेस क्यों महत्वपूर्ण है?
पाकिस्तान का PAF बेस मुशफ सरगोधा में स्थित है और इसे पाकिस्तान एयर फोर्स के महत्वपूर्ण एयरबेस में गिना जाता है। एनडीटीवी के अनुसार, यह बेस लाहौर से करीब 172 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति और सैन्य महत्व के कारण यह लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य घटनाक्रमों में चर्चा का केंद्र रहा है।
सरगोधा एयरबेस का इतिहास भी काफी पुराना है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान भी यह एयरबेस सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यहां के रनवे को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्या हुआ था?
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत की ओर से चलाया गया सैन्य अभियान था। इसके दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कई ठिकानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी भारत की ओर से दी गई थी। बाद में भारतीय अधिकारियों की ब्रीफिंग और सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर नुकसान दिखाई दिया था।
एनडीटीवी द्वारा मई 2025 में प्रकाशित सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण में सरगोधा के मुशफ एयरबेस के रनवे पर दो अलग-अलग स्थानों पर नुकसान की जानकारी सामने आई थी। इनमें एक रनवे के मुख्य हिस्से पर और दूसरा रनवे तथा टैक्सी-ट्रैक के जंक्शन के पास था। तस्वीरों में रनवे पर बड़े गड्ढे दिखाई दिए थे।
भारतीय अधिकारियों ने उस समय बताया था कि पाकिस्तान के कई सैन्य एयरबेस और वहां मौजूद तकनीकी ढांचे को निशाना बनाया गया था। भारतीय वायुसेना की ओर से दी गई जानकारी में रनवे, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रडार साइट और अन्य सैन्य ढांचे को निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी।
16 महीने बाद फिर उसी हिस्से में काम
अब सितंबर 2026 की नई सैटेलाइट तस्वीरों में उसी क्षेत्र के आसपास दोबारा काम होता दिखाई दे रहा है। एनडीटीवी के अनुसार, रनवे के जिस हिस्से पर पहले मिसाइल हमले के बाद मरम्मत का पैच लगाया गया था, उसे अब फिर से खोला गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुराने पैच वाले हिस्से को नीचे की सतह तक खोदा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि वहां सतही मरम्मत के बजाय गहराई तक पुनर्निर्माण की तैयारी की जा रही है।
तस्वीरों में रनवे के अलग-अलग हिस्सों की सतह में भी अंतर दिखाई देता है। एक हिस्से पर अपेक्षाकृत गहरी और चिकनी नई सतह दिखाई देती है, जबकि दूसरे हिस्से में काम अभी पूरा नहीं हुआ लगता। रिपोर्ट के मुताबिक, रनवे के उत्तरी हिस्से में भी ताजा मरम्मत का काम चल रहा है।
हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से यह जरूर पता चलता है कि संबंधित हिस्से में निर्माण या मरम्मत गतिविधि हो रही है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जरूरी नहीं है कि पूरा रनवे लंबे समय से अनुपयोगी रहा हो। एयरबेस के किसी हिस्से पर मरम्मत चलना और पूरे एयरबेस के संचालन की स्थिति अलग-अलग विषय हैं।
पहले भी सामने आई थीं नुकसान की तस्वीरें
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सरगोधा के रनवे पर बड़े क्रेटर दिखाई दिए थे। एनडीटीवी के विश्लेषण में इन क्रेटरों की चौड़ाई करीब आठ मीटर या उससे अधिक आंकी गई थी। तस्वीरों में रनवे के दो हिस्सों को प्रभावित बताया गया था।
उस समय भारत की ओर से पाकिस्तान के कई एयरबेस पर किए गए हमलों के बाद सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए नुकसान का आकलन किया गया था। मुशफ के अलावा नूर खान, भोलारी, जैकबाबाद, सुक्कुर और रहीम यार खान जैसे एयरबेस पर भी नुकसान की तस्वीरें सामने आई थीं।
इन तस्वीरों ने आधुनिक सैन्य अभियानों में सैटेलाइट इमेजरी की भूमिका को भी सामने रखा। किसी सैन्य ठिकाने पर हमला होने के बाद उसके नुकसान, मरम्मत और पुनर्निर्माण की गतिविधियों को सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए समय-समय पर देखा जा सकता है।
मरम्मत का क्या मतलब है?
रनवे किसी भी एयरबेस के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में शामिल होता है। विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए रनवे की सतह का मजबूत और सुरक्षित होना जरूरी है। ऐसे में किसी बड़े गड्ढे या क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए केवल ऊपर से डामर डालना पर्याप्त नहीं हो सकता। जरूरत के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की खुदाई कर नीचे की परतों को दोबारा तैयार किया जाता है और उसके बाद नई सतह बिछाई जाती है।
सरगोधा की नई तस्वीरों में जिस हिस्से पर काम दिखाई दे रहा है, वहां पुराने मरम्मत पैच को हटाकर नीचे तक काम किए जाने का संकेत रिपोर्ट में दिया गया है। इससे यह संभावना जताई गई है कि पाकिस्तान वहां अधिक स्थायी तरीके से पुनर्निर्माण कर रहा है। हालांकि, निर्माण की तकनीकी वजह और काम की समयसीमा की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पाकिस्तान के लिए रणनीतिक महत्व
सरगोधा का मुशफ एयरबेस पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में शामिल है। इसलिए वहां रनवे और टैक्सी-ट्रैक की मरम्मत केवल सामान्य निर्माण गतिविधि नहीं, बल्कि एयरबेस के बुनियादी ढांचे के रखरखाव से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई तस्वीरों और अब 16 महीने बाद की नई इमेजरी को साथ रखकर देखने पर यह पता चलता है कि प्रभावित हिस्सों में समय-समय पर मरम्मत का काम जारी रहा। मई 2025 की तस्वीरों में जहां नुकसान दिखाई दिया था, वहीं सितंबर 2026 की तस्वीरों में उसी क्षेत्र में दोबारा निर्माण गतिविधि नजर आ रही है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में सरगोधा एयरबेस के रनवे और टैक्सी-ट्रैक जंक्शन पर ताजा मरम्मत के संकेत मिले हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि एयरबेस के इस हिस्से पर बुनियादी ढांचे का काम अभी भी चल रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद 16 महीने के अंतराल में सामने आई यह नई तस्वीरें भारत-पाकिस्तान के सैन्य घटनाक्रम में सैटेलाइट निगरानी की अहम भूमिका को भी रेखांकित करती हैं। अब इस बात पर नजर रहेगी कि सरगोधा एयरबेस पर चल रहा पुनर्निर्माण कब तक पूरा होता है और आने वाले समय में इस क्षेत्र की नई सैटेलाइट तस्वीरों में क्या बदलाव दिखाई देते हैं।



