बिहार : भारत के लिए हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL इस परियोजना से जुड़ी तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है। खास बात यह है कि प्रस्तावित कॉरिडोर में पटना को भी शामिल किया गया है, जिससे बिहार की राजधानी को भविष्य में हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 1,557 किलोमीटर हो सकती है।
इस परियोजना को दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य देश की राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख क्षेत्रों से हाई स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ना है। परियोजना के आगे बढ़ने से इन राज्यों के बीच यात्रा का समय कम करने और तेज रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
NHSRCL ने तेज की प्रक्रिया
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड देश में हाई स्पीड रेल परियोजनाओं को विकसित करने वाली प्रमुख सरकारी कंपनी है। दिल्ली-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर अब परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक NHSRCL ने परियोजना के लिए ग्लोबल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी RFP जारी किया है। इसका मकसद परियोजना से जुड़े जरूरी कामों के लिए योग्य कंपनियों और संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित करना है।
ग्लोबल आरएफपी जारी होना किसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना में महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इसके जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्षम कंपनियों को परियोजना से जुड़े कार्यों के लिए प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलता है। इसके बाद तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का मूल्यांकन कर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाती है।
NHSRCL की मौजूदा गतिविधियों से भी यह स्पष्ट है कि देश में हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए अलग-अलग स्तरों पर डिजाइन, तकनीकी अध्ययन और परियोजना संबंधी तैयारियां चल रही हैं। सरकारी ई-टेंडर पोर्टल पर NHSRCL की ओर से हाई स्पीड रेल कार्यक्रम के लिए 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड से संबंधित सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन कंसल्टेंसी का टेंडर भी दर्ज है।
पटना के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में पटना को शामिल किए जाने से बिहार को हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। अभी देश में हाई स्पीड रेल का निर्माणाधीन प्रमुख प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर है, जबकि पूर्वी भारत के लिए प्रस्तावित परियोजनाएं भविष्य के हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का हिस्सा हैं।
पटना बिहार का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक और परिवहन केंद्र है। राजधानी को दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों से तेज रेल कनेक्टिविटी मिलने से यात्रियों के लिए आवागमन का नया विकल्प तैयार हो सकता है।
प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण हिस्सों से गुजरते हुए बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने की योजना का हिस्सा है। रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली-वाराणसी खंड की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR रेल मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है। इसके आगे पटना और सिलीगुड़ी तक कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना बताई गई है।
1,557 किलोमीटर के कॉरिडोर की योजना
रिपोर्टों में प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 1,557 किलोमीटर बताई गई है। इस लंबे कॉरिडोर का उद्देश्य देश के उत्तर और पूर्वी हिस्से के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी विकसित करना है। इसमें कई बड़े शहरों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है।
इतनी लंबी दूरी के हाई स्पीड रेल नेटवर्क को विकसित करना तकनीकी और निर्माण के लिहाज से बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए जमीन, पुल, सुरंग, स्टेशन, ट्रैक, सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्था समेत कई स्तरों पर विस्तृत योजना तैयार करनी होगी।
हाई स्पीड रेल परियोजनाओं में सामान्य रेलवे ट्रैक की तुलना में अलग तकनीकी मानकों का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रैक की डिजाइन, सुरक्षा प्रणाली और ट्रेन संचालन को अधिक गति के अनुरूप तैयार किया जाता है। इसलिए परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत होगी।
यात्रा के समय में आएगी कमी
हाई स्पीड रेल परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा को कम समय में पूरा करना होता है। दिल्ली और पटना के बीच वर्तमान में यात्रियों को ट्रेन के जरिए कई घंटे का सफर करना पड़ता है। प्रस्तावित हाई स्पीड रेल सेवा शुरू होने के बाद इस दूरी को काफी कम समय में तय करने की संभावना है।
हालिया रिपोर्टों में दिल्ली से पटना के बीच हाई स्पीड ट्रेन से यात्रा का समय लगभग चार से पांच घंटे के आसपास रहने का अनुमान बताया गया है। हालांकि अंतिम यात्रा समय स्टेशन, रूट, स्टॉपेज और परियोजना के संचालन संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
इसी तरह दिल्ली से लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों तक भी हाई स्पीड कनेक्टिविटी विकसित होने से उत्तर भारत के कई हिस्सों के बीच यात्रा का स्वरूप बदल सकता है।
बिहार और पूर्वी भारत को मिलेगा फायदा
पटना के अलावा इस परियोजना का व्यापक असर बिहार और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल का महत्वपूर्ण परिवहन और व्यापारिक केंद्र है। इसे हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना से दिल्ली और पूर्वोत्तर भारत के बीच संपर्क को मजबूत करने का आधार तैयार हो सकता है।
हाई स्पीड रेल नेटवर्क के आसपास आर्थिक गतिविधियों में भी बदलाव की संभावना रहती है। नए स्टेशन बनने से उनके आसपास परिवहन, होटल, व्यापार और अन्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि इन प्रभावों का वास्तविक आकार परियोजना के निर्माण, स्टेशन स्थानों और संचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अभी किन चरणों से गुजरना होगा प्रोजेक्ट?
ग्लोबल RFP जारी होना परियोजना के अंतिम निर्माण चरण की शुरुआत नहीं है। इसके बाद तकनीकी प्रस्ताव, वित्तीय प्रस्ताव, चयन प्रक्रिया, विस्तृत डिजाइन, भूमि और अन्य आवश्यक मंजूरियों जैसे कई चरण पूरे करने होंगे।
परियोजना के अलग-अलग हिस्सों के लिए DPR, सर्वे और तकनीकी अध्ययन भी महत्वपूर्ण होंगे। इसके बाद निर्माण से जुड़े पैकेज तैयार कर टेंडर और ठेके की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
NHSRCL पहले से देश की मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर काम कर रहा है। संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर हाई स्पीड रेल परियोजना से संबंधित निर्माण गतिविधियों और स्टेशनों की प्रगति की जानकारी उपलब्ध है।
हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में कदम
दिल्ली-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को देश में हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की बड़ी योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर तैयार होने पर उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच तेज रेल संपर्क का नया विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
फिलहाल परियोजना निर्माण से पहले की प्रक्रियाओं से गुजर रही है और अलग-अलग स्तरों पर तैयारियां जारी हैं। RFP जारी होने के बाद अब संबंधित संस्थाओं और संभावित कंपनियों की भागीदारी के जरिए परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होगी।
पटना के लिए इस परियोजना की खास अहमियत इसलिए है क्योंकि इससे बिहार की राजधानी को देश के प्रस्तावित हाई स्पीड रेल नेटवर्क में जगह मिल सकती है। आने वाले समय में DPR, रूट, स्टेशन, निर्माण पैकेज और समयसीमा से जुड़े फैसलों के बाद परियोजना की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर गतिविधियां बढ़ने से बिहार समेत उत्तर भारत और पूर्वी भारत के यात्रियों की नजर अब इस परियोजना पर है। यदि योजना प्रस्तावित स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो पटना को दिल्ली और सिलीगुड़ी के बीच हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।



