Saturday, September 19, 2026
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35 साल बाद CBFC की नई गाइडलाइंस जारी, ड्रग्स वाले सीन पर लगेगी खास चेतावनी

नई दिल्ली। फिल्मों के प्रमाणन यानी सर्टिफिकेशन को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। करीब 35 साल बाद फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी गाइडलाइंस को अपडेट किया गया है। इससे पहले CBFC के लिए विस्तृत गाइडलाइंस दिसंबर 1991 में जारी की गई थीं। नई व्यवस्था में पुराने कई नियमों को बरकरार रखा गया है, जबकि बदलते समय और फिल्मी कंटेंट को ध्यान में रखते हुए कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं।

नई गाइडलाइंस में सबसे ज्यादा चर्चा नार्कोटिक्स ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों से जुड़े दृश्यों को लेकर है। अब फिल्मों में अगर ड्रग्स के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी से संबंधित दृश्य दिखाए जाते हैं, तो उनके साथ दर्शकों के लिए एंटी-ड्रग चेतावनी देना जरूरी होगा। नई व्यवस्था में चेतावनी का उद्देश्य ऐसे दृश्यों को ड्रग्स के सेवन को बढ़ावा देने या उसका महिमामंडन करने से अलग करना है।

1991 के बाद पहली बार बड़ा अपडेट

CBFC के लिए पिछली विस्तृत गाइडलाइंस 6 दिसंबर 1991 को जारी की गई थीं। इसके बाद समय-समय पर नियमों में बदलाव और संशोधन जरूर किए गए, लेकिन अब सरकार ने फिल्म प्रमाणन से जुड़े दिशा-निर्देशों को एक नए रूप में जारी किया है। CBFC की आधिकारिक वेबसाइट भी 1991 की गाइडलाइंस का उल्लेख करती है।

नई गाइडलाइंस में पुराने प्रावधानों का बड़ा हिस्सा बरकरार रखा गया है। इनमें हिंसा, अश्लीलता, यौन हिंसा, सांप्रदायिक तनाव, सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की संप्रभुता जैसे विषय शामिल हैं। यानी नई गाइडलाइंस का मतलब यह नहीं है कि पुराने सभी नियम हटा दिए गए हैं। बल्कि मौजूदा व्यवस्था में कुछ नए बिंदु जोड़कर उसे अपडेट किया गया है।

ड्रग्स वाले दृश्यों पर विशेष चेतावनी

नई गाइडलाइंस में नार्कोटिक्स ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों से जुड़े कंटेंट को लेकर खास प्रावधान जोड़ा गया है। अगर किसी फिल्म में ड्रग्स के सेवन या तस्करी से जुड़े दृश्य हैं, तो उनके साथ एंटी-ड्रग चेतावनी प्रदर्शित करनी होगी।

नई चेतावनी में ड्रग्स के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नुकसान और इसके कानूनी परिणामों को लेकर संदेश दिया गया है। इसका उद्देश्य दर्शकों को यह बताना है कि स्क्रीन पर दिखाई जा रही गतिविधियां किसी तरह से ड्रग्स के सेवन को प्रोत्साहित करने वाली नहीं हैं।

यह बदलाव खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में फिल्मों और वेब कंटेंट में नशे से जुड़े विषयों को लेकर काफी चर्चा होती रही है। नई व्यवस्था में ऐसे दृश्यों के साथ चेतावनी को प्रमाणन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।

ड्रग्स का महिमामंडन नहीं किया जा सकेगा

नई गाइडलाइंस में यह भी दोहराया गया है कि फिल्मों में अपराध, हिंसा और नशे जैसी गतिविधियों का महिमामंडन या औचित्य साबित करने वाली प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए। CBFC की मौजूदा आधिकारिक गाइडलाइंस में भी ऐसी गतिविधियों को ग्लोरिफाई या जस्टिफाई नहीं करने की बात कही गई है।

इसके अलावा अपराध करने के तरीके यानी अपराधियों के modus operandi को इस तरह दिखाने से भी बचने का प्रावधान है, जिससे किसी अपराध को करने के लिए प्रेरणा या व्यावहारिक जानकारी मिल सके। हिंसा के ऐसे दृश्यों को भी सीमित करने की बात है, जिनका फिल्म की कहानी से सीधा संबंध न हो या जो केवल मनोरंजन के लिए हिंसा को बढ़ावा देते हों।

हिंसा और यौन हिंसा को लेकर पुराने नियम जारी

नई गाइडलाइंस में हिंसा से जुड़े पुराने प्रावधानों को बरकरार रखा गया है। बच्चों को हिंसा में शामिल करने, उनके साथ दुर्व्यवहार दिखाने और अनावश्यक क्रूरता जैसे दृश्यों को लेकर CBFC को सावधानी बरतने का निर्देश है।

महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के दृश्यों को लेकर भी नियम पहले की तरह सख्त हैं। अगर किसी कहानी के लिए ऐसे दृश्य जरूरी हों, तो उन्हें न्यूनतम स्तर पर रखने और घटना का अनावश्यक विवरण नहीं दिखाने की बात गाइडलाइंस में कही गई है।

सांप्रदायिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियम

नई गाइडलाइंस में ऐसे कंटेंट पर भी जोर दिया गया है, जिससे किसी धार्मिक, नस्लीय या सामाजिक समूह के खिलाफ नफरत पैदा हो सकती है। सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले दृश्यों को लेकर CBFC को सावधानी बरतनी होगी।

इसके अलावा देश की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और भारत के दूसरे देशों के साथ संबंधों से जुड़े पहलुओं को भी प्रमाणन प्रक्रिया में ध्यान में रखा जाएगा। राष्ट्रीय प्रतीकों और चिह्नों के इस्तेमाल को लेकर भी मौजूदा कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।

UA कैटेगरी में उम्र के हिसाब से वर्गीकरण

फिल्म प्रमाणन व्यवस्था में उम्र के आधार पर दर्शकों को ध्यान में रखने वाले वर्गीकरण को भी जारी रखा गया है। नई व्यवस्था में UA 7+, UA 13+ और UA 16+ जैसे आयु-आधारित संकेतकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य माता-पिता और अभिभावकों को यह समझने में मदद करना है कि किसी खास उम्र के बच्चे के लिए फिल्म की सामग्री उपयुक्त है या नहीं।

इससे फिल्मों को सिर्फ ‘UA’ की एक व्यापक श्रेणी में रखने के बजाय अलग-अलग आयु समूहों के लिए ज्यादा स्पष्ट मार्गदर्शन देने की कोशिश की गई है।

फिल्म के नाम और कंटेंट की भी होगी जांच

CBFC की गाइडलाइंस में फिल्मों के शीर्षकों को लेकर भी नियम मौजूद हैं। बोर्ड को यह देखना होता है कि फिल्म का नाम आपत्तिजनक, भड़काऊ, अश्लील या अन्य निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाला न हो। इसके साथ ही पूरी फिल्म का मूल्यांकन उसके समग्र प्रभाव के आधार पर किए जाने की बात भी गाइडलाइंस में कही गई है।

यानी किसी एक दृश्य या संवाद के बजाय फिल्म की पूरी कहानी, उसका विषय और दर्शकों पर उसके संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए प्रमाणन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

CBFC में हाल में हुए बदलाव के बाद नई गाइडलाइंस

नई गाइडलाइंस ऐसे समय में आई हैं, जब CBFC के बोर्ड में भी बदलाव किए गए हैं। CBFC की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूदा बोर्ड में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े सदस्यों के नाम दर्ज हैं। इनमें फिल्म, कला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हैं।

सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइंस का मकसद फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया को बदलते सामाजिक और तकनीकी माहौल के अनुरूप अपडेट करना बताया गया है। हालांकि अधिकांश पुराने सिद्धांतों को बरकरार रखा गया है।

फिल्म इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?

नई गाइडलाइंस के बाद फिल्म निर्माताओं को खास तौर पर ड्रग्स से जुड़े दृश्यों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। ऐसे दृश्यों में अब एंटी-ड्रग चेतावनी की जरूरत होगी। साथ ही हिंसा, अपराध, नशे, सांप्रदायिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर पहले से मौजूद नियम भी लागू रहेंगे।

CBFC के लिए यह बदलाव करीब तीन दशक से ज्यादा समय बाद विस्तृत गाइडलाइंस के अपडेट के रूप में सामने आया है। सरकार ने जहां नए प्रावधान जोड़े हैं, वहीं पुराने नियमों की बड़ी संख्या को भी जारी रखा है।

कुल मिलाकर 1991 के बाद जारी नई CBFC गाइडलाइंस में सबसे प्रमुख नया पहलू ड्रग्स से जुड़े दृश्यों पर चेतावनी है। इसके साथ ही उम्र आधारित UA वर्गीकरण, हिंसा और अपराध के महिमामंडन पर रोक, सांप्रदायिक और आपत्तिजनक कंटेंट से जुड़े नियम तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों को भी जारी रखा गया है। नई व्यवस्था अब फिल्म निर्माताओं और प्रमाणन बोर्ड दोनों के लिए आने वाले समय में अहम संदर्भ बनेगी।

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