नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया। केरल के वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि मतदाता सूची में छेड़छाड़ या मतदाताओं के नाम हटाने जैसे गैरकानूनी काम किए गए हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई गैरकानूनी काम साबित होता है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रियंका गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। पिछले दिनों चुनाव आयोग के भीतर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कई मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर अपनी टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं।
कांग्रेस ने इन रिपोर्टों को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ का आरोप बेहद गंभीर है क्योंकि मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी व्यवस्था का हिस्सा होती है। उनके मुताबिक यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाता है या मतदाता सूची में जानबूझकर बदलाव किया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का भी दावा किया। उन्होंने करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का उल्लेख किया और इसे लोकतंत्र तथा संविधान के खिलाफ गंभीर आपराधिक कृत्य बताया। हालांकि यह आंकड़ा कांग्रेस नेता के आरोप/दावे के रूप में सामने आया है और इसे चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है तो संबंधित लोगों पर सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि यदि किसी गैरकानूनी गतिविधि की पुष्टि होती है तो क्या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को उसके लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और SIR से जुड़े निर्णयों की जांच की मांग उठाई जा रही है।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों और आयोग के भीतर कथित मतभेद को लेकर अलग रुख रखा है। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक सभी महत्वपूर्ण फैसले, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। आयोग ने कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी आपत्तियां और मसौदा स्तर पर विचार-विमर्श सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश कानून और आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए हैं। आयोग के अनुसार आंतरिक स्तर पर उठाए गए सवालों या सुझावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। आयोग ने कथित मतभेदों को अंतिम निर्णयों में विभाजन के तौर पर देखने से इनकार किया है।
इस पूरे विवाद में मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। SIR के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने, अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करने और पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को सत्यापित करने की प्रक्रिया की जाती है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की ओर से यह मांग की जा रही है कि मतदाता सूची में हुए कथित बदलावों की स्वतंत्र जांच हो और जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी की ओर से कहा गया है कि आयोग के तीनों सदस्यों के बीच विचार-विमर्श होना लोकतांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि यदि चुनाव आयुक्त आपस में चर्चा और विचार-विमर्श करते हैं तो इसे संस्था में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग के इस रुख का भी समर्थन किया कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
इस तरह एक ही घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग तथा सत्तारूढ़ दल की व्याख्या अलग-अलग है। विपक्षी दल जहां कथित आंतरिक आपत्तियों को गंभीर चिंता के तौर पर देख रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक टिप्पणियां संस्थागत जांच और विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने वाला कोई गैरकानूनी काम हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके अनुसार किसी भी पद की संवैधानिक स्थिति कानून से ऊपर नहीं हो सकती। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए आरोपों की स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया में तथ्यों की पुष्टि जरूरी होगी।
SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची के प्रशासनिक पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह चुनावी पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और मतदाता अधिकारों को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव से जोड़ रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बता रहा है।
इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी नेताओं के बयान लगातार सामने आ रहे हैं। प्रियंका गांधी से पहले भी विपक्ष के कई नेताओं ने उनके इस्तीफे, जांच और कार्रवाई की मांग की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
अब इस पूरे विवाद में आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कोई औपचारिक जांच या कानूनी कार्रवाई होती है तो उसमें दस्तावेजों, अधिकारियों की भूमिका और संबंधित प्रक्रियाओं की जांच की जाएगी। वहीं चुनाव आयोग की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि उसके फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत और तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
फिलहाल प्रियंका गांधी के बयान ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित बदलावों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपनी प्रक्रिया को कानून के अनुरूप तथा अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बताता है। ऐसे में आगे होने वाली जांच, आधिकारिक स्पष्टीकरण और कानूनी प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में तथ्यात्मक आधार कितना है।



