मुंबई। आईआईटी के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की आत्महत्या के मामले में उनके पिता रविंद्र वाकोड़े ने मुंबई के आजाद मैदान में भूख-हड़ताल शुरू कर दी है। साहिल के परिवार की ओर से मामले की जांच और कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। रविंद्र वाकोड़े का कहना है कि जब तक आईआईटी के डायरेक्टर डॉ. शीरीष केदारे और प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वह अपनी भूख-हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे।
साहिल वाकोड़े की मौत के बाद से ही उनका परिवार मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहा है। परिवार का आरोप है कि साहिल की आत्महत्या के पीछे जिन लोगों की भूमिका होने की बात सामने आ रही है, उनके खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर साहिल के पिता ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाया है। उन्होंने मुंबई के आजाद मैदान में भूख-हड़ताल शुरू करके अपनी मांग को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है।
परिवार की ओर से उठाई गई इस मांग के बाद मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पिता का कहना है कि वह अपने बेटे के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं और जब तक उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि केवल जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन अधिकारियों और प्रोफेसरों के खिलाफ परिवार सवाल उठा रहा है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
आईआईटी गेट पर प्रदर्शन को लेकर हुआ विवाद
गुरुवार को पवई स्थित आईआईटी परिसर के मुख्य द्वार के बाहर उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब साहिल के माता-पिता वहां धरना देने पहुंचे। परिवार की ओर से संस्थान के मुख्य द्वार पर ही प्रदर्शन करने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस ने उन्हें मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी। पुलिस की ओर से उन्हें आजाद मैदान में धरना देने का विकल्प दिया गया।
पुलिस और परिवार के बीच प्रदर्शन की जगह को लेकर स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रही। साहिल के माता-पिता आईआईटी परिसर के बाहर ही आंदोलन करने पर अड़े रहे। परिवार का कहना था कि उनका विरोध उसी संस्थान के सामने होना चाहिए, जहां साहिल पढ़ता था और जहां से जुड़ा यह मामला है। दूसरी ओर पुलिस ने कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए मुख्य द्वार पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी।
इसके बाद परिवार को आजाद मैदान में आंदोलन करने का विकल्प दिया गया। अब साहिल के पिता ने आजाद मैदान में भूख-हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी ओर से उठाई गई गिरफ्तारी की मांग पर कार्रवाई नहीं होती।
परिवार ने दो अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई
रविंद्र वाकोड़े ने आईआईटी के डायरेक्टर डॉ. शीरीष केदारे और प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला की गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों की गिरफ्तारी होने के बाद ही वह भूख-हड़ताल समाप्त करेंगे। हालांकि इस मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका और कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
परिवार की मांग का केंद्र साहिल की मौत के कारणों और उससे जुड़े कथित घटनाक्रम की जांच है। पिता का कहना है कि उनके बेटे की मौत को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। परिवार चाहता है कि जांच एजेंसियां सभी संबंधित पहलुओं की जांच करें और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
आत्महत्या जैसे मामलों में जांच के दौरान मृतक की परिस्थितियों, उसके संपर्क में रहे लोगों, संस्थान से जुड़े घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों को देखा जाता है। ऐसे मामलों में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष के बीच अंतर को भी समझना जरूरी होता है। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या दोष तय करने का फैसला संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है।
आजाद मैदान में आंदोलन से बढ़ा दबाव
मुंबई का आजाद मैदान लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और नागरिक मुद्दों को लेकर होने वाले प्रदर्शनों का प्रमुख स्थान रहा है। साहिल के पिता ने भी अब इसी जगह को अपने आंदोलन के लिए चुना है। भूख-हड़ताल शुरू करने के पीछे उनका उद्देश्य अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और जांच एजेंसियों पर ध्यान आकर्षित करना है।
रविंद्र वाकोड़े का कहना है कि वह अपने बेटे की मौत के मामले में न्याय चाहते हैं। उनका दावा है कि जब तक संबंधित अधिकारियों और प्रोफेसरों के खिलाफ उनकी मांग के मुताबिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। भूख-हड़ताल के जरिए परिवार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह मामले को लेकर अपनी मांगों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
वहीं, पुलिस और प्रशासन के लिए भी यह स्थिति संवेदनशील है। एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि आईआईटी परिसर के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई और आजाद मैदान में आंदोलन करने का विकल्प दिया गया।
साहिल की मौत के बाद परिवार लगातार उठा रहा सवाल
साहिल वाकोड़े की आत्महत्या के बाद उनके परिवार की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार यह जानना चाहता है कि आखिर किन परिस्थितियों में साहिल ने इतना बड़ा कदम उठाया। परिजनों की मांग है कि मामले की जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि उन सभी परिस्थितियों की पड़ताल की जाए जिनका संबंध साहिल की मौत से हो सकता है।
परिवार की ओर से जिन लोगों के नाम लिए जा रहे हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच होना जरूरी है। किसी भी आरोप को जांच पूरी होने से पहले अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच में सामने आने वाले साक्ष्य, बयान और अन्य दस्तावेज ही यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि मामले में किसकी क्या भूमिका रही।
साहिल के पिता का कहना है कि उनका आंदोलन केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह चाहते हैं कि संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि छात्रों को ऐसी परिस्थितियों से बचाने के लिए संस्थानों में शिकायतों और समस्याओं के समाधान की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर भी परिवार की नजर
मामले में परिवार की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर रखी जा रही है। गुरुवार को आईआईटी परिसर के बाहर प्रदर्शन को लेकर पुलिस और परिवार के बीच जो स्थिति बनी, उसके बाद अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। परिवार चाहता है कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई हो और जांच को जल्द आगे बढ़ाया जाए।
आजाद मैदान में शुरू हुई भूख-हड़ताल के दौरान परिवार की मांगें प्रशासन तक पहुंच रही हैं। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का स्वरूप और प्रशासन की प्रतिक्रिया मामले की दिशा को प्रभावित कर सकती है। यदि परिवार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखता है तो पुलिस और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ परिवार की शिकायतों को सुनने की चुनौती भी रहेगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे क्या कारण थे और क्या किसी अन्य व्यक्ति की कोई कानूनी भूमिका बनती है।
साहिल के पिता ने अपनी भूख-हड़ताल के जरिए साफ कर दिया है कि वह मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि डॉ. शीरीष केदारे और प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला की गिरफ्तारी के बाद ही वह अपना आंदोलन समाप्त करेंगे। अब नजर पुलिस और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर है। मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और परिवार की मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



