दिल्ली। कॉलेज परिसर के अंदर छात्राएं खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन बाहर निकलते ही उन्हें असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज के पिछले गेट और बस स्टैंड के आसपास आपराधिक प्रवृत्ति के लोग घूमते रहते हैं। ये लोग छात्राओं को देखकर घूरते हैं, सीटियां बजाते हैं, बाइक से स्टंट करते हुए उन्हें डराते हैं और कई बार अश्लील इशारे व हरकतें भी करते हैं। छात्राओं का कहना है कि कॉलेज आने-जाने के दौरान उन्हें लगातार सतर्क रहना पड़ता है और अकेले बाहर निकलने में डर महसूस होता है।
छात्राओं के मुताबिक कॉलेज के भीतर शिक्षकों, कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है। समस्या मुख्य रूप से कॉलेज परिसर से बाहर निकलने के बाद शुरू होती है। खासतौर पर पिछले गेट और उसके आसपास का इलाका छात्राओं के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। यहां से आने-जाने वाली छात्राओं का कहना है कि कुछ युवक लंबे समय तक आसपास खड़े रहते हैं और आने-जाने वाली लड़कियों पर टिप्पणी करते हैं।
छात्राओं ने बताया कि कई बार उन्हें बस स्टैंड तक पहुंचने के दौरान भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। कुछ युवक बाइक पर तेज रफ्तार से आते-जाते हैं और स्टंट करते हैं। छात्राओं का आरोप है कि कई बार जानबूझकर बाइक उनके बेहद करीब से निकाली जाती है, जिससे उन्हें डर लगता है। ऐसी स्थिति में छात्राओं को यह आशंका रहती है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए या कोई व्यक्ति उनके साथ बदसलूकी न कर दे।
छात्राओं का कहना है कि समस्या केवल घूरने या सीटियां बजाने तक सीमित नहीं है। कई बार अश्लील इशारे और आपत्तिजनक हरकतें भी की जाती हैं। इस तरह की घटनाएं छात्राओं के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती हैं। कई छात्राएं ऐसी घटनाओं की शिकायत करने से भी हिचकिचाती हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि शिकायत के बाद उन्हें ही किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए आने-जाने का रास्ता उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। सुबह कॉलेज पहुंचने और छुट्टी के बाद घर लौटने के समय बस स्टैंड और आसपास के रास्तों पर छात्राओं की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति लगातार परेशान करता है या संदिग्ध गतिविधियां करता है तो सुरक्षा का सवाल गंभीर हो जाता है।
छात्राओं के अनुसार सबसे ज्यादा चिंता उन छात्राओं को होती है जो अकेले कॉलेज आती-जाती हैं। किसी दोस्त या समूह के साथ रहने पर उन्हें अपेक्षाकृत कम डर लगता है, लेकिन अकेले बस का इंतजार करना या पिछले गेट से बाहर निकलना उनके लिए परेशानी भरा हो सकता है। कई छात्राएं इसी वजह से अपने परिवार के सदस्यों से फोन पर लगातार संपर्क में रहती हैं।
छात्राओं का कहना है कि कॉलेज के आसपास नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि पिछले गेट और बस स्टैंड के आसपास पुलिस या सुरक्षा कर्मियों की नियमित मौजूदगी रहे तो असामाजिक तत्वों पर रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और पहले से लगे कैमरों की नियमित निगरानी की मांग भी उठाई जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर छात्राओं का कहना है कि केवल कॉलेज परिसर की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। कॉलेज के मुख्य गेट के साथ-साथ पिछले गेट, पार्किंग क्षेत्र, बस स्टैंड और कॉलेज से मुख्य सड़क तक जाने वाले रास्तों को भी सुरक्षित बनाना जरूरी है। उनका कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा कॉलेज की चारदीवारी से बाहर निकलने के बाद भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
छात्राओं के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल भी रोजमर्रा की जरूरत है। कई छात्राएं बस से कॉलेज आती-जाती हैं। ऐसे में बस स्टैंड पर असामाजिक तत्वों की मौजूदगी उनके लिए परेशानी पैदा कर सकती है। छात्राओं ने मांग की है कि बस स्टैंड के आसपास भी पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
कुछ छात्राओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा लगातार पीछा किया जाता है या अश्लील इशारे किए जाते हैं तो इसकी शिकायत करना जरूरी है। हालांकि इसके लिए उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां शिकायतकर्ता की पहचान सुरक्षित रखी जाए और शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो। छात्राओं का कहना है कि शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं और छात्राओं से जुड़े संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी, पर्याप्त रोशनी और पुलिस गश्त जैसी व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। अंधेरे या सुनसान रास्ते अक्सर लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ाते हैं। इसलिए कॉलेज के आसपास पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
छात्राओं की शिकायतों के बीच यह भी जरूरी है कि कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय हो। कॉलेज प्रशासन छात्राओं से नियमित रूप से फीडबैक लेकर उन स्थानों की पहचान कर सकता है जहां उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसके बाद पुलिस के साथ मिलकर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सकती है।
छात्राओं का कहना है कि वे कॉलेज में पढ़ाई करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए आती हैं। उन्हें रास्ते में किसी तरह के डर या असहजता के साथ कॉलेज नहीं आना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा के लिए सुरक्षित माहौल केवल कॉलेज के अंदर नहीं, बल्कि कॉलेज तक पहुंचने और वापस घर जाने के पूरे रास्ते में होना चाहिए।
पिछले गेट और बस स्टैंड के आसपास की शिकायतें सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि इन स्थानों पर नियमित गश्त, सीसीटीवी निगरानी और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाती है तो छात्राओं में सुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। साथ ही किसी भी तरह की छेड़छाड़ या अश्लील हरकत की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई भी जरूरी है।
छात्राओं ने यह भी मांग की है कि कॉलेज प्रशासन एक हेल्पलाइन या शिकायत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाए, ताकि छात्राएं बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायत के बाद उसकी स्थिति के बारे में छात्रा को जानकारी मिलना भी महत्वपूर्ण है। इससे छात्राओं का संस्थान और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो सकता है।
महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से संवेदनशील स्थानों की पहचान और निगरानी जरूरी होती है। कॉलेजों के आसपास पुलिस की मौजूदगी, सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन जैसी व्यवस्थाएं इस दिशा में मददगार हो सकती हैं।
छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों ने कॉलेज के बाहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। कॉलेज परिसर में सुरक्षा होने के बावजूद यदि छात्राओं को बाहर निकलते ही डर महसूस होता है तो सुरक्षा व्यवस्था को पूरे क्षेत्र के स्तर पर देखने की जरूरत है। खासकर पिछले गेट और बस स्टैंड जैसे स्थानों पर नियमित निगरानी की मांग को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।
फिलहाल छात्राओं की सबसे बड़ी मांग यही है कि उन्हें कॉलेज आने-जाने के दौरान सुरक्षित माहौल मिले। उनका कहना है कि घूरने, सीटियां बजाने, बाइक से डराने या अश्लील इशारे करने जैसी घटनाओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो तो बड़े अपराधों की आशंका को भी कम किया जा सकता है।
छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अब कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस से प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है। पिछले गेट, बस स्टैंड और आसपास के रास्तों पर निगरानी बढ़ाना, संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई करना और शिकायतों के लिए आसान व्यवस्था बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। छात्राओं का कहना है कि वे बिना डर के कॉलेज आएं-जाएं और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें, यही उनकी सबसे बड़ी जरूरत है।



