गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। तहसील क्षेत्र के मानक चौक गांव में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक तेंदुआ पेड़ पर चढ़ते समय 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन की चपेट में आ गया। करंट लगने से तेंदुए की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। वन्यजीव के आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने और फिर बिजली की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने की घटना से ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मानक चौक गांव के आसपास तेंदुए की मौजूदगी की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में पहले से ही लोगों के बीच चर्चा थी। शनिवार को तेंदुआ एक पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ के पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन की चपेट में आने के बाद वह बुरी तरह झुलस गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना संबंधित विभागों को दी।
तेंदुए की मौत की जानकारी फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। ग्रामीण पेड़ के आसपास जमा हो गए और घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और पुलिस को घटना की सूचना दी, जिसके बाद अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर आगे की कार्रवाई करनी है। वन विभाग की टीम तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकती है।
घटना ने एक बार फिर आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी का मुद्दा सामने ला दिया है। गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र में गांवों और आबादी का विस्तार होने के साथ आसपास मौजूद प्राकृतिक इलाकों में भी बदलाव हो रहा है। जंगल और खुले क्षेत्रों के आसपास मानवीय गतिविधियां बढ़ने से जंगली जानवर कई बार भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी की ओर चले आते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों और प्राकृतिक आवासों में बदलाव होने पर जानवरों के अपने पारंपरिक क्षेत्र से बाहर आने की संभावना बढ़ जाती है। आबादी के आसपास खेत, पेड़-पौधे, जल स्रोत और खाली जमीन होने के कारण कई जंगली जानवर वहां पहुंच जाते हैं। ऐसे में यदि लोगों को किसी वन्यजीव की मौजूदगी की जानकारी मिलती है तो उसके करीब जाने के बजाय वन विभाग को सूचना देना जरूरी होता है।
मानक चौक गांव में हुई इस घटना में तेंदुए का आबादी वाले इलाके में पहुंचना और पेड़ पर चढ़ना स्थानीय लोगों के लिए भी चिंता का विषय रहा। हालांकि, तेंदुए के गांव तक पहुंचने के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। वन विभाग की जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि वह किस दिशा से आया था और पिछले कुछ समय से आसपास के क्षेत्र में उसकी गतिविधियां थीं या नहीं।
तेंदुए की मौत का कारण बिजली का करंट बताया जा रहा है। 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन की चपेट में आने के कारण उसके शरीर पर गंभीर चोट और जलने के निशान हो सकते हैं। वन विभाग की टीम शव की जांच के बाद मौत से जुड़े आवश्यक तथ्यों को दर्ज करेगी। वन्यजीवों की मौत के मामलों में विभागीय स्तर पर पोस्टमार्टम या अन्य निर्धारित प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच बिजली की लाइनों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। गांवों और खेतों के आसपास कई जगह विद्युत लाइनें पेड़ों के करीब से गुजरती हैं। जब इन इलाकों में जंगली जानवर पहुंचते हैं तो उनके लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली लाइनों और अन्य मानव निर्मित संरचनाओं की स्थिति की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि आबादी के आसपास जंगली जानवरों की मौजूदगी अब पहले की तुलना में अधिक दिखाई देने लगी है। कई बार लोग खेतों या गांव के बाहरी हिस्सों में वन्यजीवों को देखते हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों में भय का माहौल बन जाता है। तेंदुए जैसे शिकारी जानवर की मौजूदगी की खबर सामने आने पर लोग विशेष रूप से सतर्क हो जाते हैं।
हालांकि, वन विभाग की ओर से अभी यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी कितने समय से थी और क्या आसपास के गांवों में पहले भी उसके देखे जाने की सूचना मिली थी। विभाग स्थानीय लोगों से जानकारी लेकर तेंदुए की गतिविधियों से जुड़े अन्य तथ्यों को भी जुटा सकता है।
वन्यजीवों और इंसानी आबादी के बीच बढ़ता संपर्क केवल तेंदुओं तक सीमित नहीं है। जंगल और प्राकृतिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले इलाकों में कई प्रकार के जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में आबादी की ओर आ सकते हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समन्वय जरूरी होता है।
तेंदुए की मौत की घटना के बाद अब वन विभाग के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि आसपास के इलाके में कोई दूसरा तेंदुआ या अन्य वन्यजीव तो मौजूद नहीं है। यदि आसपास वन्यजीव की गतिविधि के संकेत मिलते हैं तो विभाग निगरानी बढ़ा सकता है और स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा सकती है।
ग्रामीणों के लिए भी यह जरूरी है कि वे किसी वन्यजीव को देखने पर भीड़ न लगाएं और उसे पकड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में वन विभाग या पुलिस को तुरंत सूचना देना सुरक्षित तरीका है। भीड़ बढ़ने से जानवर घबरा सकता है और लोगों पर हमला करने की आशंका भी पैदा हो सकती है।
मानक चौक गांव में तेंदुए की मौत की घटना फिलहाल इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर तेंदुए की मौत से वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता सामने आई है, वहीं दूसरी ओर आबादी के विस्तार और जंगली जीवों के प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण बढ़ते मानव-वन्यजीव संपर्क पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
फिलहाल स्थानीय लोगों ने वन विभाग और पुलिस को सूचना दे दी है। विभागीय टीम के मौके पर पहुंचने और तेंदुए के शव की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही आसपास के क्षेत्र में वन्यजीव की मौजूदगी को लेकर भी जानकारी जुटाई जा सकती है। घटना ने यह जरूर दिखाया है कि प्राकृतिक क्षेत्रों के आसपास बढ़ती आबादी और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी और निगरानी की जरूरत है।



