Wednesday, October 7, 2026
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यूपी राज्यसभा चुनाव की तस्वीर साफ, भाजपा के 8 और सपा के 2 प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया की तस्वीर अब लगभग पूरी तरह साफ हो गई है। नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के सभी आठ प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से दो प्रत्याशी पहले ही मैदान में हैं और पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारा। ऐसे में अब भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद 9 अक्टूबर को की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव प्रस्तावित है। लेकिन अब भाजपा और सपा के उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण मतदान की स्थिति बनती दिखाई नहीं दे रही है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही राजनीतिक अटकलों पर भी विराम लग गया है। खासतौर पर इस बात को लेकर चर्चा थी कि समाजवादी पार्टी तीसरा प्रत्याशी उतारकर मुकाबला करा सकती है, लेकिन नामांकन की अंतिम समय सीमा तक ऐसा नहीं हुआ।

भाजपा के सभी आठ प्रत्याशियों ने दाखिल किया नामांकन

मंगलवार को भाजपा के आठों प्रत्याशी लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद सभी प्रत्याशी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में विधानसभा पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

भाजपा ने इस बार राज्यसभा के लिए कई नए चेहरों को मौका दिया है। पार्टी की ओर से धर्मपाल सिंह, विद्यासागर सोनकर, राम प्रताप सिंह चौहान, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय, श्रुति गंगवार और प्रकाश पाल को उम्मीदवार बनाया गया है। खास बात यह है कि पार्टी ने इस बार उत्तर प्रदेश से किसी मौजूदा राज्यसभा सदस्य को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है।

भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान पार्टी ने अपनी राजनीतिक एकजुटता भी प्रदर्शित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और स्वागत को भी राजनीतिक गतिविधि के तौर पर देखा गया।

सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर खत्म हुआ सस्पेंस

राज्यसभा चुनाव की शुरुआत से ही सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर थी। विधानसभा में अपने संख्याबल के आधार पर सपा के दो उम्मीदवारों का चुना जाना संभव माना जा रहा था। लेकिन तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता था।

पिछले कुछ दिनों से सपा के तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावनाओं को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही थीं। नामांकन की अंतिम तारीख तक इस पर सस्पेंस बना रहा। हालांकि मंगलवार को स्थिति स्पष्ट हो गई और सपा ने तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा। इसके साथ ही 10 सीटों पर 10 उम्मीदवारों की स्थिति बन गई।

सपा के दो उम्मीदवारों में वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी शामिल हैं। दोनों ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। तीसरे उम्मीदवार के नहीं आने से अब सपा के इन दोनों प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

10 सीटों के लिए अब मतदान की जरूरत नहीं

राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। इस तरह सीटों और उम्मीदवारों की संख्या बराबर है। ऐसे में यदि नामांकन वापस लेने की अवधि के दौरान कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है तो सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे।

हालांकि चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन अधिकारी अंतिम स्थिति घोषित करेंगे। 9 अक्टूबर को नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

इसका मतलब यह है कि 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी, यदि अंतिम प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होता। राज्यसभा चुनाव में मतदान तभी होता है जब किसी सीट के लिए उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक हो। यहां फिलहाल 10 सीटों के लिए 10 ही प्रमुख उम्मीदवार हैं।

भाजपा के उम्मीदवारों में सामाजिक समीकरण पर भी जोर

भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों की सूची में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी के आठ उम्मीदवारों में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और ठाकुर समुदायों से जुड़े चेहरे शामिल हैं। इनमें दो महिला उम्मीदवार भी हैं।

उम्मीदवारों के चयन को उत्तर प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों के चयन के पीछे पार्टी की रणनीति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन चुनावी राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।

खास बात यह भी है कि भाजपा ने कई संगठन से जुड़े नेताओं को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। इससे पार्टी संगठन में लंबे समय से काम कर रहे नेताओं को प्रतिनिधित्व मिलने का संदेश गया है। मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा टिकट न दिए जाने से भी पार्टी के भीतर इस चयन को लेकर चर्चा हुई है।

2027 से पहले राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक महत्व

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों का यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की राजनीति 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। इसलिए राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को भी राजनीतिक दलों की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

राज्यसभा चुनाव में विधायक मतदान करते हैं और किसी उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक संख्या में विधायकों का समर्थन चाहिए होता है। ऐसे में सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टियां अपने विधानसभा संख्याबल का आकलन करती हैं। इस बार भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के मैदान में रहने से मुकाबले की स्थिति ही समाप्त होती दिखाई दे रही है।

सपा के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले से भाजपा और सपा के बीच संभावित सीधी टक्कर भी टल गई है। पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि यदि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो दोनों दलों को अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अब ऐसा कोई मुकाबला फिलहाल नहीं होगा।

नाम वापसी के बाद अंतिम तस्वीर होगी साफ

फिलहाल चुनावी प्रक्रिया तकनीकी रूप से पूरी नहीं हुई है। नामांकन हो चुका है, लेकिन नाम वापसी की समय सीमा अभी बाकी है। इसलिए आधिकारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा 9 अक्टूबर को होगी। इसके बाद ही सभी 10 सीटों के लिए अंतिम परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आएगा।

राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं होने की स्थिति में उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जाएगा। इससे चुनाव की पूरी प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो जाएगी।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा राजनीतिक सस्पेंस अब लगभग खत्म हो गया है। भाजपा ने अपने सभी आठ प्रत्याशियों का नामांकन करा दिया है और सपा ने भी तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। ऐसे में भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ है। अब सबकी नजर 9 अक्टूबर पर है, जब नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी औपचारिक रूप से अंतिम स्थिति की घोषणा करेंगे।

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