बालाघाट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों का उल्लेख करते हुए कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति से पहले समाज, देश और दूसरों के जीवन की चिंता करने की भावना को महत्व दिया गया है। इसी भावना को कैप्टन स्मित मच्छर के साहस से समझा जा सकता है। भागवत ने बताया कि घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने अपने प्राणों की परवाह नहीं की और विमान में सवार यात्रियों को बचाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई।
डॉ. मोहन भागवत मंगलवार को बालाघाट में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन परंपराओं, भाषाओं, रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं से नहीं होती, बल्कि उन मूल्यों से भी होती है जो मुश्किल परिस्थितियों में व्यक्ति के आचरण में दिखाई देते हैं। उनके मुताबिक, संकट के समय दूसरों की सुरक्षा को अपने जीवन से ऊपर रखना भारतीय संस्कारों की महत्वपूर्ण पहचान है।
भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छर के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने असाधारण साहस का परिचय दिया। घायल होने के बाद भी उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्थिति को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने यात्रियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। भागवत ने इस घटना को भारतीय संस्कृति में मौजूद कर्तव्यबोध और त्याग की भावना से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश और समाज की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक या सैन्य क्षमता से तय नहीं होती। समाज के लोगों में एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और त्याग की भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। जब कोई व्यक्ति कठिन परिस्थिति में अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की रक्षा करता है तो वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।
घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ी जिम्मेदारी
कैप्टन स्मित मच्छर का उदाहरण देते हुए भागवत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि घायल होने के बाद भी उन्होंने अपने कर्तव्य से पीछे हटने का फैसला नहीं किया। सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के लिए अपनी जान बचाना स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन कैप्टन स्मित ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। यही वह भावना है जिसे भागवत भारतीय संस्कारों और संस्कृति से जोड़कर देख रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कर्तव्य को बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। व्यक्ति का जीवन केवल उसके अपने लिए नहीं माना जाता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उसकी भी जिम्मेदारियां होती हैं। संकट के समय यही भावना व्यक्ति को असाधारण निर्णय लेने की शक्ति देती है।
भागवत के मुताबिक, देश में ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, जहां लोगों ने कठिन परिस्थितियों में दूसरों की सहायता के लिए अपना जीवन तक जोखिम में डाला। सेना, पुलिस, अग्निशमन सेवा, विमानन क्षेत्र और आपदा राहत कार्यों में काम करने वाले लोगों के जीवन में ऐसी परिस्थितियां सामने आती रहती हैं। ऐसे लोगों का साहस समाज को यह संदेश देता है कि मानव जीवन की रक्षा और कर्तव्य के प्रति समर्पण सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर जोर
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति के मूल स्वरूप पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में केवल व्यक्तिगत उपलब्धि को महत्व नहीं दिया जाता, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार का समाज पर पड़ने वाला प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है। समाज के प्रति जिम्मेदारी और दूसरों के सुख-दुख को अपना समझना भारतीय जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘मैं’ से अधिक ‘हम’ की भावना को महत्व दिया गया है। व्यक्ति अपनी प्रगति के साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति के बारे में भी सोचता है। यही भावना आपसी सहयोग और सामाजिक एकता को मजबूत करती है।
भागवत ने कहा कि आधुनिक दौर में तकनीक और सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। लोगों के जीवन में कई तरह की सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन इसके साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी जरूरी है। यदि समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना कमजोर होती है तो केवल भौतिक विकास से समाज मजबूत नहीं बन सकता।
युवाओं के लिए प्रेरणा
कैप्टन स्मित मच्छर के साहस का उदाहरण देते हुए भागवत ने अप्रत्यक्ष रूप से युवाओं के सामने भी एक आदर्श रखा। उन्होंने बताया कि मुश्किल परिस्थितियों में व्यक्ति का वास्तविक चरित्र सामने आता है। ऐसे समय में व्यक्ति किस प्रकार निर्णय लेता है, यह उसके संस्कार और प्रशिक्षण को दर्शाता है।
युवाओं को केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके भीतर जिम्मेदारी और सेवा की भावना भी विकसित होनी चाहिए। देश के विकास में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि युवा अपने व्यक्तिगत हितों के साथ समाज और राष्ट्र के हितों को भी प्राथमिकता दें तो देश की सामाजिक शक्ति और मजबूत हो सकती है।
भागवत के संबोधन में यह संदेश भी प्रमुख रहा कि देश के नागरिकों में दूसरों के लिए खड़े होने की भावना विकसित होनी चाहिए। किसी दुर्घटना या संकट के समय मदद करने वाला व्यक्ति केवल एक व्यक्ति की जान नहीं बचाता, बल्कि समाज में विश्वास और मानवता की भावना को भी मजबूत करता है।
साहस केवल जोखिम उठाने का नाम नहीं
कैप्टन स्मित के प्रसंग के जरिए यह बात भी सामने आती है कि साहस का अर्थ केवल खतरे का सामना करना नहीं है। वास्तविक साहस तब दिखाई देता है जब व्यक्ति अपने सामने मौजूद संकट के बावजूद अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता। कई बार किसी व्यक्ति को कुछ ही क्षणों में ऐसा फैसला लेना पड़ता है, जिसका असर कई लोगों के जीवन पर पड़ सकता है।
ऐसे समय में धैर्य, प्रशिक्षण, जिम्मेदारी और मानसिक मजबूती की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कैप्टन स्मित मच्छर का उदाहरण इसी संदर्भ में दिया गया। भागवत ने उनके साहस को भारतीय संस्कृति में मौजूद त्याग और कर्तव्य की भावना से जोड़ते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
समाज में ऐसे उदाहरणों को सामने लाने की जरूरत
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज को ऐसे सकारात्मक उदाहरणों को सामने लाना चाहिए। अक्सर दुर्घटनाओं और संकट की घटनाओं को केवल नुकसान के आंकड़ों के रूप में देखा जाता है, लेकिन उन परिस्थितियों में लोगों द्वारा किए गए साहस और सेवा के कार्यों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
ऐसे उदाहरण बच्चों और युवाओं को प्रेरित कर सकते हैं। इससे उनमें जिम्मेदारी, अनुशासन, सेवा और देश के प्रति कर्तव्य की भावना विकसित हो सकती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए इसी प्रकार के मानवीय मूल्यों को महत्वपूर्ण बताया।
बालाघाट में दिए गए अपने संबोधन में भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी परंपराओं के साथ-साथ उसके नागरिकों के आचरण में भी दिखाई देती है। जब कोई व्यक्ति विपरीत परिस्थिति में दूसरों की सुरक्षा को अपनी व्यक्तिगत चिंता से ऊपर रखता है तो वह भारतीय जीवन मूल्यों की एक मिसाल प्रस्तुत करता है।
कैप्टन स्मित मच्छर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि घायल होने के बावजूद यात्रियों को बचाने के लिए किया गया प्रयास केवल एक व्यक्तिगत बहादुरी की घटना नहीं है, बल्कि यह कर्तव्य, त्याग और मानवता की भावना का उदाहरण है। ऐसे प्रसंग समाज को यह याद दिलाते हैं कि कठिन समय में एक व्यक्ति का साहस कई लोगों के जीवन की दिशा बदल सकता है।
भागवत के संबोधन में भारतीय संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध को केंद्र में रखा गया। कैप्टन स्मित मच्छर का प्रसंग इसी विचार को सामने लाने का माध्यम बना। उन्होंने कहा कि देश और समाज को मजबूत बनाने के लिए केवल विकास और संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के भीतर सेवा, संवेदना, अनुशासन और दूसरों के लिए त्याग की भावना भी जरूरी है। यही मूल्य आने वाली पीढ़ियों को एक जिम्मेदार और मजबूत समाज के निर्माण की दिशा में आगे ले जा सकते हैं।



