नई दिल्ली। बाजार से फल और सब्जियां खरीदते समय ज्यादातर लोग कीमत, ताजगी और आकार को देखकर खरीदारी का फैसला करते हैं। दुकानदार से कुछ रुपये कम कराने के लिए मोलभाव भी किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग यह सवाल पूछते हैं कि जो फल और सब्जियां वे अपने घर ले जा रहे हैं, वे वास्तव में कितनी सुरक्षित और शुद्ध हैं। क्या उनमें किसी तरह के हानिकारक रसायन, कीटनाशक अवशेष या अन्य दूषित तत्व मौजूद हैं, इस बारे में आम उपभोक्ता के पास अक्सर पर्याप्त जानकारी नहीं होती। एक अध्ययन के मुताबिक चार में से करीब तीन भारतीयों को इस बात की जानकारी नहीं है कि वे जिन फल-सब्जियों का सेवन कर रहे हैं, उनकी शुद्धता या सुरक्षा का स्तर क्या है।
यह स्थिति खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता की कमी की ओर इशारा करती है। रोजाना की थाली में शामिल फल और सब्जियां स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, लेकिन इनके उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसे चरण होते हैं, जहां इनके दूषित होने या उनमें रसायनों के अवशेष रहने की आशंका हो सकती है। ऐसे में केवल फल-सब्जियों को देखकर उनकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाना हमेशा संभव नहीं होता।
आम तौर पर ग्राहक बाजार में फल और सब्जियां खरीदते समय उनके रंग, आकार, चमक और ताजगी को प्राथमिकता देते हैं। कई बार चमकदार और देखने में आकर्षक फल-सब्जियां ग्राहकों को ज्यादा पसंद आती हैं। वहीं कुछ लोग कीमत कम कराने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन किसी फल या सब्जी में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से ज्यादा हैं या नहीं, इसका पता केवल देखकर लगाना संभव नहीं है।
कीमत पर मोलभाव, गुणवत्ता पर कम सवाल
भारतीय बाजारों में फल और सब्जियों की खरीदारी रोजमर्रा की गतिविधि है। घरों में भोजन की जरूरत के अनुसार लोग रोज या कुछ दिनों के अंतराल पर सब्जियां और फल खरीदते हैं। इस दौरान कीमत को लेकर दुकानदार और ग्राहक के बीच मोलभाव आम बात है। हालांकि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को लेकर उपभोक्ताओं में उतनी जागरूकता नहीं दिखाई देती।
चार में से तीन लोगों को यह जानकारी नहीं होना कि वे जो फल-सब्जियां खा रहे हैं, वे कितनी शुद्ध हैं, इस समस्या की गंभीरता को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इसका मतलब यह है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता फल-सब्जियों की बाहरी गुणवत्ता को ही उनकी सुरक्षा का पैमाना मान लेते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक किसी फल या सब्जी का साफ, ताजा और चमकदार दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह पूरी तरह रसायन-मुक्त है। खेती में कीटनाशकों और अन्य कृषि रसायनों का इस्तेमाल कई फसलों में किया जाता है। इनका इस्तेमाल निर्धारित मात्रा और नियमों के अनुसार किया जाए तो फसल की सुरक्षा और उत्पादन में मदद मिलती है, लेकिन निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं।
कीटनाशक अवशेष क्यों चिंता का विषय?
फल और सब्जियों की खेती के दौरान फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए अलग-अलग प्रकार के कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। कटाई से पहले इन रसायनों के अवशेष फसल पर रह सकते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इनकी मात्रा निर्धारित सुरक्षित सीमा के भीतर होनी चाहिए। लेकिन यदि नियमों का पालन नहीं होता या निर्धारित समय से पहले फसल बाजार में पहुंच जाती है, तो अवशेषों की मात्रा चिंता का विषय बन सकती है।
यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े संस्थान समय-समय पर अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच करते हैं। ऐसी जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ तय मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
हालांकि आम उपभोक्ता के लिए किसी फल या सब्जी को खरीदते समय यह पता लगाना मुश्किल होता है कि उसमें किसी रसायन का अवशेष मौजूद है या नहीं। इसके लिए प्रयोगशाला जांच की जरूरत होती है। यही अंतर उपभोक्ता की जागरूकता और वास्तविक खाद्य सुरक्षा के बीच एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
केवल धोना कितना कारगर?
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोना उनकी सतह पर मौजूद मिट्टी, धूल और कुछ बाहरी अवशेषों को हटाने में मदद कर सकता है। इसलिए घर लाने के बाद फल-सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी माना जाता है। पत्तेदार सब्जियों को भी साफ पानी में अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करना चाहिए।
हालांकि केवल धोने को हर तरह के रासायनिक अवशेष को पूरी तरह खत्म करने का तरीका नहीं माना जा सकता। कुछ रसायन पौधे की सतह पर हो सकते हैं, जबकि कुछ परिस्थितियों में पदार्थ पौधे के अंदर भी मौजूद हो सकते हैं। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय खेती और खाद्य आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों या किसानों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें उपभोक्ताओं की जागरूकता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि फल-सब्जियों की गुणवत्ता का मतलब केवल उनका सुंदर दिखना या सस्ता होना नहीं है।
खरीदारी करते समय उपभोक्ता फल-सब्जियों को ध्यान से देखकर खरीदें और बहुत अधिक असामान्य चमक या रंग वाले उत्पादों के प्रति सावधान रहें। हालांकि केवल देखकर किसी उत्पाद को असुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता। इसलिए उपभोक्ताओं को प्रमाणित और भरोसेमंद विक्रेताओं से खरीदारी करने तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
बाजार व्यवस्था और जांच की भूमिका
फल और सब्जियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकारी निगरानी भी अहम है। बाजारों में नियमित नमूना जांच, खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार मानकों से बाहर खाद्य पदार्थ पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों को स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई करनी चाहिए।
इसके साथ ही किसानों और व्यापारियों को भी यह जानकारी देना जरूरी है कि कीटनाशकों और अन्य कृषि रसायनों का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा और निर्धारित अंतराल के अनुसार ही किया जाए। फसल काटने और बाजार में भेजने के बीच आवश्यक समय का पालन भी खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है।
सिर्फ ग्राहक ही नहीं, पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी
फल और सब्जियों की शुद्धता का सवाल केवल उपभोक्ता की सावधानी से हल नहीं हो सकता। एक सुरक्षित खाद्य व्यवस्था के लिए खेत से लेकर बाजार और फिर उपभोक्ता की रसोई तक पूरी सप्लाई चेन की निगरानी जरूरी है। किसान स्तर पर सही कृषि पद्धतियां, बाजार में उचित भंडारण, परिवहन के दौरान स्वच्छता और सरकारी स्तर पर नियमित जांच—इन सभी का अपना महत्व है।
अगर उपभोक्ता को यह पता ही नहीं है कि उसके भोजन में इस्तेमाल होने वाली चीजें किस स्तर की हैं, तो केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। लोगों को आसान भाषा में यह जानकारी उपलब्ध करानी होगी कि फल-सब्जियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है और संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलने पर शिकायत कहां की जा सकती है।
स्वास्थ्य के लिए रोजाना की सावधानी जरूरी
फल और सब्जियां संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए रसायनों या मिलावट की चिंता के कारण इन्हें खाना बंद करना समाधान नहीं है। इसके बजाय खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन, बेहतर निगरानी और उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
चार में से तीन भारतीयों को फल-सब्जियों की शुद्धता के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना इस बात का संकेत है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। बाजार में खरीदारी करते समय कीमत के साथ गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।
आखिरकार, फल और सब्जियां हमारी रोजमर्रा की थाली का हिस्सा हैं। इसलिए इनके सुरक्षित होने की जिम्मेदारी केवल उस व्यक्ति की नहीं है जो इन्हें खरीद रहा है। किसान, व्यापारी, खाद्य सुरक्षा एजेंसियां और सरकार—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उपभोक्ता को भी अपने स्तर पर सावधानी बरतनी होगी। कीमत में कुछ रुपये की बचत से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि परिवार की थाली में पहुंचने वाला भोजन सुरक्षित और निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप हो।



