नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर INDIA गठबंधन के नेताओं और सांसदों के जंतर-मंतर की ओर मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन और सभा को लेकर नियमों को एक बार फिर स्पष्ट किया है। पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के प्रदर्शन या सभा के लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही निर्धारित नियमों के तहत प्रदर्शन में शामिल होने वाली भीड़ की संख्या भी सीमित रखी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ की अनुमति नहीं है।
बुधवार को INDIA गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं की ओर से चुनाव प्रक्रिया, SIR और कथित ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों को लेकर लगातार विरोध जताया जा रहा है। इसी क्रम में सांसदों और नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर मार्च किया। मार्च के बाद दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति और निर्धारित नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई।
जंतर-मंतर दिल्ली में राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन का प्रमुख स्थल रहा है। हालांकि यहां प्रदर्शन करने के लिए कुछ निर्धारित नियम लागू हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन के लिए पहले से अनुमति लेने की व्यवस्था है।
10 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी
दिल्ली पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने वाले आयोजकों को कम से कम 10 दिन पहले अनुमति के लिए आवेदन करना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को पहले से तैयार किया जा सके।
राजधानी दिल्ली में किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना रहती है। ऐसे में पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने के साथ-साथ आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था को भी ध्यान में रखना पड़ता है। यही वजह है कि प्रदर्शन की अनुमति पहले से लेने की व्यवस्था लागू है।
पुलिस का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से प्रशासन को कार्यक्रम की प्रकृति, संभावित भीड़ और आयोजन स्थल पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने में मदद मिलती है।
एक हजार से ज्यादा लोगों की अनुमति नहीं
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ की अनुमति नहीं है। यह सीमा भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। यदि किसी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं तो पुलिस के सामने अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने की चुनौती पैदा होती है।
जंतर-मंतर के आसपास दिल्ली के महत्वपूर्ण सरकारी और प्रशासनिक क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे में किसी बड़े प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण प्रदर्शन स्थल पर भीड़ की संख्या को नियंत्रित रखने की व्यवस्था की गई है।
विपक्ष का प्रदर्शन और राजनीतिक मुद्दे
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। INDIA गठबंधन के नेता SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बुधवार को भी विपक्षी सांसदों ने इसी मुद्दे को लेकर एकजुटता दिखाई। सांसदों ने मार्च निकालते हुए अपनी मांगों को सामने रखा। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग पहले ही मतदाता सूची और SIR से संबंधित कई आरोपों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन और सत्यापन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जाती है।
मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था
विपक्षी नेताओं और सांसदों के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई। राजधानी में जब किसी राजनीतिक दल की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का कार्यक्रम होता है तो पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग, सुरक्षा बलों की तैनाती और यातायात प्रबंधन जैसे कदम उठाए जाते हैं।
जंतर-मंतर की ओर मार्च के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस की कोशिश रही कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित मार्ग और नियमों के दायरे में रखा जाए तथा किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील भी की। पुलिस का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए प्रशासन द्वारा तय नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था
राजधानी में होने वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के सामने दोहरी जिम्मेदारी रहती है। एक तरफ प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने के लिए निर्धारित स्थान और सुरक्षा उपलब्ध करानी होती है, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों की आवाजाही और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होता है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए जाने का एक उद्देश्य यही है कि विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जा सके। लेकिन इसके लिए आयोजकों को पहले से अनुमति लेना और तय संख्या के अनुसार लोगों को जुटाना होता है।
यदि किसी प्रदर्शन में निर्धारित सीमा से अधिक लोग पहुंचते हैं तो पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में सुरक्षा और यातायात दोनों प्रभावित होने की संभावना रहती है।
विपक्ष और पुलिस के बीच नियमों का मुद्दा
बुधवार के मार्च के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आया कि राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के लिए निर्धारित अनुमति प्रक्रिया का पालन किस तरह किया जाता है। दिल्ली पुलिस ने अपनी ओर से नियम स्पष्ट करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी है।
इस मामले में राजनीतिक गतिविधि और प्रशासनिक नियम दोनों अलग-अलग पहलू हैं। विपक्ष अपने राजनीतिक मुद्दों को उठाने के लिए प्रदर्शन कर रहा है, जबकि पुलिस का काम निर्धारित कानून-व्यवस्था और सुरक्षा नियमों को लागू करना है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यदि विपक्ष की ओर से इसी मुद्दे पर और प्रदर्शन किए जाते हैं तो आयोजकों को अनुमति प्रक्रिया और भीड़ सीमा का ध्यान रखना होगा।
चुनाव आयोग को लेकर टकराव जारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव लगातार जारी है। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची और SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों के अनुरूप बता रहा है।
इस राजनीतिक विवाद का असर संसद के बाहर भी दिखाई दे रहा है। विपक्षी सांसद सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी मांगों को जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी है और एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ की अनुमति नहीं है। ऐसे में आगे होने वाले किसी भी प्रदर्शन के दौरान आयोजकों के लिए इन नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।
वहीं, विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी मांगों और SIR से जुड़े सवालों को लगातार उठाने की तैयारी में हैं। इस पूरे घटनाक्रम में अब राजनीतिक विरोध के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन किस तरह निर्धारित नियमों के तहत आयोजित किए जाते हैं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विपक्ष के सवालों पर आगे क्या जवाब सामने आता है।



