कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मानसून के शुरुआती महीनों में डेंगू के अपेक्षाकृत कम मामले सामने आने के बाद अब संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर के पहले 23 दिनों में राज्य में डेंगू के 5,500 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह से संक्रमण में तेजी देखी जा रही है। मामलों में हुई इस बढ़ोतरी ने राज्य में डेंगू की रोकथाम और मच्छरों के प्रजनन पर नियंत्रण के प्रयासों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
डेंगू का संक्रमण आमतौर पर बरसात और उसके बाद के महीनों में अधिक फैलता है। बारिश के कारण जगह-जगह जमा पानी में मच्छरों को पनपने का अवसर मिलता है। ऐसे में मानसून के बाद भी यदि जलभराव बना रहता है, तो संक्रमण का खतरा कम होने के बजाय बढ़ सकता है। पश्चिम बंगाल में अक्टूबर के दौरान सामने आए नए मामले इसी समय स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बन रहे हैं।
सितंबर के अंतिम सप्ताह से बढ़ने लगा संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, सितंबर के अंतिम सप्ताह से राज्य में डेंगू के मामलों में तेजी दर्ज की गई। इसके बाद अक्टूबर के शुरुआती 23 दिनों में 5,500 से अधिक नए मामले सामने आए। शुरुआती मानसून अवधि में संक्रमण अपेक्षाकृत कम रहने के कारण स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में दिखाई दे रही थी, लेकिन मौसम के आगे बढ़ने के साथ डेंगू के मामलों में वृद्धि होने लगी।
संक्रमण में इस तेजी को देखते हुए डेंगू की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी की आवश्यकता है। बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, जलभराव की समस्या का समाधान और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में राज्य के अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण में सबसे अधिक वृद्धि किन क्षेत्रों में हुई है और किन जिलों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है।
बारिश के बाद भी बना रहता है डेंगू का खतरा
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ पानी में पनप सकते हैं। घरों, छतों, आंगनों और आसपास रखे बर्तनों में जमा पानी इनके प्रजनन का कारण बन सकता है। इसके अलावा कूलर, गमले, पानी की टंकियों के आसपास जमा पानी और लंबे समय तक खाली पड़े कंटेनरों में भी मच्छर पनपने की आशंका रहती है।
बरसात समाप्त होने के बाद अक्सर लोग मच्छरों से बचाव को लेकर लापरवाह हो जाते हैं। लेकिन बारिश के बाद जमा पानी पूरी तरह समाप्त नहीं होने पर डेंगू फैलने का खतरा बना रह सकता है। अक्टूबर में तापमान और नमी की स्थिति भी मच्छरों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
डेंगू के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी है कि घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी जमा न होने दिया जाए। पानी रखने वाले बर्तनों को नियमित रूप से साफ किया जाए और टंकियों को ढककर रखा जाए। स्थानीय स्तर पर नालियों और खाली प्लॉटों की सफाई भी महत्वपूर्ण है, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां न मिलें।
लक्षण दिखने पर जांच कराना जरूरी
डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। बुखार होने पर केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए चिकित्सकीय सलाह और आवश्यकता के अनुसार जांच कराना जरूरी है।
डेंगू के मरीजों में कुछ मामलों में स्थिति गंभीर भी हो सकती है। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, असामान्य कमजोरी, बेचैनी अथवा सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बुखार कम होने के बाद भी कुछ मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए चिकित्सक की सलाह के अनुसार निगरानी जरूरी है।
डेंगू के इलाज में मरीज के शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। किसी भी दवा का सेवन चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से ऐसी दवाओं से बचना चाहिए, जो रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं। मरीज की उम्र, लक्षण और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर उपचार की सलाह देते हैं।
रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत
पश्चिम बंगाल में अक्टूबर के दौरान डेंगू के 5,500 से अधिक नए मामले सामने आने के बाद संक्रमण की रोकथाम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। केवल अस्पतालों में मरीजों का इलाज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए घरों और आसपास के इलाकों में भी नियमित कदम उठाने होंगे।
स्थानीय निकायों की ओर से सफाई व्यवस्था, जलभराव वाले स्थानों की पहचान और मच्छर नियंत्रण गतिविधियों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। वहीं, लोगों को भी अपने घरों और आसपास पानी जमा होने से रोकने के लिए नियमित जांच करनी चाहिए। पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले साधनों का इस्तेमाल करना और घरों में मच्छरों के प्रवेश को रोकना बचाव में मददगार हो सकता है।
डेंगू के मामलों में वृद्धि के दौरान समय पर जांच और उचित उपचार भी अहम भूमिका निभाते हैं। बुखार होने पर उसे सामान्य मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इससे संभावित गंभीर लक्षणों की समय रहते पहचान की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती
मानसून के शुरुआती महीनों में कम मामले सामने आने के बाद अक्टूबर में संक्रमण बढ़ना राज्य के लिए सतर्कता का संकेत है। सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई तेजी और अक्टूबर के पहले 23 दिनों में 5,500 से अधिक नए मामलों का सामने आना बताता है कि डेंगू पर नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी की जरूरत है।
आने वाले दिनों में संक्रमण की स्थिति पर नजर रखना, मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही लोगों को डेंगू के लक्षणों, बचाव के उपायों और गंभीर संकेतों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामलों में अक्टूबर के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। संक्रमण की आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि रोकथाम के उपाय कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं और लोग अपने आसपास स्वच्छता तथा मच्छर नियंत्रण को लेकर कितनी सतर्कता बरतते हैं।



