Tuesday, November 3, 2026
No menu items!
spot_img

JNU प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद आंगोमचा बिमोल अकोइजाम को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत, बर्खास्तगी पर लगी रोक

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद आंगोमचा बिमोल अकोइजाम को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के आदेश पर सोमवार को अंतरिम रोक लगा दी। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने अकोइजाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) को नोटिस जारी किया और मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी।

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी बर्खास्तगी के फैसले पर फिलहाल रोक लग गई है। अदालत ने मामले में दोनों पक्षों को सुनने और संबंधित तथ्यों पर विचार करने के लिए आगे की सुनवाई निर्धारित की है। अकोइजाम ने विश्वविद्यालय के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

बर्खास्तगी के आदेश पर हाई कोर्ट की रोक

आंगोमचा बिमोल अकोइजाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। वह इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद भी हैं। उनके खिलाफ विश्वविद्यालय की छात्राओं की ओर से यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इन शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था।

विश्वविद्यालय के इस फैसले को अकोइजाम ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने अपनी याचिका के माध्यम से बर्खास्तगी के आदेश पर सवाल उठाए और अदालत से राहत देने की मांग की। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी।

अदालत ने जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा है। अब विश्वविद्यालय को अदालत के सामने यह बताना होगा कि उसने किन आधारों और परिस्थितियों में प्रोफेसर के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में प्रस्तावित है।

11 छात्राओं ने दर्ज कराई थीं शिकायतें

आंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ मई में कम से कम 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में मामला चर्चा का विषय बन गया था। छात्राओं की ओर से की गई शिकायतों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की।

इस मामले में शिकायतों की संख्या और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर भी ध्यान केंद्रित हुआ। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज होना अपने आप में आरोपों के साबित होने का प्रमाण नहीं है। मामले से जुड़े आरोपों और विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

कांग्रेस सांसद भी हैं अकोइजाम

आंगोमचा बिमोल अकोइजाम की पहचान केवल जेएनयू के प्रोफेसर के रूप में नहीं है, बल्कि वह कांग्रेस के लोकसभा सांसद भी हैं। उन्होंने इनर मणिपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया था। शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों से जुड़े होने के कारण उनके खिलाफ हुई विश्वविद्यालय की कार्रवाई ने राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में भी ध्यान आकर्षित किया।

उनकी बर्खास्तगी का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चा में रहा। अब दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने अकोइजाम की याचिका पर जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी किया है। इसके जरिए विश्वविद्यालय को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अदालत ने फिलहाल बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाई है। इस आदेश को मामले में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। याचिका पर आगे सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

अगली सुनवाई जनवरी में होने की संभावना है। उस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले जवाब और याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय ले सकती है।

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से कांग्रेस सांसद और जेएनयू के प्रोफेसर आंगोमचा बिमोल अकोइजाम को बर्खास्तगी के मामले में अंतरिम राहत मिली है। वहीं, उनके खिलाफ छात्राओं की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों से जुड़ा मामला अभी न्यायिक और संबंधित प्रक्रियाओं के अधीन है।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

ताज़ा ख़बरें