वाशिंगटन। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव (US Midterm Elections 2026) के लिए मतदान शुरू हो गया है। अमेरिकी राजनीति के लिहाज से इन चुनावों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनके नतीजों का असर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेष कार्यकाल और संसद में उनकी पार्टी की स्थिति पर पड़ सकता है। मतदान के दिन से पहले ही लाखों अमेरिकी नागरिक अर्ली वोटिंग यानी अग्रिम मतदान के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके हैं। अब चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे मतदाताओं के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि इस बार किस आयु वर्ग और सामाजिक समूह की भागीदारी अधिक दिखाई दे रही है।
अर्ली वोटिंग के शुरुआती आंकड़े इस चुनाव को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इन आंकड़ों की तुलना पिछले चुनावों से की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मतदाताओं की भागीदारी के पैटर्न में कितना बदलाव आया है। हालांकि, अग्रिम मतदान के आंकड़ों से किसी उम्मीदवार या पार्टी की जीत का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में अलग-अलग राज्यों में मतदान की प्रक्रिया, मतदाताओं की श्रेणियां और वोटों की गिनती के नियम अलग-अलग हैं।
54.5 मिलियन से अधिक लोगों ने पहले ही किया मतदान
अर्ली वोटिंग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार अमेरिका में मतदान को लेकर लोगों की भागीदारी काफी अधिक रही है। 3 नवंबर को मतदान शुरू होने से पहले ही 54.5 मिलियन यानी करीब 5.45 करोड़ अमेरिकी नागरिक अपने वोट डाल चुके थे। इनमें लगभग 3 करोड़ लोगों ने मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डाला, जबकि करीब 2.4 करोड़ मतदाताओं ने डाक के माध्यम से अपने मतपत्र भेजे। यह आंकड़ा अमेरिकी चुनावों में अग्रिम मतदान की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के इलेक्शन लैब के आंकड़ों के अनुसार, इस बार अर्ली वोटिंग में मतदाताओं की संख्या पिछले मिडटर्म चुनावों के मुकाबले काफी अधिक रही है। वर्ष 2022 के मिडटर्म चुनाव में मतदान के दिन से पहले करीब 4.59 करोड़ लोगों ने वोट डाला था। इस बार अग्रिम मतदान का आंकड़ा उस स्तर को पार कर गया है। इससे चुनाव में लोगों की भागीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अर्ली वोटिंग में अधिक संख्या का मतलब यह नहीं है कि अंतिम मतदान प्रतिशत भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। चुनाव के दिन मतदान करने वाले लोगों की संख्या भी अंतिम नतीजों को प्रभावित करेगी। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में मतदान के तरीके और नियमों में अंतर होने के कारण पूरे देश के आंकड़ों का विश्लेषण सावधानी से करना जरूरी है।
बुजुर्ग मतदाताओं की सबसे अधिक भागीदारी
अर्ली वोटिंग के आंकड़ों में उम्र के आधार पर मतदाताओं की भागीदारी का एक खास पैटर्न सामने आया है। 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के मतदाताओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अग्रिम मतदान करने वालों में करीब 43.7 प्रतिशत मतदाता इसी आयु वर्ग के थे। वहीं, 41 से 65 वर्ष की उम्र के मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 37.3 प्रतिशत रही।
इसके मुकाबले युवा मतदाताओं की भागीदारी का प्रतिशत कम दिखाई दिया। 18 से 25 वर्ष की उम्र के मतदाताओं ने कुल अग्रिम मतदान में करीब 5.9 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। इन आंकड़ों से पता चलता है कि इस बार भी बुजुर्ग और मध्यम आयु वर्ग के मतदाताओं ने अर्ली वोटिंग में बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, युवा मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी का आकलन चुनाव के अंतिम आंकड़े आने के बाद ही किया जा सकेगा।
डेमोक्रेट और रिपब्लिकन मतदाताओं के आंकड़ों पर नजर
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के बीच मुकाबला मुख्य रूप से प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत को लेकर है। अर्ली वोटिंग के आंकड़ों में पार्टी पंजीकरण के आधार पर भी अंतर दिखाई दे रहा है। जिन राज्यों में मतदाताओं का पार्टी पंजीकरण दर्ज किया जाता है, वहां शुरुआती मतदान में डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े मतदाताओं की हिस्सेदारी रिपब्लिकन मतदाताओं से अधिक रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पार्टी पंजीकरण वाले 27 राज्यों में अग्रिम मतदान करने वालों में करीब 43.1 प्रतिशत डेमोक्रेट पंजीकृत मतदाता थे। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 31.7 प्रतिशत रही। निर्दलीय और अन्य राजनीतिक समूहों से जुड़े मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 25.2 प्रतिशत दर्ज की गई।
हालांकि, इन आंकड़ों को किसी पार्टी के पक्ष में पड़े वोट के रूप में नहीं देखा जा सकता। मतदाता का किसी पार्टी में पंजीकृत होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसने उसी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिया है। इसके अलावा, अमेरिका के सभी राज्यों में पार्टी पंजीकरण की व्यवस्था एक जैसी नहीं है। इसलिए इन आंकड़ों से पूरे देश के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का सीधा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
युवा और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका भी अहम
इस बार के चुनाव में युवा और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भागीदारी पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। चुनाव से पहले जारी आंकड़ों में कुछ राज्यों में अश्वेत, एशियाई और हिस्पैनिक मतदाताओं की भागीदारी में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। इसके अलावा 18 से 25 वर्ष के युवा मतदाताओं की संख्या भी कुछ क्षेत्रों में पिछले चुनावों की तुलना में बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाताओं की उम्र, सामाजिक पृष्ठभूमि और मतदान के तरीके में बदलाव अमेरिकी चुनावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, किसी एक समूह की अधिक भागीदारी से चुनाव का परिणाम तय नहीं होता। उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और अलग-अलग राज्यों में मतदाताओं की पसंद का भी नतीजों पर असर पड़ता है।
कांग्रेस के दोनों सदनों पर टिकी नजर
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव से अलग होते हैं। इनमें राष्ट्रपति का चुनाव नहीं किया जाता, बल्कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्यों का चुनाव होता है। कांग्रेस के दो सदन हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों के लिए चुनाव कराया जा रहा है।
इन चुनावों का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इनके जरिए यह तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों में कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी का प्रभाव रहेगा। यदि राष्ट्रपति की पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत मिलता है तो सरकार को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, यदि विपक्षी पार्टी किसी सदन में बहुमत हासिल करती है तो सरकार के फैसलों और प्रस्तावों पर उसकी भूमिका बढ़ सकती है।
इसी वजह से रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के लिए ये चुनाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। दोनों दलों ने अलग-अलग राज्यों और चुनावी क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया है। मतदाताओं के सामने अर्थव्यवस्था, महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं, आव्रजन और सरकारी नीतियों जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर बंद होंगे मतदान केंद्र
अमेरिका में मतदान की प्रक्रिया पूरे देश में एक ही समय पर समाप्त नहीं होती। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में स्थानीय समय के अनुसार मतदान केंद्र खुलने और बंद होने का समय निर्धारित किया गया है। चुनाव के दिन सबसे पहले इंडियाना और केंटकी के पूर्वी हिस्सों में मतदान केंद्र शाम 6 बजे पूर्वी अमेरिकी समय (ET) पर बंद होंगे। इसके बाद अन्य राज्यों में अलग-अलग समय पर मतदान समाप्त होगा।
जॉर्जिया, साउथ कैरोलिना, वर्जीनिया और कुछ अन्य क्षेत्रों में शाम 7 बजे मतदान बंद होगा। वहीं, नॉर्थ कैरोलिना, ओहायो और वेस्ट वर्जीनिया में मतदान केंद्र शाम 7:30 बजे तक खुले रहेंगे। इसके बाद अन्य राज्यों में भी निर्धारित समय के अनुसार मतदान प्रक्रिया समाप्त होगी। इसलिए शाम 6 बजे पूरे अमेरिका में मतदान खत्म नहीं होगा, बल्कि यह शुरुआती मतदान केंद्रों के बंद होने का समय है।
मतदान केंद्र बंद होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में डाक मतपत्रों और पहले से डाले गए वोटों की गिनती के नियम अलग हैं। इसी कारण चुनाव परिणाम आने में कुछ जगहों पर अधिक समय लग सकता है।
नतीजों से तय होगी अमेरिकी राजनीति की दिशा
मिडटर्म चुनाव के नतीजों का असर केवल कांग्रेस की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन की राजनीतिक स्थिति का भी अंदाजा मिलेगा। इन चुनावों के जरिए मतदाता मौजूदा सरकार की नीतियों और उसके कामकाज को लेकर अपनी राय जाहिर करेंगे।
विशेषज्ञों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि अर्ली वोटिंग में दिखाई देने वाला रुझान चुनाव के दिन मतदान करने वाले लोगों के आंकड़ों से कितना अलग रहता है। इसके अलावा, निर्दलीय मतदाताओं की भागीदारी और युवा मतदाताओं का मतदान भी विश्लेषण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
फिलहाल अमेरिका में मतदान प्रक्रिया जारी है और लाखों मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव से पहले 5.45 करोड़ से अधिक लोगों का वोट डालना इस बार के मिडटर्म चुनाव में अग्रिम मतदान की बड़ी भागीदारी को दर्शाता है। अब सभी की नजर मतदान समाप्त होने, मतगणना और अंतिम नतीजों पर टिकी है। इन परिणामों से स्पष्ट होगा कि अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक संतुलन किस दिशा में जाता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों में सरकार को किस तरह की राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।



