Wednesday, November 4, 2026
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राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर दी बहस की चुनौती

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती एक बार फिर दोहराई है। मंगलवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा कर देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं। इसी वीडियो के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें खुली बहस की चुनौती दिए हुए 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह अपनी पसंद का कोई भी मंच और स्थान चुन सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच मीडिया और देश के युवाओं की मौजूदगी में आमने-सामने चर्चा होनी चाहिए।

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। उन्होंने बहस के लिए कई मुद्दे भी गिनाए और कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को इस चर्चा का निर्णायक बना सकते हैं। राहुल के इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर खुली बहस की चुनौती को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

24 घंटे बीतने पर फिर उठाया सवाल

राहुल गांधी ने अपने वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने एक दिन पहले खुली बहस की चुनौती दी थी और अब 24 घंटे बीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष को देशविरोधी बताते हैं, इसलिए इस मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर चर्चा होनी चाहिए। राहुल ने सवाल उठाया कि आखिर देशविरोधी कौन है और विदेशी ताकतों से किसका संबंध है? उन्होंने प्रधानमंत्री से किसी भी मंच पर बहस के लिए तैयार रहने को कहा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बहस के लिए जगह और मंच का चयन प्रधानमंत्री अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि दोनों नेता एक टेबल पर आमने-सामने बैठेंगे और देश की जनता के सामने सभी सवालों पर खुलकर चर्चा करेंगे। राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि इस बहस में मीडिया के प्रतिनिधि और देश के युवा भी मौजूद रहने चाहिए, ताकि पूरी चर्चा पारदर्शी तरीके से हो सके।

उन्होंने प्रधानमंत्री से जल्द से जल्द बहस के लिए आगे आने की अपील की। राहुल ने कहा कि इस चर्चा में किसी भी मुद्दे को छिपाया नहीं जाना चाहिए और सभी सवालों के जवाब सार्वजनिक रूप से सामने आने चाहिए।

मोहन भागवत को जज बनाने का सुझाव

राहुल गांधी ने अपनी चुनौती को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बहस के लिए अपनी पसंद का कोई भी व्यक्ति निर्णायक के रूप में नियुक्त कर सकते हैं। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि अगर प्रधानमंत्री चाहें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को भी जज बनाया जा सकता है।

राहुल ने कहा कि दोनों नेता आमने-सामने बैठेंगे, मीडिया मौजूद रहेगा और देश के युवा भी इस चर्चा को देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि बहस का उद्देश्य सभी आरोपों और सवालों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होना चाहिए। राहुल के मुताबिक, प्रधानमंत्री जिस मंच और स्थान को चुनेंगे, वह वहां बहस के लिए तैयार हैं।

मोहन भागवत का नाम लेकर राहुल ने राजनीतिक चर्चा को एक नया मोड़ दिया है। उनके इस सुझाव को प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह राहुल गांधी की ओर से रखा गया प्रस्ताव है। फिलहाल इस तरह की किसी औपचारिक बहस के आयोजन की घोषणा सामने नहीं आई है।

अमेरिका के साथ समझौते और अडानी मामले पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने प्रस्तावित बहस के लिए कई मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चर्चा केवल विपक्ष को देशविरोधी बताने या विदेशी संबंधों के आरोपों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था और सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों पर भी सवाल होने चाहिए।

उन्होंने अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर सवाल उठाए। राहुल ने पूछा कि यह समझौता किस तरह हुआ, इतनी जल्दी क्यों किया गया और इसे लेकर मंत्रिमंडल को जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने वित्तीय व्यवस्था और आर्थिक ढांचे से जुड़े सवालों पर भी खुली चर्चा की मांग की।

इसके अलावा राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि अडानी मामले को बंद क्यों किया गया। इसके साथ ही उन्होंने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी विषयों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि उनके पास कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब देश की जनता के सामने आने चाहिए। उन्होंने कहा कि बहस में सभी मुद्दों पर खुलकर बात होगी, जिससे लोगों को वास्तविक स्थिति समझने का अवसर मिलेगा। गौरतलब है कि राहुल की ओर से उठाए गए ये सवाल और आरोप हैं, जिन पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जवाबों को देखना जरूरी है।

मानहानि के मुकदमों का भी किया जिक्र

राहुल गांधी ने अपने वीडियो में मानहानि के मुकदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े लोगों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर उनके खिलाफ मानहानि के मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। राहुल ने दावा किया कि उनके ऊपर लगभग 45 मानहानि के मामले हैं।

उन्होंने सवाल किया कि जब विदेशी संबंधों को लेकर उनके आरोपों पर विवाद है तो इस मुद्दे पर भी उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया जाता। राहुल ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके आरोप गलत हैं तो इस मामले में भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में भी दोनों पक्षों को खुलकर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री उन पर आरोप लगाते हैं, इसलिए उन्हें भी सामने आकर सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि खुली बहस से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह इस चर्चा से पीछे न हटें और जल्द से जल्द बहस के लिए तैयार हों।

एक दिन पहले भी पीएम मोदी को दी थी चुनौती

दरअसल, राहुल गांधी ने सोमवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी थी। यह मामला प्रधानमंत्री मोदी की उस टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने विपक्ष को विरोधी पक्ष के बजाय ‘अवरोध पक्ष’ बताया था।

प्रधानमंत्री ने गुजरात के एकतानगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों का विरोध करना है, लेकिन विपक्ष विकास के रास्ते में बाधाएं पैदा कर रहा है।

इसके बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री पर विदेशी मदद से सत्ता तक पहुंचने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि विदेशी ताकतों का प्रभाव देश की वित्तीय व्यवस्था और सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। इन आरोपों के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को किसी भी मंच पर खुली बहस के लिए आमंत्रित किया था।

मंगलवार को राहुल ने उसी चुनौती को दोहराते हुए कहा कि 24 घंटे बीत चुके हैं और प्रधानमंत्री को अब बहस के लिए आगे आना चाहिए। इस बार उन्होंने बहस के संभावित विषयों और आयोजन के प्रारूप को भी विस्तार से सामने रखा।

दिवाली की शुभकामनाओं के साथ राजनीतिक संदेश

राहुल गांधी ने अपने वीडियो का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवाली की शुभकामनाएं देकर किया। उन्होंने राजनीतिक सवालों और बहस की चुनौती के बीच कहा, ‘हैप्पी दिवाली, मोदी जी।’ इस तरह उन्होंने त्योहार की बधाई के साथ अपने राजनीतिक संदेश को भी सामने रखा।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। एक तरफ कांग्रेस नेता सरकार के फैसलों, विदेशी संबंधों और आर्थिक मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा की ओर से भी राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी राहुल गांधी के विदेशी मदद संबंधी आरोपों पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर राहुल की टिप्पणी की आलोचना करते हुए उनकी तुलना अलग-अलग मुद्दों पर विरोधाभासी बातें करने वाले समूहों से की। इससे साफ है कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

फिलहाल राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री को दी गई खुली बहस की चुनौती राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि इस चुनौती पर प्रधानमंत्री या भाजपा की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच किसी सार्वजनिक बहस को लेकर कोई औपचारिक पहल होती है या यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है।

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