पटना। बिहार में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर बिजली कंपनी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब कंपनी की प्राथमिकता उन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने पर अधिक केंद्रित हो गई है, जहां से उसे बेहतर राजस्व मिलने की उम्मीद है। इसके विपरीत, ऐसे इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर पहले जैसी तेजी नहीं दिखाई जा रही है, जहां मीटर लगाने के बाद कंपनी को राजस्व के लिहाज से विशेष लाभ मिलने की संभावना कम है।
बिजली कंपनी की इस बदली हुई रणनीति के पीछे राजस्व संग्रह को बेहतर बनाने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने की सोच बताई जा रही है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था में उपभोक्ता को बिजली इस्तेमाल करने से पहले अपने खाते में रिचार्ज कराना होता है। ऐसे में बिजली कंपनी के लिए उन क्षेत्रों में इस व्यवस्था को लागू करना अधिक उपयोगी माना जा रहा है, जहां बिजली बिल की नियमित वसूली और राजस्व प्राप्ति की बेहतर संभावना है।
अब कंपनी उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां बिजली उपभोक्ताओं की संख्या और संभावित खपत के आधार पर राजस्व मिलने की उम्मीद अधिक है। इससे स्मार्ट मीटर लगाने के काम में क्षेत्रवार अंतर दिखाई दे सकता है। हालांकि, जिन इलाकों में तत्काल राजस्व का लाभ कम है, वहां योजना की गति और प्राथमिकता को लेकर बदलाव देखने को मिल सकता है।
राजस्व की संभावना के आधार पर तय होगी प्राथमिकता
बिजली कंपनी की नई रणनीति में राजस्व को प्रमुख आधार बनाया गया है। अब स्मार्ट मीटर लगाने के लिए केवल उपभोक्ताओं की संख्या या क्षेत्र की उपलब्धता को ही आधार नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित इलाके में मीटर लगाने से बिजली कंपनी को कितना आर्थिक फायदा हो सकता है।
जिन क्षेत्रों में बिजली बिल की वसूली बेहतर है और उपभोक्ता नियमित रूप से भुगतान करते हैं, वहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे क्षेत्रों को भी प्राथमिकता मिल सकती है, जहां बिजली की खपत अधिक है और राजस्व बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
इसके उलट, ऐसे क्षेत्रों में कंपनी की दिलचस्पी कम हो रही है, जहां स्मार्ट मीटर लगाने के बावजूद राजस्व में अपेक्षित बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। इससे स्पष्ट है कि अब स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में आर्थिक उपयोगिता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है।
बिजली कंपनी का फोकस बदला, वसूली वाले इलाकों को मिलेगी प्राथमिकता
बिहार में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की मुहिम के बीच बिजली कंपनी की बदली हुई रणनीति चर्चा में है। अब कंपनी ऐसे क्षेत्रों में मीटर लगाने पर अधिक ध्यान दे रही है, जहां बिजली की खपत और उपभोक्ताओं से नियमित राजस्व मिलने की संभावना बेहतर है। वहीं, जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी कंपनी को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद कम है, वहां फिलहाल उतनी सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है।
दरअसल, बिजली वितरण कंपनियों के सामने बिजली खरीद, वितरण व्यवस्था, रखरखाव और बिल वसूली से जुड़ी कई आर्थिक चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में कंपनी चाहती है कि स्मार्ट मीटर लगाने के साथ-साथ बिजली बिल की वसूली में भी सुधार हो। प्रीपेड स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज करना पड़ता है और उसके बाद इस्तेमाल के अनुसार बिजली की खपत उनके खाते से घटती रहती है। इससे बिजली कंपनी को भुगतान की निगरानी करने और बकाया राशि कम करने में मदद मिलती है।
कंपनी की नई प्राथमिकता से यह संकेत मिलता है कि स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान में अब केवल लक्ष्य पूरा करने के बजाय राजस्व से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में मीटर लगाने से बिजली कंपनी की आमदनी बढ़ने की संभावना है, वहां काम को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।
बिहार में दो बिजली वितरण कंपनियां संभालती हैं जिम्मेदारी
बिहार में बिजली वितरण का काम मुख्य रूप से दो कंपनियों के माध्यम से किया जाता है। इनमें दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) और उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) शामिल हैं। दोनों कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के साथ बिलिंग और राजस्व संग्रह का काम भी संभालती हैं।
राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिजली की खपत का सही आकलन करना, बिलिंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और बिजली चोरी पर नियंत्रण करना है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली कंपनी को उपभोक्ताओं की खपत से संबंधित जानकारी डिजिटल रूप में मिलती है।
इसके अलावा मीटर रीडिंग के लिए कर्मचारियों को बार-बार घरों तक भेजने की जरूरत भी कम होती है। बिजली की खपत और भुगतान की जानकारी सिस्टम में उपलब्ध होने से बिलिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक बिहार में करीब 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे। राज्य के ऊर्जा विभाग के अनुसार, स्मार्ट मीटर व्यवस्था से बिलिंग और राजस्व संग्रह की दक्षता में भी सुधार हुआ है।
पटना में भी बड़ी संख्या में लगाए जा चुके हैं स्मार्ट मीटर
राजधानी पटना में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम बड़े स्तर पर किया गया है। पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (PESU) के अंतर्गत आने वाले 13 डिवीजनों में लाखों उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
25 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पटना क्षेत्र में कुल 7.61 लाख बिजली उपभोक्ता थे। इनमें से 6.33 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके थे, जबकि 1.28 लाख कनेक्शन पर मीटर बदलने का काम बाकी था। पटना सिटी, गुलजारबाग, दानापुर और खगौल जैसे क्षेत्रों में लंबित कनेक्शनों की संख्या तुलनात्मक रूप से अधिक बताई गई थी।
इससे स्पष्ट है कि राजधानी में स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में कंपनी के सामने एक तरफ बचे हुए उपभोक्ताओं तक पहुंचने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ राजस्व संग्रह को बेहतर बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी रोकने पर भी जोर
बिजली कंपनी के लिए स्मार्ट मीटर केवल बिलिंग का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली चोरी और अनियमित खपत पर नियंत्रण करने का भी एक महत्वपूर्ण साधन है। डिजिटल तकनीक के जरिए बिजली की खपत का रिकॉर्ड मिलने से उन कनेक्शनों की पहचान करना आसान हो सकता है, जहां खपत और स्वीकृत लोड के बीच असामान्य अंतर दिखाई देता है।
बिहार में स्मार्ट मीटर से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर बिजली चोरी की पहचान के लिए तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। फरवरी 2026 में भागलपुर में किए गए एक पायलट अध्ययन के दौरान करीब एक लाख उपभोक्ताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें बिजली चोरी और मीटर से छेड़छाड़ के मामलों का पता चला तथा करीब 1.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिलिंग की गई। इसके बाद राज्य स्तर पर इस तकनीक के विस्तार की बात कही गई थी।
इस तरह स्मार्ट मीटर से बिजली कंपनी को उपभोक्ताओं की खपत पर नजर रखने और संभावित राजस्व नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
उपभोक्ताओं के मन में भी कई सवाल
दूसरी तरफ स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच कई तरह के सवाल भी उठते रहे हैं। कुछ उपभोक्ता रिचार्ज व्यवस्था, बिजली बिल में अंतर, बैलेंस खत्म होने पर बिजली कटने और मीटर की रीडिंग को लेकर शिकायत करते हैं। ऐसे में बिजली कंपनी के सामने मीटर लगाने के साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है।
प्रीपेड व्यवस्था में उपभोक्ताओं को अपने बिजली खाते का बैलेंस नियमित रूप से देखना पड़ता है। बैलेंस कम होने पर समय रहते रिचार्ज करना जरूरी होता है, ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो। इस व्यवस्था को लेकर लोगों को सही जानकारी देना भी बिजली विभाग की जिम्मेदारी है।
अब आगे क्या होगी रणनीति?
बिहार में स्मार्ट मीटर लगाने की नई प्राथमिकता से आने वाले दिनों में क्षेत्रवार काम की गति प्रभावित हो सकती है। जिन क्षेत्रों से बिजली कंपनी को बेहतर राजस्व मिलने की उम्मीद है, वहां मीटर लगाने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। वहीं, कम राजस्व वाले क्षेत्रों में काम की प्राथमिकता अपेक्षाकृत कम रह सकती है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कम राजस्व वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से कंपनी की प्राथमिकता में बदलाव का संकेत मिलता है।
कुल मिलाकर बिहार में स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान अब राजस्व संग्रह और आर्थिक उपयोगिता के नजरिये से भी आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिजली कंपनी अपनी इस रणनीति के तहत किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है और लंबित उपभोक्ताओं तक स्मार्ट मीटर पहुंचाने का काम किस गति से पूरा होता है। साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा और पारदर्शी बिलिंग उपलब्ध कराना भी इस पूरी व्यवस्था की सफलता के लिए अहम रहेगा।



