Wednesday, November 4, 2026
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पहली फिल्म से आकाश कौशिक ने दिखाई निर्देशन की नई उड़ान

नई दिल्ली। आकाश कौशिक ने हाल ही में आयुष्मान खुराना स्टारर फिल्म ‘उड़ता तीर’ के साथ निर्देशन की दुनिया में कदम रखा है। 23 अक्टूबर को रिलीज हुई यह फिल्म देशभक्ति पर आधारित सिनेमा से प्रेरित है, लेकिन इस जॉनर को एक बिल्कुल अलग और अनोखे अंदाज में पेश करती है। आमतौर पर देशभक्ति और जासूसी पर आधारित फिल्मों में गंभीर संवाद, बड़े एक्शन दृश्य और दुश्मन देश के खिलाफ मिशन को प्रमुखता दी जाती है। वहीं ‘उड़ता तीर’ इन परिचित तत्वों के बीच हास्य, व्यंग्य और गलतफहमी से पैदा होने वाली परिस्थितियों को जगह देती है। फिल्म की कहानी दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अगर किसी जासूस की पहचान और याददाश्त ही बदल जाए तो उसके मिशन का क्या होगा?

आकाश कौशिक ने फिल्म की कहानी लिखने के साथ इसका निर्देशन भी किया है। बतौर निर्देशक यह उनकी पहली फिल्म है। उन्होंने एक ऐसे विषय को चुना है, जिसमें एक्शन, सस्पेंस, देशभक्ति और कॉमेडी को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है। फिल्म की सबसे खास बात इसका केंद्रीय विचार है, जिसमें एक जासूस अपनी असली पहचान भूलकर खुद को उसी देश का वफादार नागरिक समझने लगता है, जिसके खिलाफ उसे काम करना था।

देशभक्ति के पारंपरिक अंदाज से अलग कहानी

‘उड़ता तीर’ भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव, खुफिया एजेंसियों की गतिविधियों और आतंकवाद जैसे विषयों को आधार बनाती है। हालांकि फिल्म इन गंभीर मुद्दों को पूरी तरह गंभीर अंदाज में पेश नहीं करती। इसकी कहानी में हास्य और व्यंग्य का इस्तेमाल किया गया है। यही वजह है कि इसे सामान्य जासूसी थ्रिलर के बजाय स्पाई-कॉमेडी के रूप में देखा जा रहा है।

फिल्म की कहानी में आयुष्मान खुराना विक्रांत थापर नाम के एक अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं। शुरुआत में उनका किरदार भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड के एक अधिकारी के रूप में सामने आता है, जिसे आतंकवादी अजहर मकसूद को पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ एक ऐसा रहस्य सामने आता है, जो पूरे घटनाक्रम को बदल देता है।

दरअसल, विक्रांत की असली पहचान बिलाल अहमद है। वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाला एजेंट है और भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में अपनी जगह बना चुका है। उसका काम भारत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाना है। लेकिन एक दुर्घटना के बाद उसकी याददाश्त चली जाती है। इसके बाद वह अपनी वास्तविक पहचान और उद्देश्य भूल जाता है।

याददाश्त खोने के बाद बदल जाती है जासूस की दुनिया

कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ उस समय आता है, जब बिलाल को अपनी पुरानी जिंदगी के बारे में कुछ याद नहीं रहता। उसके आसपास मौजूद लोग उसे भारतीय अधिकारी विक्रांत थापर के रूप में पहचानते हैं। वह भी उनकी बातों पर भरोसा कर लेता है और खुद को भारत का सच्चा देशभक्त समझने लगता है।

इसके बाद हालात ऐसे बनते हैं कि जो व्यक्ति पहले भारत के खिलाफ जासूसी कर रहा था, वही अब आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों के खिलाफ खड़ा दिखाई देता है। उसकी बदली हुई सोच पाकिस्तान के खुफिया तंत्र के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। इस उलटफेर से फिल्म में कई हास्यपूर्ण परिस्थितियां पैदा होती हैं।

यही फिल्म का मुख्य आकर्षण है। एक तरफ खुफिया एजेंसियां अपने एजेंट को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी नई पहचान के हिसाब से काम करता रहता है। दर्शकों के लिए यह देखना दिलचस्प बनता है कि कहानी में कौन किसकी असली पहचान जानता है और किसे किस बात का भ्रम है।

आयुष्मान खुराना ने निभाई दोहरी पहचान की भूमिका

आयुष्मान खुराना फिल्म में बिलाल और विक्रांत की दोहरी पहचान से जुड़े किरदार को निभाते हैं। इस भूमिका में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति का चरित्र दिखाना है, जिसकी वास्तविक पहचान कुछ और है, लेकिन याददाश्त खोने के बाद उसका व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है।

आयुष्मान अपनी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार चुनने के लिए जाने जाते हैं। ‘उड़ता तीर’ में भी उन्होंने कॉमेडी और सस्पेंस के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जहां उनका किरदार खुद को देशभक्त समझते हुए ऐसे कदम उठाता है, जिनसे उसके पुराने साथी और विरोधी दोनों उलझन में पड़ जाते हैं।

फिल्म में सारा अली खान यामिनी की भूमिका में हैं। वह रक्षा मंत्रालय से जुड़ी अधिकारी हैं और विक्रांत की पत्नी भी हैं। दोनों के वैवाहिक रिश्ते में तनाव है। विक्रांत की याददाश्त जाने के बाद उनके रिश्ते में भी कई बदलाव आते हैं। इस व्यक्तिगत कहानी को मुख्य जासूसी घटनाक्रम के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।

सहायक कलाकारों ने भी निभाई अहम भूमिका

फिल्म में राहुल बोस, राम कपूर, गुलशन ग्रोवर, मुकुल देव, सुहैल नैयर, रघुबीर यादव, बृजेंद्र काला और संदीप आनंद जैसे कलाकार भी नजर आते हैं। इन कलाकारों के किरदार कहानी को आगे बढ़ाने के साथ हास्य और सस्पेंस पैदा करने में मदद करते हैं।

राहुल बोस फिल्म में खुफिया टीम के प्रमुख वर्मन की भूमिका में हैं। राम कपूर और गुलशन ग्रोवर के किरदार पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया तंत्र से जुड़े घटनाक्रम का हिस्सा हैं। मुकुल देव आतंकवादी अजहर मकसूद के रूप में दिखाई देते हैं। सुहैल नैयर का किरदार अशफाक भी कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

फिल्म की कहानी में इन सभी किरदारों के बीच अलग-अलग तरह के हित और उद्देश्य हैं। कोई अपने मिशन को सफल बनाना चाहता है, तो कोई अपनी पहचान और स्थिति बचाने की कोशिश में लगा है। ऐसे में जब बिलाल की याददाश्त चली जाती है, तो सभी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो जाती है।

आकाश कौशिक के विचार से निकली फिल्म की अवधारणा

फिल्म के निर्देशक आकाश कौशिक ने एक बातचीत में बताया कि वह बचपन से ही देशभक्ति पर आधारित फिल्मों के प्रशंसक रहे हैं। ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों ने उनके मन में इस जॉनर के प्रति खास रुचि पैदा की। उन्होंने बताया कि हिंदी फिल्मों में अक्सर भारतीय नायक को ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ जैसे नारे लगाते हुए दिखाया जाता है। इसी सोच से उनके मन में एक अलग तरह का विचार आया कि क्यों न कहानी में ऐसा मोड़ रखा जाए, जहां पड़ोसी देश का एक व्यक्ति भी ‘जय हिंद’ कहने लगे।

आकाश के मुताबिक, इसी विचार ने ‘उड़ता तीर’ की अवधारणा को जन्म दिया। उन्हें लगा कि यह कहानी सामान्य देशभक्ति फिल्मों से अलग हो सकती है और दर्शकों को मनोरंजन का नया अनुभव दे सकती है। उन्होंने इस विचार को पटकथा में बदलने का फैसला किया।

निर्देशक के लिए यह फिल्म इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें उन्हें पहली बार निर्देशन की जिम्मेदारी संभालनी थी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस तरह की अलग कहानी को लेकर कुछ आशंकाएं थीं, लेकिन कलाकारों और निर्माताओं ने उनका साथ दिया। उनके अनुसार फिल्म में कॉमेडी, सस्पेंस, एक्शन और कई अप्रत्याशित मोड़ हैं। इन सभी तत्वों को एक साथ साधना आसान नहीं था।

देशभक्ति के साथ व्यंग्य का प्रयोग

‘उड़ता तीर’ की एक खासियत यह भी है कि इसमें देशभक्ति को केवल गंभीर संवादों और बड़े-बड़े एक्शन दृश्यों के माध्यम से नहीं दिखाया गया है। फिल्म में हास्य के जरिए भी इस विषय को सामने लाने की कोशिश की गई है। भारत और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े किरदारों के बीच होने वाली घटनाएं कई बार व्यंग्य का रूप ले लेती हैं।

फिल्म में जासूसी की दुनिया को लेकर प्रचलित धारणाओं पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की गई है। कहानी में गलत पहचान, गुप्त मिशन और आपसी भ्रम से पैदा होने वाली परिस्थितियां इसे सामान्य एक्शन फिल्मों से अलग बनाती हैं। हालांकि, कहानी आगे बढ़ने के साथ इसमें गंभीरता और देशभक्ति का पक्ष भी मजबूत होता है।

इस तरह फिल्म एक ही समय में कई तरह के भाव प्रस्तुत करने की कोशिश करती है। दर्शकों को कहीं हंसने का मौका मिलता है, तो कहीं कहानी के रहस्य और किरदारों के फैसले उन्हें आगे की घटनाओं के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं।

निर्देशन की पहली पारी में अलग प्रयोग

आकाश कौशिक की पहली निर्देशित फिल्म होने के कारण ‘उड़ता तीर’ उनके करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने ऐसी कहानी चुनी है, जिसमें स्थापित फिल्मी फॉर्मूले का इस्तेमाल करने के बजाय जॉनर के साथ प्रयोग किया गया है। देशभक्ति, जासूसी और कॉमेडी को एक साथ जोड़ना अपने आप में चुनौतीपूर्ण काम है।

फिल्म को करण जौहर, अदार पूनावाला, अपूर्वा मेहता, गुनीत मोंगा और अचिन जैन ने प्रोड्यूस किया है। इसका निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस और सिख्या एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया गया है।

कुल मिलाकर ‘उड़ता तीर’ का आधार एक ऐसे जासूस की कहानी है, जो अपनी असली पहचान भूलकर अपने ही मिशन के खिलाफ खड़ा हो जाता है। आकाश कौशिक ने इस विचार के माध्यम से देशभक्ति की कहानी को हास्य और व्यंग्य के साथ पेश करने का प्रयास किया है। आयुष्मान खुराना की मुख्य भूमिका और अनुभवी सहायक कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को एक अलग पहचान देती है। निर्देशन की पहली कोशिश में आकाश कौशिक ने यह स्पष्ट किया है कि वह परिचित विषयों को भी नए नजरिये से प्रस्तुत करने में रुचि रखते हैं।

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