Sunday, November 1, 2026
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हैलोवीन पर फ्रांस में सुरक्षा का पहरा, 70 हजार पुलिस और जेंडरमेरी जवान तैनात; हिंसा की आशंका से बढ़ी चिंता


नई दिल्ली। हैलोवीन के मौके पर फ्रांस में त्योहार के उल्लास के बीच सुरक्षा को लेकर भारी सतर्कता बरती जा रही है। नए सिरे से विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की आशंका को देखते हुए फ्रांस सरकार ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इसके तहत करीब 70 हजार पुलिस और जेंडरमेरी जवानों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर शांति बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोकना है।

फ्रांस में हैलोवीन के दौरान आमतौर पर लोग अलग-अलग वेशभूषा में सड़कों पर निकलते हैं। बच्चे और युवा इस त्योहार को उत्साह के साथ मनाते हैं। कई शहरों में पार्टियों, सार्वजनिक आयोजनों और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन होता है। लेकिन इस बार सुरक्षा चिंताओं के चलते त्योहार के माहौल पर तनाव का असर दिखाई दे रहा है।

सरकार को आशंका है कि हैलोवीन की रात कुछ इलाकों में उपद्रवी तत्व सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस और जेंडरमेरी की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।

हैलोवीन पर फ्रांस में हिंसा का खतरा, 70 हजार पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी जवान तैनात; सड़कों पर उतरेंगे प्रदर्शनकारी

नई दिल्ली। हैलोवीन के मौके पर फ्रांस में त्योहार के उल्लास के बीच सुरक्षा को लेकर भारी तनाव बना हुआ है। देश में नए सिरे से विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की आशंका को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शनिवार, 31 अक्टूबर को पूरे देश में करीब 70 हजार पुलिस और जेंडरमेरी जवानों को तैनात किया गया है। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस दिन को सार्वजनिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद जोखिम भरा बताया है। सरकार को आशंका है कि हैलोवीन के आयोजनों की आड़ में कुछ उपद्रवी तत्व हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।

फ्रांस में पिछले कुछ सप्ताह से महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों की भागीदारी देखने को मिल रही है। इससे पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में हिंसा और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं। इसी अनुभव को देखते हुए प्रशासन इस बार पहले से ही सतर्क है।

31 अक्टूबर को तीसरे सप्ताह भी जारी रहेंगे प्रदर्शन

फ्रांस में 31 अक्टूबर को लगातार तीसरे सप्ताह विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए छात्र संगठनों, श्रमिक संगठनों और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े समूहों ने लोगों से अपील की है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बढ़ती महंगाई से राहत, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों का समाधान शामिल है। प्रदर्शनकारी सरकार की नीतियों से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

इस बार विरोध प्रदर्शनों के साथ हैलोवीन का त्योहार भी पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर मौजूद रहने के कारण सुरक्षा व्यवस्था संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर रात के समय स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई गई है।

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा है कि 31 अक्टूबर को सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा काफी अधिक है। उन्होंने सुरक्षा बलों को किसी भी तरह की हिंसा और उपद्रव से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं।

Reuters+2

70 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, विशेष दस्ते भी रहेंगे मुस्तैद

फ्रांस सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए देशभर में 70 हजार पुलिस और जेंडरमेरी जवानों को तैनात किया है। यह संख्या पिछले सप्ताह 24 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान तैनात सुरक्षाकर्मियों के बराबर है।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस अभियान में स्थानीय पुलिस बलों के साथ मोबाइल सुरक्षा इकाइयों और विशेष दस्तों को भी शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मदद ली जा सकती है।

सुरक्षा अभियान के तहत ड्रोन, हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और वाटर कैनन भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके अलावा विशेष पुलिस इकाइयों और प्रशिक्षित टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है।

प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को परेशानी न हो और हिंसा फैलाने वाले तत्वों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

Ministère de l’Intérieur+2

17 अक्टूबर के प्रदर्शनों में हुई थी लूटपाट और तोड़फोड़

फ्रांस में सुरक्षा व्यवस्था इतनी व्यापक करने की एक बड़ी वजह 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन हैं। उस दौरान कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। उपद्रवियों ने दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। कई जगहों पर लूटपाट, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई थीं।

इसके बाद 24 अक्टूबर को भी देशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उस दिन करीब 4 लाख 10 हजार लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। हालांकि, प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती किए जाने से पहले जैसी हिंसा को दोहराने से रोकने में मदद मिली।

अब 31 अक्टूबर को फिर से प्रदर्शन होने के कारण सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के साथ दुकानदारों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है।

AP News+2

पेरिस में प्रदर्शन के लिए तय किया गया अलग रास्ता

फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने शहर के मध्य हिस्से में कुछ प्रस्तावित प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया है। प्रदर्शनकारियों को शहर के बाहरी हिस्सों में निर्धारित मार्ग पर मार्च करने की अनुमति दी गई है।

इसके अलावा जिन इलाकों में पहले हिंसा और लूटपाट की घटनाएं हुई थीं, वहां रात के समय विशेष पाबंदियां लगाई गई हैं। République और Châtelet-Les Halles जैसे इलाकों में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक कुछ सार्वजनिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू किया गया है।

पेरिस में कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और ट्राम सेवाओं में बदलाव करने की भी व्यवस्था की गई है। पुलिस का मानना है कि भीड़ को संवेदनशील इलाकों से दूर रखने से हिंसा की आशंका कम की जा सकती है।

Le Monde.fr+2

हैलोवीन के मास्क को लेकर भी पुलिस की चेतावनी

इस बार फ्रांस में हैलोवीन के त्योहार को लेकर पुलिस की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि इस दौरान लोग चेहरे पर अलग-अलग तरह के मास्क और डरावने मुखौटे पहनते हैं। प्रशासन को आशंका है कि कुछ लोग इसी का फायदा उठाकर अपनी पहचान छिपाते हुए हिंसक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने स्पष्ट किया है कि हैलोवीन किसी को भी सार्वजनिक स्थानों पर पहचान छिपाकर हिंसा या उपद्रव करने का अधिकार नहीं देता। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन संदेशों को लेकर भी चिंता जताई है, जिनमें कथित तौर पर क्रांति और विद्रोह जैसे नारों के साथ रात के समय जुटने की अपील की गई थी।

मंत्री ने चेतावनी दी है कि इस तरह के गैरकानूनी जमावड़ों को अनुमति नहीं दी जाएगी और हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

Al Jazeera+2

महंगाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी

फ्रांस में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे केवल एक मुद्दा नहीं है। प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों, शिक्षा व्यवस्था में समस्याओं और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

शुरुआत में छात्र संगठनों की ओर से स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन शुरू किए गए थे। धीरे-धीरे इसमें श्रमिक संगठनों और दूसरे समूहों की भागीदारी भी बढ़ती गई।

अब यह आंदोलन व्यापक सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से जुड़ गया है। प्रदर्शनकारी सरकार से आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को दूर करने और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।

दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन हिंसा, लूटपाट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

AP News+2

राष्ट्रपति मैक्रों की सरकार के सामने चुनौती

फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है। देश में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और उससे पहले बढ़ती महंगाई तथा सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर रही है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने भी देश में जारी तनाव और अशांति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव से कुछ महीने पहले देश में इस तरह की उथल-पुथल सामान्य स्थिति नहीं है।

वहीं, सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। छात्र संगठनों और श्रमिक समूहों ने 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान भी किया है। इससे आने वाले दिनों में फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

Reuters+2

फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी दुनिया की नजर

हैलोवीन के मौके पर फ्रांस में 70 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती यह दिखाती है कि सरकार इस बार किसी भी तरह की हिंसक घटना को रोकने के लिए व्यापक तैयारी कर रही है। पुलिस और जेंडरमेरी के जवानों को प्रमुख शहरों, सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों में मुस्तैद किया गया है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक तरफ लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार मिले और दूसरी तरफ हिंसा तथा तोड़फोड़ की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

फिलहाल फ्रांस में 31 अक्टूबर की रात सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार की ओर से किए गए इंतजाम विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांति बनाए रखने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।

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