Saturday, October 31, 2026
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पुलिस इंस्पेक्टर के नाम-पते पर हासिल की शिक्षक की नौकरी, 10 साल से बंद था वेतन; शिक्षा विभाग ने किया बर्खास्त

बांका। बिहार के बांका जिले में फर्जी तरीके से शिक्षक की नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। रांची में पदस्थापित पुलिस इंस्पेक्टर मनोज कुमार के नाम और पते का इस्तेमाल कर सहायक शिक्षक की नौकरी पाने वाले व्यक्ति को शिक्षा विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी देवनारायण पंडित की ओर से शुक्रवार को जारी कार्यालय आदेश में संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का निर्देश दिया गया है। बर्खास्त किया गया व्यक्ति बाराहाट प्रखंड के प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानूकित्ता में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत था।

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि संबंधित व्यक्ति का वेतन पिछले 10 वर्षों से बंद था। फर्जीवाड़े का मामला शिक्षा विभाग के संज्ञान में आने के बाद विभाग ने भुगतान रोक दिया था। इसके बावजूद सेवा से बर्खास्तगी का औपचारिक आदेश अब जारी किया गया है। आदेश के बाद संबंधित व्यक्ति की शिक्षक के पद पर सेवा समाप्त हो गई है।

पुलिस इंस्पेक्टर के नाम-पते का किया इस्तेमाल

मामले के अनुसार, एक व्यक्ति ने रांची में पदस्थापित पुलिस इंस्पेक्टर मनोज कुमार के नाम और पते का इस्तेमाल कर शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान और पते का उपयोग करना गंभीर मामला है। इससे न केवल नियुक्ति प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि सरकारी विभागों में दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था भी चर्चा में आ जाती है।

इस प्रकरण में पुलिस इंस्पेक्टर मनोज कुमार की पहचान का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फर्जी शिक्षक ने नियुक्ति के समय किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था और पहचान संबंधी गड़बड़ी का खुलासा किस स्तर पर हुआ था।

10 साल से नहीं मिल रहा था वेतन

फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित व्यक्ति का वेतन रोक दिया था। बताया गया है कि पिछले करीब 10 वर्षों से उसे वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा था। यानी विभाग को मामले की जानकारी मिलने के बाद से ही उसके भुगतान पर रोक लगी हुई थी।

वेतन बंद होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति विद्यालय में किस प्रक्रिया के तहत कार्यरत रहा और विभागीय स्तर पर मामले की जांच किस तरह आगे बढ़ी, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। अब जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जारी आदेश के बाद उसे तत्काल प्रभाव से सहायक शिक्षक के पद से बर्खास्त कर दिया गया है।

डीईओ ने जारी किया बर्खास्तगी का आदेश

जिला शिक्षा पदाधिकारी देवनारायण पंडित ने कार्यालय आदेश जारी कर संबंधित व्यक्ति को सेवा से हटाने की कार्रवाई की है। आदेश में बर्खास्तगी को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इसके साथ ही विद्यालय में उसकी शिक्षक के रूप में सेवा समाप्त हो गई है।

शिक्षा विभाग की ओर से की गई यह कार्रवाई फर्जी पहचान के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, पहचान और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम-पते का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने का मामला विभागीय निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है।

बाराहाट के विद्यालय में था पदस्थापित

बर्खास्त किया गया व्यक्ति बांका जिले के बाराहाट प्रखंड स्थित प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानूकित्ता में कार्यरत था। वह यहां सहायक शिक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहा था। विभागीय आदेश के बाद अब उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है।

विद्यालय में उसकी नियुक्ति और लंबे समय तक पदस्थापना के दौरान फर्जी पहचान का मामला किस तरह सामने आया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी तरह यह भी स्पष्ट नहीं है कि मामले में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका की जांच की जा रही है या नहीं।

सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए गलत पहचान और दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। शिक्षक का पद सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा से जुड़ा होता है। ऐसे में नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों और पहचान का सही तरीके से सत्यापन बेहद जरूरी है।

यदि कोई व्यक्ति दूसरे की पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी सेवा में प्रवेश करता है, तो इससे नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है। साथ ही वास्तविक पहचान के आधार पर नौकरी पाने वाले योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है।

बांका के इस मामले में शिक्षा विभाग ने संबंधित व्यक्ति को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया है। पिछले 10 वर्षों से वेतन बंद रहने के बाद अब उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है। हालांकि, फर्जी नियुक्ति से जुड़े पूरे घटनाक्रम, इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और मामले में आगे की संभावित कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

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