लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के महासचिव मोहम्मद इरफान खान कादरी ने कहा है कि केजीएमयू परिसर स्थित हज़रत हाजी हरमैन शाह की दरगाह और अन्य पुराने मज़ार लखनऊ की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं, जिनकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ये दरगाहें और मज़ार लंबे समय से लोगों की आस्था और श्रद्धा के केंद्र रहे हैं। साथ ही ये लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा सांस्कृतिक विरासत की भी प्रतीक हैं। अब तक ऐसा कोई ठोस कानूनी या ऐतिहासिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे इनके अस्तित्व या महत्व पर सवाल उठाया जा सके।
इरफान कादरी ने कहा कि दरगाह की भूमि के उपयोग और वहां पार्किंग बनाए जाने को लेकर पहले से ही लोगों में चिंता है। ऐसे में किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई, कब्जे की कोशिश या धार्मिक-ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने वाला कदम स्वीकार नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि लखनऊ के शिया-सुन्नी समेत सभी अमनपसंद नागरिक अपने साझा धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के पक्ष में हैं। दरगाहें, खानकाहें और मज़ार शहर की पहचान, आपसी सौहार्द और धार्मिक सद्भाव की निशानी हैं।
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस संविधान, कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है। यदि ऐतिहासिक मज़ारों या दरगाहों के खिलाफ कोई अनुचित कार्रवाई हुई तो संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर उसका विरोध किया जाएगा।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से दरगाह हाजी हरमैन शाह समेत सभी ऐतिहासिक मज़ारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शहर में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।



