लखनऊ: साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं तहज़ीबी कार्यक्रमों के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाली संस्था तहबीब की ओर से हज़रतगंज स्थित रॉयल कैफ़े में एक भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। यह महफ़िल तहबीब के आयोजक, प्रसिद्ध बुद्धिजीवी एवं पत्रकार जनाब तारिक़ फ़ैज़ी के लखनऊ आगमन पर आयोजित की गई थी।
कार्यक्रम की मेज़बानी प्रसिद्ध लेखिका व शायरा माह-ए-तलअत सिद्दीक़ी ने की। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर डॉ. तारिक़ क़मर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि संचालन प्रसिद्ध शायर एवं पत्रकार मुईन अलवी ने अपने विशिष्ट और मँजे हुए अंदाज़ में किया। इस साहित्यिक संध्या में लखनऊ सहित दिल्ली, रायबरेली, आज़मगढ़ और कानपुर से आए प्रमुख रचनाकारों ने शिरकत की।
समारोह में विशेष वक्ता के रूप में जनाब तारिक़ फ़ैज़ी ने कहा कि तहबीब हमेशा से साहित्यिक गरिमा और उच्च गुणवत्ता के मानकों को प्राथमिकता देती आई है। उन्होंने बदलते दौर की शायरी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक डॉ. तारिक़ क़मर जैसे इल्मी योग्यता और सुदृढ़ चरित्र वाले शायर साहित्यिक क्षितिज पर मौजूद हैं, तब तक अदबी भविष्य को लेकर मायूस होने की आवश्यकता नहीं है।
काव्य संध्या के दौरान “दलील पुख़्ता न थी, मोतबर हवाला न था। चराग़ जल तो रहे थे मगर उजाला न था” जैसी पंक्तियों के साथ उम्दा कलाम पेश किए गए। महफ़िल में डॉ. तारिक़ क़मर, शाहिद कमाल, मुईन अलवी, डॉ. अहमद अयाज़, तारा इक़बाल, भावना श्रीवास्तव, माह-ए-तलअत, उफ़क़ आज़मी, मोहम्मद हफ़ीज़, एस.एम. अफ़ज़ल, शादाब अहमद और मनोज शर्मा ने अपनी रचनाओं से समां बाँध दिया।
इस अवसर पर आयोजकों द्वारा आगामी माह लखनऊ में आयोजित होने वाले ‘लिटरेरी फ़ेस्टिवल’ की घोषणा भी की गई। कार्यक्रम में आतिफ़ ख़ान, निख़त परवीन, सबाहत आफ़रीन, अलहमरा ख़ान, सहर बानो, मेहनाज़ ख़ान, यास्मीन अलवी, राज अस्मृति और ख़ालिद आलम सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में माह-ए-तलअत सिद्दीक़ी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया, जिसके पश्चात रात्रिभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



