Lucknow ईरान–इज़रायल–अमेरिका तनाव के दौरान, जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं, उसी समय मुंबई (महाराष्ट्र) के मूल निवासी और ईरान के क़ुम शहर स्थित अल-मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एवं विशेषज्ञ मौलाना ज़मीर अब्बास जाफरी एक नए और प्रभावशाली चेहरे के रूप में सामने आए। उन्होंने अपने व्याख्यानों और वीडियो संदेशों के माध्यम से इंसानियत, अमन, धार्मिक संवाद और सत्य पर आधारित विचारों को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया।
मौलाना ज़मीर अब्बास जाफरी पिछले कई वर्षों से ईरान में रहकर उच्च धार्मिक शिक्षा और अध्यापन से जुड़े हुए हैं। हाल ही में वह भारत आए और लखनऊ में कम समय के प्रवास के दौरान दो मजलिसों को संबोधित किया। उनकी तकरीरों की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि उन्होंने सुन्नी भाइयों को भी खुले दिल से संवाद के लिए आमंत्रित किया और कहा कि मजलिस केq बाद बैठकर आपसी चर्चा और समझ को आगे बढ़ाया जाए।
लखनऊ में उनके प्रति लोगों की मोहब्बत और सम्मान साफ़ दिखाई दिया। विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों ने उनसे मिलने की इच्छा जताई। सनातन समाज से जुड़े कई लोगों ने भी उनके विचारों की सराहना की। लेखक के मित्र प्रोफेसर आकाश सहित अनेक लोग उनसे मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उनका कार्यक्रम अत्यंत व्यस्त होने के कारण यह संभव नहीं हो सका, क्योंकि उन्हें ईरान लौटकर पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होना था।
मौलाना ज़मीर अब्बास जाफरी का सादगीपूर्ण व्यवहार, प्रेम, संवाद की भावना और सभी वर्गों के लोगों से आत्मीयता से मिलने का अंदाज़ लोगों के दिलों को छू रहा है। उनके विचारों से प्रभावित लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह मोहब्बत, इंसानियत और आपसी सम्मान का संदेश आगे बढ़ता रहा तो समाज में सकारात्मक बदलाव की नई शुरुआत हो सकती है।
लखनऊ में उनके प्रति लोगों का बढ़ता प्रेम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह केवल एक धार्मिक विद्वान ही नहीं, बल्कि संवाद, एकता और इंसानियत के संदेशवाहक के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।



