नई दिल्ली:इस्लामी गणराज्य ईरान के मुख्य न्यायाधीश आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी साहब के भारत आगमन के अवसर पर नई दिल्ली स्थित इस्लामी गणराज्य ईरान के दूतावास की ओर से एक विशेष सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के प्रमुख शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास साहब ने शिरकत की और आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी साहब की मौजूदगी में सम्मेलन को संबोधित करते हुए उनके हिन्दुस्तान आने पर दिल की गहराइयों से उनका खै़रमकदम किया।
मौलाना यासूब अब्बास साहब ने अपने संबोधन में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता शहीद आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई साहब की शहादत पर ताज़ियत पेश करते हुए कहा कि उन्होंने मज़लूमों और बेगुनाहों की जान की हिफाज़त के लिए अपनी शहादत पेश करने तथा ज़ालिमों के सामने न झुकने की मिसाल दुनिया के सामने पेश की। उन्होंने कहा कि दुनिया को उनके जीवन और संघर्ष से सबक हासिल करना चाहिए।
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि, “अगर किसी को इस दौर में दिलेरी और सच्चाई की ज़िंदा मिसाल देखना हो, तो उसे आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई साहब की ज़िंदगी पर रोशनी डालनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि उनका जीवन मज़लूमों की हिमायत, इंसाफ के लिए संघर्ष और ज़ुल्म के सामने डटकर खड़े होने का संदेश देता है।
अपने संबोधन के दौरान मौलाना यासूब अब्बास ने भारत और ईरान के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आपसी संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की हक़ पसंद जनता हमेशा ईरान के साथ हैं जिसका सबूत भारत में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों ने अमेरिकी और इस्राइल का खुलकर विरोध करने के साथ दे दिया है।
सम्मेलन में भारत और ईरान के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर आयतुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही साहब, प्रतिनिधि सुप्रीम लीडर ऑफ ईरान, तथा डॉ. फतहअली साहब, राजदूत, इस्लामी गणराज्य ईरान सहित बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम, धार्मिक विद्वान एवं मोमिनीन मौजूद रहे।



