लखनऊ: ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के महासचिव मोहम्मद इरफान ख़ान कादरी ने अपने बयान में कहा है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित हज़रत हाजी अल-हरमैन शाह रहमतुल्लाह अलैह की प्राचीन दरगाह और उससे संबंधित भूमि के उपयोग का मामला पिछले कई महीनों से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं जनसामान्य के बीच चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित संस्थाएं तथ्यों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कानूनी पहलुओं पर स्पष्ट एवं पारदर्शी रुख अपनाएं, ताकि जनता का विश्वास बना रहे तथा किसी प्रकार की भ्रांति की स्थिति उत्पन्न न हो।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम-उल-हराम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। इसलिए संबंधित स्थलों पर आवश्यक सुविधाओं, सुव्यवस्थित प्रबंधन और धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी प्रशासनिक निर्णय या कार्यवाही में स्थानीय जनभावनाओं, ऐतिहासिक महत्व तथा धार्मिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
मोहम्मद इरफान ख़ान कादरी ने कहा कि देश की ऐतिहासिक खानकाहें, दरगाहें और आध्यात्मिक केंद्र केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत, गंगा-जमुनी तहज़ीब और ऐतिहासिक पहचान के महत्वपूर्ण स्तंभ भी हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों के तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण, संवेदनशील दृष्टिकोण तथा जिम्मेदाराना व्यवहार समय की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार, प्रशासन, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे संवाद और सहयोग की भावना के साथ ऐसे मुद्दों का समाधान खोजने का प्रयास करें, जिससे धार्मिक सौहार्द, सामाजिक एकता और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
अंत में उन्होंने आम जनता से संयम, एकता और कानूनसम्मत एवं शांतिपूर्ण तरीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि समाज की सामूहिक विरासत और सामाजिक सद्भाव की रक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।



