Tuesday, September 8, 2026
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प्रोफेसर अतीक अहमद फारूकी की तीसरी पुस्तक ‘नई रोशनी’ का विमोचन

लखनऊ: मसूर एजुकेशनल सोसाइटी के तत्वावधान में सेंट रोज पब्लिक स्कूल, गढ़ी पीर खान, ठाकुरगंज में मुटमाज़ पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अतीक अहमद फारूकी की उर्दू में प्रकाशित तीसरी पुस्तक ‘नई रोशनी’ का विमोचन शफीकुज्ज़माँ, पूर्व निदेशक यूथ डेवलपमेंट, एनएसएस, की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सैयद अहसनुल ज़फ़र, पूर्व रीडर, फारसी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में मुटमाज़ पीजी कॉलेज के प्रोफेसर सलमान खान नदवी, अध्यक्ष, अरब कल्चर विभाग, और डॉ. मोहम्मद इमरान खान, अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, उपस्थित थे।

कार्यक्रम का आरंभ ताहिर नदवी की तिलावत और सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मंसूर हसन खाँ की नात से हुआ। संचालन डॉ. सरवत तकी, पूर्व उप-प्राचार्य, शिया पीजी कॉलेज, लखनऊ, ने किया। शहर के शायरों ने अपना-अपना काव्य पाठ प्रस्तुत किया, जिनमें अशअर अलीग, कमर अदीब, इरशाद खलीली, मसूर शाहजहाँपुरी, साबित लखनवी, मोहम्मद आज़म कुरैशी सिधौली और रियाज़ आलम के नाम उल्लेखनीय हैं। अन्य प्रतिभागियों में डॉ. मोहम्मद मदनी अंसारी, मंसूर अहमद, नज़हत शहाब चिश्ती और शरफुद्दीन खान आदि शामिल थे।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. मोहम्मद इमरान खान ने प्रोफेसर अतीक फारूकी से अपने निकट संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह न केवल एक शरीफ-नफ्स इंसान हैं, बल्कि एक विशिष्ट एवं योग्य पत्रकार, साहित्यकार और शायर भी हैं। प्रोफेसर सलमान नदवी ने पुस्तक के लेखक की सराहना करते हुए उन्हें मुटमाज़ पीजी कॉलेज का एक सफल प्राचार्य बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. सैयद अहसनुल ज़फ़र ने ‘नई रोशनी’ के विमोचन के अवसर पर पुस्तक को वर्तमान दौर में सकारात्मक सोच, नैतिक चेतना और सामाजिक सुधार का संदेश आम करने की एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शफीकुज्ज़माँ ने प्रोफेसर अतीक अहमद फारूकी को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक पाठकों में सकारात्मक सोच, रचनात्मक दृष्टिकोण और उज्ज्वल भविष्य के संकल्प को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी।

पुस्तक के लेखक प्रोफेसर अतीक फारूकी ने अपने संबोधन में पुस्तक के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘नई रोशनी’ वास्तव में उनके विचारों की अभिव्यक्ति तथा समाज की विभिन्न समस्याओं के प्रति उनके दृष्टिकोण की परिचायक है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. मंसूर हसन खाँ ने सभी प्रतिभागियों के लिए जलपान एवं भोजन की व्यवस्था की।

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