लखनऊ: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. मोईन खान (मम्मू) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े इस विवाद ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में उठाए जा रहे आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठेंगे और वह ऐसी स्थिति का सामना करने वाले दुनिया के पहले चुनावी अधिकारी हो सकते हैं, जिसके संबंध में 13 करोड़ लोगों की एफआईआर की बात सामने आए।
डॉ. मोईन खान ने कहा कि यह महज विरोध का मामला नहीं, बल्कि जवाबदेही का सवाल है। फॉर्म-6 में संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कथित स्वीकृति के संबंध में सामने आई स्थिति के बाद यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संशोधन किस आधार पर किया गया और अदालत के आदेश का संदर्भ किस प्रकार दिया गया।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त संशोधन को अपनी मंजूरी दिए जाने से इनकार किए जाने के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो गई है। यह पता लगाया जाना चाहिए कि फॉर्म-6 में संशोधन किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में किया गया।
डॉ. मोईन ने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि अदालत के आदेश के संबंध में गलत जानकारी दी गई अथवा ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया जिनकी प्रामाणिकता संदिग्ध है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक का मामला नहीं रहेगा, बल्कि करोड़ों नागरिकों के चुनावी विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय होगा।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि यदि इस पूरे मामले में किसी प्रकार की साजिश या सुनियोजित कार्रवाई हुई है तो उसके पीछे कौन लोग थे और उनकी क्या भूमिका थी। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण निष्पक्ष जांच के माध्यम से होना चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
डॉ. मोईन खान ने कहा कि 13 करोड़ मतदाताओं से जुड़े मामले को सामान्य तकनीकी त्रुटि मानकर टाला नहीं जा सकता। इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा जांच के निष्कर्ष जनता के सामने रखे जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं तो केवल स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं होता। नैतिक और संस्थागत जवाबदेही भी जरूरी है। इसलिए ज्ञानेश कुमार को पद से इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए।



