Friday, July 10, 2026
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बीमा सबके लिए’: आईआरडीएआई के अध्यक्ष श्री अजय सेठ ने बीमा साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ता जागरूकता कॉमिक बुक सिरीज का अनावरण किया

लखनऊ : ‘बीमा सबके लिए’ (Insurance for All) के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के चेयरमैन श्री अजय सेठ ने उपभोक्ताओं के मध्य जीवन बीमा की अवधारणाओं को आसान बनाने और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उपभोक्ता जागरूकता कॉमिक बुक श्रृंखला का अनावरण किया। जीवन बीमा क्षेत्र के प्रमुख लीडर्स ने एक मंच पर आकर जीवन बीमा को सारे देशवासियों और परिवारों के लिए अधिक आसान, सरल और प्रासंगिक बनाने की दिशा में अपने साझा संकल्प को मजबूत किया।

यह शिक्षाप्रद कॉमिक बुक सिरीज जीवन बीमा की समझ को सरल और लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। यह इस तथ्य पर आधारित है कि संभावित खरीदारों के साथ वे लोग भी, जो जीवन बीमा लेने से बचते हैं, प्राय: इसे कठिन मानते हैं। इस पहल का उद्देश्य एमडब्ल्यूपी (Married Women’s Property Act), वेवर ऑफ प्रीमियम (Waiver of Premium – WoP) तथा गंभीर बीमारी राइडर जैसी प्रमुख अवधारणाओं को सरलता से समझाना है। इन विशिष्ट अवधारणाओं को तकनीकी भाषा के बजाय रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। सीखने के माध्यम के रूप में कॉमिक्स का चयन इस बात का संकेत है कि अब कहानी-आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। यह विभिन्न आयु वर्गों और भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों से सहज रूप से जुड़ती है।

यह सिरीज युवा जीवन बीमा सलाहकार सुप्रिया की यात्रा पर आधारित है। इसके माध्यम से वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को “स्टोरी मेमोरीज़” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे लोगों को यह समझने में मदद मिलती है कि पहले लिए गए वित्तीय निर्णय भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। यह प्रयास “बीमा सबके लिए’ के व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक सार्थक कदम है। यह केवल उत्पाद की जानकारी तक सीमित न रहकर उपभोक्ताओं को समझदारी के साथ निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

राष्ट्रीय बीमा जागरूकता दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह पहल आईआरडीएआई और जीवन बीमा उद्योग की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सूचित निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना, जीवन सुरक्षा सॉल्यूशन की समझ को गहरा करना तथा भारतीय परिवारों में वित्तीय तैयारी की भावना को मजबूत करना है।

कॉमिक बुक श्रृंखला का अनावरण करते हुए आईएसी-लाइफ (IAC-Life) के अध्यक्ष श्री कमलेश राव ने कहा, “भारत की विकास गाथा उसके लोगों की उम्मीदों, प्रगति और दृढ़ता से आकार ले रही है। जैसे-जैसे देश अधिक समावेशी और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, परिवारों की वित्तीय तैयारी को मजबूत करना दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। ‘बीमा सबके लिए’ का विजन एक परिवर्तनकारी यात्रा है। इसका उद्देश्य केवल बीमा की पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय परिवार की वित्तीय योजना का अभिन्न हिस्सा सुरक्षा को बनाना है।”

उन्होंने कहा, “इस यात्रा में जीवन बीमा की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह लोगों और परिवारों को वित्तीय आत्मविश्वास प्रदान करता है, उनकी आकांक्षाओं को समर्थन देता है और सुरक्षित परिवारों की मजबूत नींव तैयार करता है। आईआरडीएआई के अध्यक्ष द्वारा जारी की गई यह उपभोक्ता जागरूकता कॉमिक बुक श्रृंखला इस मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुरक्षा के महत्व को एक अभिनव और सहज तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है। पूरे इकोसिस्टम के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हम भारत को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति और परिवार अपनी आकांक्षाओं की सुरक्षा कर सके और देश की विकास यात्रा में आत्मविश्वास के साथ भागीदारी कर सके।”

श्री राव ने पिछले एक वर्ष के दौरान आईएसी-लाइफ द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने “बीमा सबसे पहले’ अभियान के दूसरे चरण की प्रगति की जानकारी दी। आने वाले वर्षों में बीमा जागरूकता और उपभोक्ता सहभागिता को और मजबूत बनाने के लिए समिति की प्राथमिकताओं को भी साझा किया।

 

लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल के महासचिव श्री आदित्य गुप्ता ने कहा, “जीवन बीमा एक ऐसा वादा है, जो लोगों और परिवारों को जीवन की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहने तथा आत्मविश्वास के साथ अपनी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मदद करता है। उद्योग ने अपनी पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार किया है। लेकिन विकास के अगले चरण का उद्देश्य बीमा से जुड़ी बातचीत को और अधिक सरल, सहज तथा देशभर के उपभोक्ताओं के लिए सुलभ बनाना है। यह उपभोक्ता जागरूकता कॉमिक बुक सिरीज कहानी कहने की शैली के माध्यम से लोगों को जोड़ने और उन्हें जीवन बीमा के महत्व को बेहतर ढंग से समझाने की दिशा में एक अभिनव पहल है। लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल, आईआरडीएआई और उद्योग के सभी अग्रणी संस्थानों के साथ मिलकर उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने तथा वित्तीय योजना के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में जीवन बीमा के प्रति विश्वास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

बीमा की पहुंच और जागरूकता बढ़ाने में वर्षों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद देश के अनेक परिवार अब भी अप्रत्याशित जीवन परिस्थितियों के सामने आर्थिक रूप से असुरक्षित बने हुए हैं। उद्योग के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रोटेक्शन गैप को कम करने के लिए जीवन बीमा को अधिक व्यापक रूप से अपनाना दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर ‘इंडिया आस्क्स: व्हाई प्रायोरिटाइज लाइफ इंश्योरेंस?’ विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इसमें आईएसी के अध्यक्ष कमलेश राव, एलआईसी के प्रबंध निदेशक श्री दोराईस्वामी, पीएनबी मेटलाइफ के एमडी एवं सीईओ समीर बंसल, तथा इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ रुशभ गांधी शामिल हुए। इस चर्चा का संचालन स्वतंत्र वित्तीय पत्रकार सुश्री सोनिया शेनॉय ने किया। चर्चा में जीवन बीमा की भूमिका, वित्तीय भविष्य को सुरक्षित बनाने, जागरूकता बढ़ाने तथा देशभर में सुरक्षा संबंधी समाधानों को व्यापक रूप से अपनाने जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

आईएसी-लाइफ नियामक के साथ मिलकर प्रोटेक्शन एजेंडा को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहा है

इस वर्ष का राष्ट्रीय बीमा जागरूकता दिवस ऐसे समय पर आया है, जब भारत का जीवन बीमा क्षेत्र लगातार गति पकड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान उद्योग ने नए व्यवसाय प्रीमियम (एनबीपी) में सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की, जबकि इस अवधि में 2.83 करोड़ से अधिक बीमा पॉलिसियां जारी की गईं। यह जीवन बीमा समाधानों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि उद्योग की वृद्धि मजबूत रही है, लेकिन उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि बीमा की पैठ (इंश्योरेंस पेनिट्रेशन) क्षेत्र की वृद्धि और देश की आर्थिक प्रगति की गति के अनुरूप नहीं है। उनका साझा मत है कि बीमा सुरक्षा को प्रत्येक भारतीय परिवार तक पहुंचाने के लिए जागरूकता, विश्वास निर्माण और वित्तीय साक्षरता की दिशा में निरंतर एवं संगठित प्रयास अत्यंत आवश्यक होंगे।

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