दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लोधी कॉलोनी स्थित एनडीएमसी फ्लैट्स, पालिका कुंज में नवविवाहिता आकृति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की गुत्थी लगातार उलझती जा रही है। मामले की जांच के दौरान सामने आए एक नए डिजिटल साक्ष्य ने पुलिस की जांच को नई दिशा दे दी है। जांच एजेंसियों को आकृति के मोबाइल फोन से पता चला है कि उसने घटना वाले दिन शनिवार को दोपहर 2:22 बजे गूगल पर यह सर्च किया था कि “क्या दूसरी मंजिल से गिरने पर मौत हो सकती है?” इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह सर्च महज एक सामान्य जिज्ञासा थी या फिर इसका घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता और पूरे मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
पालिका कुंज में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नवविवाहिता आकृति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जबकि फोरेंसिक टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल की स्थिति, आसपास मौजूद लोगों के बयान और डिजिटल रिकॉर्ड सहित हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है।
जांच के दौरान आकृति के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई गई। इसी प्रक्रिया में पुलिस को उसकी इंटरनेट सर्च हिस्ट्री मिली, जिसमें घटना से कुछ समय पहले किया गया यह सवाल दर्ज था कि दूसरी मंजिल से गिरने पर किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है या नहीं। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस सर्च के पीछे क्या वजह थी। अधिकारी यह भी जांच रहे हैं कि क्या इसके बाद उसने किसी से बातचीत की थी, किसी को संदेश भेजा था या फिर उसके मोबाइल में ऐसी कोई अन्य गतिविधि दर्ज है, जो मामले की कड़ियां जोड़ने में मदद कर सके।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने मृतका के मोबाइल फोन से कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल डेटा को भी जांच के दायरे में लिया है। तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि घटना से पहले आकृति किन लोगों के संपर्क में थी और उसकी मानसिक स्थिति के बारे में कोई संकेत डिजिटल रिकॉर्ड से मिल सकता है या नहीं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अटकलें लगाना उचित नहीं होगा।
मामले में मृतका के पति, परिजनों और अन्य करीबी लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि विवाह के बाद दंपति का पारिवारिक जीवन कैसा था, क्या किसी प्रकार का विवाद चल रहा था या फिर कोई अन्य कारण था, जिसने इस घटना को जन्म दिया। पड़ोसियों और आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं ताकि घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों का स्पष्ट क्रम तैयार किया जा सके।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट को इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मौत किन परिस्थितियों में हुई और शरीर पर पाए गए निशान किस ओर संकेत करते हैं। इसके साथ ही घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों और डिजिटल डेटा का मिलान कर पुलिस पूरी घटना का क्रम समझने का प्रयास कर रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उसके अनुरूप आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक आपराधिक जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। मोबाइल फोन, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, लोकेशन डेटा और इलेक्ट्रॉनिक संचार जांच एजेंसियों को घटनाओं का क्रम समझने में मदद करते हैं। हालांकि किसी एक डिजिटल गतिविधि को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। न्यायालय में ऐसे साक्ष्यों का मूल्यांकन अन्य परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ किया जाता है।
इस घटना ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे या वह तनाव में नजर आए, तो परिवार और करीबी लोगों को समय रहते उसकी बात सुनने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि इस मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आकृति किसी मानसिक तनाव से गुजर रही थी या नहीं। इस संबंध में पुलिस की जांच जारी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर विश्वास न करें। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका या घटना के कारणों को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का इंतजार कर रही है। इन सभी पहलुओं की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आकृति की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी या नहीं। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जारी है तथा तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



