लखनऊ: ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के तत्ववाधान में एक उच्चस्तरीय बैठक हज़रत सय्यद अय्यूब अशरफ़ किछौछवी की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें अमन-ओ-अमान, सांप्रदायिक सौहार्द, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा तथा सूफ़ी विरासत के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सय्यद बाबर अशरफ़ किछौछवी, हज़रत सय्यद याक़ूब अशरफ़, बी. डी. नक़वी (सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज), पीरज़ादा नासिर अली मीनाई सहित मिशन के अनेक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में ट्रेन यात्रा के दौरान मौलाना तौसीफ़ रज़ा की दुखद मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया गया और इसे इंसानियत तथा संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध बताया गया। मिशन ने घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को उचित मुआवज़ा तथा रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
दरगाह हज़रत हाजी हरमैन शाह के परिसर में कथित अतिक्रमण और नुकसान पहुंचाए जाने के मामले पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में कहा गया कि लगभग सात सौ वर्ष पुरानी यह दरगाह वक्फ संपत्ति है, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। मिशन ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं विजिलेंस जांच, वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल तथा दरगाह की मूल स्थिति बहाल किए जाने की मांग की।
बैठक में डॉ. के. के. सिंह तथा कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए और आरोप लगाया गया कि दरगाह की पवित्रता तथा संपत्ति की वास्तविक स्थिति को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। मिशन ने पूरे मामले की पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मिशन के अध्यक्ष ने कहा कि दरगाह शाह मीना क्षेत्र की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सूफ़ी पहचान है, जिसे कमजोर करने की कोशिशें अत्यंत चिंताजनक हैं।
बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर घोषणा की गई कि वक्फ संपत्तियों और सूफ़ी संस्थानों की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक संघर्ष जारी रखा जाएगा। उपस्थित लोगों ने देश में अमन, भाईचारा, राष्ट्रीय एकता और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के संकल्प को दोहराते हुए दुआ के साथ बैठक का समापन किया।



