अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में आयोजित अंतिम विदाई कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समर्थकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
समर्थकों के अनुसार, सैयद अली ख़ामेनई ने वर्षों तक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ईरान के शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी विकास पर विशेष बल दिया। उनका मानना है कि इन्हीं नीतियों के कारण ईरान आज भी वैश्विक दबाव के सामने झुकने के बजाय अपने आत्मनिर्भर मॉडल पर आगे बढ़ रहा है।
इसी दौरान नाटो देशों की बैठक भी आयोजित हो रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना यात्रा कार्यक्रम बदला। उनके बयान और क्षेत्रीय घटनाक्रम ने पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई लोगों ने यह प्रश्न भी उठाया कि किसी भी धार्मिक नेता या दिवंगत व्यक्ति के अंतिम संस्कार के समय राजनीतिक मतभेदों से ऊप



