लखनऊ। मदरसों को लेकर दिए गए विवादित बयानों पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया ने कड़ी नाराजगी जताई है। बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मोइन खान ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयानों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें आपत्तिजनक, तथ्यहीन और गैर-जिम्मेदाराना बताया।
डॉ. मोइन खान ने कहा कि मदरसों को आतंकवाद से जोड़ना न केवल देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उलेमा के योगदान का अपमान है, बल्कि यह भारत की साझा शैक्षिक और सांस्कृतिक विरासत को भी नज़रअंदाज़ करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को इतिहास का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि देश के अनेक महान व्यक्तित्वों ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मदरसों से प्राप्त की थी।
उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद, शिक्षाविद् एवं राष्ट्रनायक पंडित मदन मोहन मालवीय, हिंदी की महान कवयित्री महादेवी वर्मा तथा समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया सहित अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने प्रारंभिक शिक्षा मदरसों में प्राप्त की थी। यदि आज मदरसों को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, तो यह इन महान विभूतियों की शैक्षिक पृष्ठभूमि और देश के गौरवशाली इतिहास का भी अपमान है।
डॉ. खान ने कहा कि रुहेलखंड से लेकर दिल्ली तक अनेक उलेमा और मदरसा छात्रों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के आंदोलन के दौरान मस्जिदों और सार्वजनिक स्थलों से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाता था और देशभक्ति का संदेश दिया जाता था।
उन्होंने दावा किया कि तस्लीमा नसरीन के कोलकाता कार्यक्रम से पहले बोर्ड ने प्रशासन को आगाह किया था कि उनके कार्यक्रम से मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवादित बयानों से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।
अंत में बोर्ड ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े सभी लोगों से अपील की कि वे धर्म और शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर तथ्यों के आधार पर, संयमित और जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करें, ताकि देश की सामाजिक सद्भावना और आपसी विश्वास को कोई ठेस न पहुंचे।



