Monday, October 12, 2026
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शकूर खान म्यूज़िक फाउंडेशन की पहली ‘1st Baithaki’ ने बिखेरी शास्त्रीय संगीत की सुरमयी छटा

यूपी / कोलकाता भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं किराना घराने की समृद्ध और अमूल्य संगीत विरासत को समर्पित शकूर खान म्यूज़िक फाउंडेशन की पहली ‘1st Baithaki’ का आयोजन कोलकाता के रीजेंट सिटी कम्युनिटी हॉल में किया गया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों और रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पारंपरिक बैठकी की भावना पर आधारित इस विशेष संगीत संध्या में श्रोताओं को कलाकारों के बेहद करीब बैठकर शास्त्रीय संगीत के सुर, भाव और रागों की गहराई का अनुभव करने का अवसर मिला। आयोजन ने कलाकार और श्रोता के बीच आत्मीय संवाद की उस पारंपरिक संस्कृति को जीवंत किया, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की खास पहचान रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत सरवर हुसैन और अमान हुसैन की सारंगी वादन की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। उनके साथ पं. संजय अधिकारी ने तबले पर शानदार संगत की। इसके बाद अर्नब चटर्जी ने अपनी सुमधुर गायन प्रस्तुति से समां बांध दिया। उनके साथ बिलाल खान सलोनवी ने तबले और अखलाक खान ने हारमोनियम पर संगत की। कार्यक्रम का कुशल संचालन अफशा खान ने किया।

किराना घराने की गौरवशाली परंपरा

किराना घराना हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रमुख और प्रभावशाली संगीत परंपराओं में से एक है। यह घराना स्वर की शुद्धता, सुरों की सुंदरता, रागों की सूक्ष्मता, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और राग के ध्यानमय विस्तार के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

शकूर खान म्यूज़िक फाउंडेशन महान सारंगी वादक एवं किराना संगीत परंपरा के प्रतिष्ठित साधक पद्मश्री उस्ताद शकूर खान साहब की स्मृति और उनकी समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है।

संगीत विरासत को आगे बढ़ाने की पारिवारिक पहल

फाउंडेशन की पहल उस्ताद मशकूर अली खान साहब और उनकी चार बेटियों—बेनज़ीर आज़म, रूही अली खान, अफशा खान एवं शहाना अली खान द्वारा की गई है। फाउंडेशन का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक इसकी गौरवशाली विरासत को पहुंचाना है।

फाउंडेशन की आगामी बैठकी और अन्य संगीत आयोजनों के माध्यम से वरिष्ठ एवं महान कलाकारों की विरासत को सम्मान देने, वर्तमान कलाकारों को प्रोत्साहित करने और उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

‘1st Baithaki’ महज एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और पीढ़ियों को जोड़ने वाली सुरों की शाश्वत शक्ति को समर्पित एक भावपूर्ण आयोजन रहा।

शकूर खान म्यूज़िक फाउंडेशन ने भविष्य में भी ऐसे सार्थक और आत्मीय आयोजनों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की विरासत का संरक्षण कला का सम्मान भविष्य की प्रेरणा

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