Sunday, May 17, 2026
No menu items!
spot_img

भोजशाला कमाल मौला मस्जिद फैसला: संवैधानिक संतुलन पर गंभीर सवाल

लखनऊ:मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला कमाल मौला मस्जिद को लेकर दिए गए हालिया फैसले ने देश में कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में भोजशाला कमाल मौला मस्जिद को “वाग देवी मंदिर” माना है और कुछ ऐतिहासिक साक्ष्यों तथा बाबरी मस्जिद मामले में दी गई न्यायिक टिप्पणियों को आधार बनाया है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति देने वाले पुराने प्रशासनिक फैसले को भी रद्द कर दिया गया है। मुस्लिम मजलिस उत्तर प्रदेश ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में संवैधानिक संतुलन और निष्पक्षता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

मुस्लिम मजलिस उत्तर प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद इरफान खान कादरी ने अपने बयान में कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में “आस्था” को आधार बनाकर दिया गया फैसला पहले ही देश के एक बड़े वर्ग में सवाल खड़े कर चुका है। अब उसी आधार को ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के मामलों में लागू किया जाना न्याय के सिद्धांतों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि मस्जिदों, इबादतगाहों और पुरानी इस्लामी इमारतों में मौजूद निशानों या ऐतिहासिक बदलावों के आधार पर उनके धार्मिक स्वरूप पर सवाल उठाए जाएंगे तो इससे संवैधानिक सुरक्षा कमजोर होगी और देश में नए विवाद पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा का अधिकार देता है। अदालतों के फैसलों का सम्मान करना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है, लेकिन संवैधानिक दायरे में रहते हुए किसी फैसले से असहमति जताना और ऊंची अदालत में अपील करना भी हर नागरिक का अधिकार है। भोजशाला जैसे संवेदनशील मामलों का समाधान एकतरफा सोच या बहुसंख्यक भावनाओं के बजाय मजबूत संवैधानिक आधार, ऐतिहासिक ईमानदारी और निष्पक्ष न्याय से ही संभव है।

मोहम्मद इरफान खान कादरी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से प्रशासन की निगरानी में पूजा और नमाज दोनों का क्रम चलता आ रहा था, जिससे सामाजिक सौहार्द बना हुआ था। ऐसे में अचानक हुए कानूनी बदलाव दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ा सकते हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण रहें, किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे से दूर रहें और हर स्थिति में संवैधानिक तथा कानूनी रास्ता अपनाएं।

अंत में मोहम्मद इरफान खान कादरी ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, धार्मिक सहिष्णुता और संवैधानिक व्यवस्था में निहित है। यदि न्याय के मानदंड कमजोर होंगे तो उसका असर केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि सभी संवेदनशील धार्मिक मामलों में न्याय, समानता और संविधान की सर्वोच्चता को हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

ताज़ा ख़बरें