Thursday, October 8, 2026
No menu items!
spot_img

सीमापुरी में पांच मंजिला मकान भरभराकर गिरा, मलबे में दबे 15 लोगों की आशंका; 10 को सुरक्षित निकाला गया

पूर्वी दिल्ली। सीमापुरी इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की क्लस्टर कॉलोनी में पांच मंजिला अवैध मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान के गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। हादसे के बाद मलबे में करीब 15 लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

हादसा बुधवार को सीमापुरी क्षेत्र में स्थित दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की क्लस्टर कॉलोनी में हुआ। बताया जा रहा है कि पांच मंजिला मकान अचानक ढह गया। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। मकान के गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। हादसे की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राहत एजेंसियों को सूचना दी गई।

मकान के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब 15 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद बचाव दलों ने बिना समय गंवाए अभियान शुरू किया। घटनास्थल पर पहुंचे जवानों और कर्मचारियों ने मलबे को हटाने का काम शुरू किया, ताकि अंदर फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ की टीम के साथ दिल्ली दमकल विभाग, पुलिस और नगर निगम के कर्मचारी शामिल रहे। अलग-अलग एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मलबे को हटाते समय किसी और हिस्से के गिरने का खतरा बना हुआ था। इसके बावजूद राहतकर्मियों ने सावधानी के साथ अभियान को आगे बढ़ाया।

बचाव अभियान के दौरान अब तक दस लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनकी स्थिति का जायजा लिया गया। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में भी राहत की भावना दिखाई दी, लेकिन मलबे में अभी और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते अभियान जारी रखा गया।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी घटनास्थल पर पहुंच गए। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों की जानकारी लेने के लिए मौके पर जमा हो गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए लोगों को घटनास्थल से दूर रखने की कोशिश की।

पांच मंजिला मकान के अचानक गिरने की घटना ने इलाके में निर्माण व्यवस्था और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी में मकान को अवैध बताया जा रहा है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि इस भवन का निर्माण किस तरह हुआ और इसमें सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

अवैध निर्माण से जुड़ी इमारतों में अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खतरा बना रहता है। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में यदि कोई बहुमंजिला इमारत कमजोर निर्माण के साथ खड़ी हो तो उसके गिरने की स्थिति में जान-माल का नुकसान बढ़ सकता है। सीमापुरी की इस घटना ने भी इसी तरह के सवालों को सामने ला दिया है।

हादसे के बाद राहत एवं बचाव एजेंसियों ने सबसे पहले उन स्थानों की पहचान की, जहां लोगों के फंसे होने की संभावना थी। इसके बाद मलबे को धीरे-धीरे हटाया गया। एनडीआरएफ और दमकल कर्मियों ने बचाव उपकरणों की मदद से मलबे की जांच की। आशंका के आधार पर अलग-अलग हिस्सों में तलाश अभियान चलाया गया।

मलबे से दस लोगों को निकालना बचाव अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। हालांकि प्रशासन की प्राथमिकता अभी भी यह पता लगाना है कि क्या कोई अन्य व्यक्ति मलबे में फंसा हुआ है। इसी वजह से बचाव दल लगातार मलबे की जांच कर रहे हैं।

घटना के बाद प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया है, जबकि राहत एजेंसियां मलबा हटाने और संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। हादसे के कारण आसपास के क्षेत्र में भी लोगों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।

इस तरह की घटनाओं में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मलबे में फंसे लोगों के लिए हर मिनट अहम होता है। यही वजह है कि सूचना मिलने के बाद बचाव एजेंसियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ जैसी विशेषज्ञ टीमों की मौजूदगी से बचाव कार्य को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक मकान गिरने के बाद अचानक तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही क्षणों में इमारत का बड़ा हिस्सा नीचे आ गया। इसके बाद लोगों ने मौके पर पहुंचकर अपने स्तर से भी मदद करने की कोशिश की। हालांकि मलबा भारी होने के कारण उसे हटाना आसान नहीं था। बाद में पुलिस और राहत एजेंसियों के पहुंचने के बाद व्यवस्थित तरीके से बचाव कार्य शुरू किया गया।

अब प्रशासन के सामने हादसे की वजह का पता लगाने की जिम्मेदारी भी होगी। यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि पांच मंजिला इमारत किस स्थिति में थी, उसमें कितने लोग रह रहे थे और भवन के निर्माण से संबंधित नियमों का पालन किया गया था या नहीं। यदि निर्माण अवैध पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल भी उठ सकता है।

इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में भवनों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राजधानी के कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग छोटे और बहुमंजिला मकानों में रहते हैं। ऐसे में किसी इमारत के कमजोर होने या नियमों के विपरीत निर्माण होने पर बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है।

फिलहाल सीमापुरी में राहत और बचाव अभियान जारी है। दस लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है, जबकि करीब 15 लोगों के दबे होने की आशंका के बाद बचाव दल पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे हर संभावित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके साथ ही हादसे की वास्तविक वजह और मकान के निर्माण से जुड़े तथ्यों की जांच भी आगे की जाएगी।

सीमापुरी की यह घटना राजधानी में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मलबे से और कितने लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है और प्रशासन की जांच में इस पांच मंजिला मकान के निर्माण को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

ताज़ा ख़बरें