लखनऊ: मजलिसे उलमा-ए-हिंद के महासचिव और इमाम-ए-जुमा लखनऊ, मौलाना सैय्यद कल्बे जवाद नक़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को एक विस्तृत पत्र भेजकर ईरान के प्रति भारत सरकार के रवैये और देश के विभिन्न हिस्सों में शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई के शोक मनाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर कड़ी चिंता और नाराज़गी का इज़हार किया। मौलाना ने भारत सरकार द्वारा आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत के बाद शोक संदेश जारी न करने की भी निंदा की और इसे अमेरिकी दबाव में उठाया गया कदम बताया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि 28 मार्च 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने उस समय ईरान पर हमला किया जब ओमान में वार्ता जारी थी, और इस हमले में आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ शहीद हो गए, जिनमें उनकी एक छोटी नातिन भी शामिल थी। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर घटना पर भारत सरकार की ओर से न तो कोई निंदा की गई और न ही कोई शोक संदेश जारी किया गया, जबकि ईरान को भारत का एक पुराना और विश्वसनीय मित्र माना जाता है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं।
मौलाना ने अपने पत्र में यह सवाल भी उठाया कि एक ओर ईरान पर हुई गंभीर आक्रामकता, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया गया, उस पर सरकार खामोश रही, जबकि दूसरी ओर क़तर और दुबई पर ईरान के हमलों की तुरंत निंदा की गई, जबकि इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया था बल्कि सैन्य ठिकानों और उन कंपनियों को लक्ष्य किया गया था जिनका संबंध अमेरिका और इज़राइल से था। पत्र में ईरान के शहर मीनाब के एक स्कूल पर हमले में 160 से अधिक मासूम छात्राओं की शहादत और तेहरान के महात्मा गांधी अस्पताल पर बमबारी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे अमानवीय घटनाओं पर भी सरकार की चुप्पी बेहद दुखद और निंदनीय है। मौलाना ने कहा कि इस रवैये से न केवल भारत की विदेश नीति पर सवाल उठे हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी प्रभावित हुई है



