लखनऊ: क़ायदे मिल्लत डॉ. जलील फ़रीदी के यौमे वफ़ात के सिलसिले में गत दिनों आयोजित ताज़ियती व फ़िक्री बैठक की और अधिक जानकारी प्राप्त हुई है। प्राप्त विवरण के अनुसार इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मायाराम वर्मा अपने साथियों के साथ शामिल हुए और डॉ. जलील फ़रीदी को ख़िराजे अकीदत पेश किया। वक्ताओं ने क़ायदे मिल्लत की सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सौहार्द तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए दी गई सेवाओं को याद करते हुए वर्तमान परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मायाराम वर्मा ने कहा कि डॉ. जलील फ़रीदी ने हमेशा सामाजिक न्याय और वंचित तबकों की आवाज़ को मज़बूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि आज भी उनके विचार नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में धार्मिक भावनाओं का उपयोग कर सत्ता बनाए रखने की कोशिशें लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत हैं। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की ताकतों से जनता को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन राजनीतिक दांव-पेंच और भ्रामक प्रचार के माध्यम से चुनावी परिणामों को प्रभावित किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
मायाराम वर्मा ने अपने संबोधन में लोगों से अपील की कि वे क़ायदे मिल्लत डॉ. जलील फ़रीदी द्वारा बताए गए सामाजिक न्याय, एकता और लोकतांत्रिक जागरूकता के मार्ग पर चलकर प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन के लिए संघर्ष करें।
इस अवसर पर पी.सी कुरील सहित विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय हस्तियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा डॉ. जलील फ़रीदी की सामाजिक एवं राष्ट्रीय सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के अलावा अन्य समुदायों के लोगों ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि क़ायदे मिल्लत डॉ. जलील फ़रीदी के यौमे वफ़ात पर आयोजित इस कार्यक्रम को सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



